चर्चित फिल्मकार मधुर भंडारकर की जनवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू हुई फिल्म 'इंडिया लॉकडाउन' की मार्च के पहले हफ्ते में खत्म हो गई। मधुर भंडारकर ने ये फिल्म लॉकडाउन के दौरान लोगों के साथ हुई परेशानियों के साथ साथ इस दौरान मानवीय संवेदनाओं में आए बदलावों पर बनाई है। फिल्म की शूटिंग खत्म होने पर फिल्म की पूरी यूनिट ने एक साथ अपनी खुशी साझा की।
इस फिल्म में दिखेंगी सन्नाटे की सच्ची कहानियां, आहाना कुमरा की 'इंडिया लॉकडाउन' की शूटिंग खत्म
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अभिनेत्री आहाना कुमरा के किरदार की परिक्रमा करती इस फिल्म में साई तम्हणकर, श्वेता बासु प्रसाद, ऋषिता भट्ट आदि भी अहम भूमिकाओं में हैं। श्वेता बासु प्रसाद को लेकर मधुर हाल ही में मुंबई के कभी रेड लाइट एरिया रहे कमाठीपुरा भी गए थे। आहाना इस फिल्म में एक पायलट का किरदार निभा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक फिल्म में आहाना का किरदार तो एक घूमने फिरने वाली और लगातार सफर करते रहने वाली कामकाजी महिला का है। लेकिन, जब देश में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लागू किया जाता है तो वह महिला भी अपने घर में कैद होने के लिए मजबूर हो जाती है। अपने किरदार के बारे में आहाना ने खुद बताया है कि वह फिल्म में एक पायलट का किरदार निभा रही हैं जो लॉकडाउन के समय मुंबई स्थित अपने घर में फंस जाती है।
मधुर भंडारकर ने अपने फिल्मी करियर में 'चांदनी बार', 'पेज 3', 'सत्ता', 'फैशन', 'कॉर्पोरेट', 'हीरोइन' जैसी महिला प्रधान फिल्में बनाई हैं। और इन फिल्मों के जरिए उन्होंने ज्यादातर समाज की सच्चाई को ही उजागर किया है। आहाना कुमरा मधुर भंडारकर की फिल्म शैली से बहुत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा से मधुर भंडारकर और उनके काम की प्रशंसा करती हूं। फिल्म 'इंडिया लॉकडाउन' के लिए मैं अपने हिस्से की शूटिंग मुंबई के ही एक घर में कर रही थी। सब कुछ बहुत अच्छे से हो गया है है।'
'इंडिया लॉकडाउन' फिल्म की शूटिंग मधुर भंडारकर ने मुंबई और आसपास के इलाकों में की है। मधुर के मुताबिक, 'यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। इसकी कहानी लॉकडाउन के शुरुआती दो महीने यानी मार्च-अप्रैल की कहानी दिखाएगी। फिल्म में बताया जाएगा कि लॉकडाउन के शुरुआती दौर में प्रवासी मजदूरों, सेक्स वर्करों, व्यापारियों और घर में बैठकर अकेलापन महसूस कर रहे लोगों की जिंदगियां कैसी हो गई थीं? सब लोग घरों में बैठे हुए थे और शुरुआती दिनों में तो किसी को पता भी नहीं था कि आखिर करें तो करें क्या? हम लोग ऐसी जिंदगी के कभी आदी रहे ही नहीं।'