अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ही महिलाओं के योगदान को याद करने और इसके लिए तमाम जतन करने को मिस महाराष्ट्र रह चुकीं चर्चित अभिनेत्री नयना मुके सही नहीं मानतीं। उनके मुताबिक जननी और जन्मभूमि दो ऐसी मातृशक्तियां हैं जिनका ध्यान हर इंसान को सुबह सबसे पहले आता है। इसलिए, समाज को रीतियां और नीतियां ऐसी बनानी चाहिए कि हर बेटे को स्त्रियों का आदर और सम्मान करने की शिक्षा घर में ही मिले और सिर्फ महिला दिवस पर ही नहीं हर दिन उनकी तरफ उठने वाली नजर स्नेह और सम्मान सहित उठे।
International Women’s Day 2021: नयना मुके की खरी खरी, बेटियों का रोज सम्मान हो, यही असली महिला दिवस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने निजी जीवन में आए बदलाव का श्रेय नयना अपनी मां सुनंदा मुके को देती हैं। 'अमर उजाला' से खास बातचीत में नयना कहती हैं कि मेरी मां ने मुझे जो सबसे पहले बात सिखाई वह थी कभी हिम्मत न हारना। अब भी समाज में बेटियों के बड़े होते ही पहला लक्ष्य अधिकतर मां बाप का उनकी शादी कर देने का होता है। लेकिन, मेरी मां ने मुझे पढ़ने और सीखने की पूरी छूट दी। मास मीडिया में स्नातक होने के बाद मैंने पत्रकारिता भी की, लेकिन जब मेरा मन थिएटर और सिनेमा में लगा तो मां ने वहां भी पूरा हौसला बढ़ाया। मां ने ही मुझे थिएटर में परास्नातक करने के लिए प्रेरित किया।
नयना मुके का निभाया देवी लक्ष्मी का किरदार महाराष्ट्र के गांव गांव और शहर शहर चर्चित रहा है। इस किरदार की अपनी भाव भंगिमाओं के लिए नयना अपनी नृत्य गुरु समिधा शिंदे को पूरा श्रेय देती हैं। वह कहती हैं, ‘समिधा और मेरी मां सुनंदा जैसी महिलाएं हर दिन को महिला दिवस की तरह मनाती है। मां ने सिर्फ मुझे ही पढ़ाई के लिए प्रेरित किया हो ऐसा नहीं है, उन्होंने अपने संपर्क में आई हर बेटी को कुछ भी करने से पहले पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रोत्हासित किया। इसी तरह मुझे वर्ल्ड टूर पर लेकर जाने वाली समिधा जी ने भी मेरी तरह तमाम बेटियों को अपने कौशल, अपनी कला को निखारने का मौका दिया।’
ये पूछे जाने पर कि पत्रकारिता से अभिनय में आने का मन कैसे किया। नयना छूटते ही स्मिता पाटिल का नाम लेती हैं। लोग उन्हें स्मिता पाटिल जैसी ही कुशल अभिनेत्री मानते भी हैं। स्मिता पाटिल के करियर में बड़ा रोल निभाने वाले निर्देशक श्याम बेनेगल ने भी नयना के अभिनय की तारीफ की है। नयना कहती हैं, ‘स्मिता पाटिल का अभिनय देखकर मैं बड़ी हुई हूं। समानातंर और मसाला सिनेमा के बीच उन्होंने जो बेहतरीन संतुलन साधा, वह बेमिसाल रहा है। एक तरफ ‘नमक हलाल’ में उन्होंने अपनी कामुकता से दर्शकों के दिल जीते तो वहीं ‘मंथन’, ‘चक्र’, ‘बाजार’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्में अभिनय के किसी भी विद्यार्थी के लिए पाठशाला जैसी हैं।’
ओटीटी आने के बाद बदले मनोरंजन के आकाश को लेकर भी नयना मुके काफी सजग रहती हैं। वह कहती हैं, ‘यहां भी एक महिला ने ही सबसे आगे का मुकाम हासिल कर रखा है और वह हैं एकता कपूर। कारोबारी समझ के मामले में एकता जैसा दूसरा हुनरमंद मुझे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में नजर नहीं आता। हुनर की उनकी समझ और बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के आने वाले लोगों को भी जिस तरह वह तलाशकर काम देती हैं, वह काबिले तारीफ है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हर महिला को आत्मनिर्भर बनने का सबसे बड़ा सबक एकता से लेना चाहिए।’