भारतीय क्रिकेट में हरियाणा हरिकेन के नाम से मशहूर रहे पूर्व कप्तान कपिल देव निखंज सोमवार को 61 साल के हो रहे हैं। उनकी कप्तानी में ही भारत ने 1983 में पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता। जन्मदिन की पूर्वसंध्या पर कपिल देव से पंकज शुक्ल ने की ये एक्सक्लूसिव बातचीत।
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विशेष: 83 वर्ल्ड कप की याद कर अमर उजाला से बोले कपिल देव, कैप्टन जो होता है थोड़ा पगला होता है
Mon, 06 Jan 2020 08:12 AM IST
anand anand
पंकज शुक्ल, मुंबई
पंकज शुक्ल, मुंबई
Published by: anand anand
Updated Mon, 06 Jan 2020 08:12 AM IST
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कपिल देव
- फोटो : सोशल मीडिया
kapil dev
- फोटो : अमर उजाला
1983 के वर्ल्डकप के समय इतना आसान नहीं था किसी मैच को टीवी पर देख पाना। कानपुर में रिजर्व बैंक के पास टीम की जीत का बैनर देखकर तमाम लोगों को इस जीत का पता चला था। उस जीत की याद के बारे में कुछ कहेंगे?
हमने कभी महसूस नहीं किया कि ये इतनी बड़ी जीत हुई है। अपने देशवासियों से मिला प्यार या मोहब्बत हमेशा याद रहता है। जितना हमने किया लेकिन उससे हजार गुना प्यार मोहब्बत लोगों से मिली। जैसा हमें प्यार मोहब्बत मिली उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
हमने कभी महसूस नहीं किया कि ये इतनी बड़ी जीत हुई है। अपने देशवासियों से मिला प्यार या मोहब्बत हमेशा याद रहता है। जितना हमने किया लेकिन उससे हजार गुना प्यार मोहब्बत लोगों से मिली। जैसा हमें प्यार मोहब्बत मिली उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
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कपिल देव
- फोटो : social Media
क्रिकेट में पिछले दो तीन दशकों में काफी बदलाव आया है, क्रिकेटर्स अपनी निजी जिंदगी भी सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, इस पर आपकी क्या टिप्पणी है?
हमें नए जमाने में नई पीढ़ी के साथ चलना ही चाहिए। उनकी आलोचना नहीं करनी चाहिए जब तक कि वे क्रिकेट के मैदान में अपना सौ प्रतिशत दे रहे हैं। उसके अलावा वे क्या कर रह हैं, वो सब चलता है। ये नई पीढ़ी है, नई सोच है। अगर हम अपने मां बाप को देखें तो उनका तरीका अलग था, हमारा तरीका अलग है, हमारे बच्चों का तरीका अलग है। अगर हम चाहें कि आने वाली पीढ़ी न बदले ये कभी हो नहीं सकता। ये स्टाइल होता है तभी मीडिया वाले भी उन्हें पसंद करते हैं। मैं इस बारे में ज्यादा सोचता नहीं हूं।
हमें नए जमाने में नई पीढ़ी के साथ चलना ही चाहिए। उनकी आलोचना नहीं करनी चाहिए जब तक कि वे क्रिकेट के मैदान में अपना सौ प्रतिशत दे रहे हैं। उसके अलावा वे क्या कर रह हैं, वो सब चलता है। ये नई पीढ़ी है, नई सोच है। अगर हम अपने मां बाप को देखें तो उनका तरीका अलग था, हमारा तरीका अलग है, हमारे बच्चों का तरीका अलग है। अगर हम चाहें कि आने वाली पीढ़ी न बदले ये कभी हो नहीं सकता। ये स्टाइल होता है तभी मीडिया वाले भी उन्हें पसंद करते हैं। मैं इस बारे में ज्यादा सोचता नहीं हूं।
कपिल देव
- फोटो : file
इन लोगों के साथ आपने क्रिकेट कोच के रूप में भी वक्त बिताया है तो जो ये ...
(सवाल पूरा होने से पहले ही) मैंने ज्यादा वक्त नहीं बिताया। चार छह महीने बतौर कोच बिताए ज्यादा मुझे मौका मिला नहीं कि इन लोगों के साथ रह सकूं तो इसकी मैं चर्चा न ही करूं तो ही अच्छा होगा।
आपने 131 टेस्ट मैच खेले, 225 वनडे मैच खेले, दो बार एक पारी में 10 विकेट लिए, इन उपलब्धियों में उस दौर पर इतनी चर्चा शायद नहीं होती रही होगी, कभी आप अपने समकालीन खिलाड़ियों पर इस सब पर चर्चा करते हैं?
आप चर्चा कर सकते हैं। अगर हम चर्चा करें तो हमसे दो जेनरेशन पहले के खिलाड़ी क्या करते होंगे उनके पास तो वो भी नहीं होता था। अगर कोई उनको खाना खिला देता था तो वो भी बड़ी बात होती थी। भाग मिल्खा भाग में मिल्खा सिंह को एक गिलास दूध के लिए भागना होता है। हर समय वक्त बदलता है। हमें अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए। हमसे दो पीढ़ी पहले टेस्ट मैच खेलने के 50 रुपये मिलते थे, आने वाले दिनों में हो सकता है एक मैच के एक करोड़ मिलें। तो हमें किसी खिलाड़ी की जेब की बजाय उसके खेल पर नजर रखनी चाहिए।
(सवाल पूरा होने से पहले ही) मैंने ज्यादा वक्त नहीं बिताया। चार छह महीने बतौर कोच बिताए ज्यादा मुझे मौका मिला नहीं कि इन लोगों के साथ रह सकूं तो इसकी मैं चर्चा न ही करूं तो ही अच्छा होगा।
आपने 131 टेस्ट मैच खेले, 225 वनडे मैच खेले, दो बार एक पारी में 10 विकेट लिए, इन उपलब्धियों में उस दौर पर इतनी चर्चा शायद नहीं होती रही होगी, कभी आप अपने समकालीन खिलाड़ियों पर इस सब पर चर्चा करते हैं?
आप चर्चा कर सकते हैं। अगर हम चर्चा करें तो हमसे दो जेनरेशन पहले के खिलाड़ी क्या करते होंगे उनके पास तो वो भी नहीं होता था। अगर कोई उनको खाना खिला देता था तो वो भी बड़ी बात होती थी। भाग मिल्खा भाग में मिल्खा सिंह को एक गिलास दूध के लिए भागना होता है। हर समय वक्त बदलता है। हमें अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए। हमसे दो पीढ़ी पहले टेस्ट मैच खेलने के 50 रुपये मिलते थे, आने वाले दिनों में हो सकता है एक मैच के एक करोड़ मिलें। तो हमें किसी खिलाड़ी की जेब की बजाय उसके खेल पर नजर रखनी चाहिए।
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KAPIL DEV
- फोटो : file photo
टेस्ट मैच को घटाकर पांच से चार दिन का कर देने की पहल पर आप क्या कहेंगे?
जो मर्जी है करो। ये जो क्रिकेट के बैठे हुए लोग हैं उनसे मैं यही कहना चाहूंगा। अनुरोध करना चाहूंगा कि ज्यादा बदलाव मत करो, जो परंपरा है उसे हमें भूलना नहीं चाहिए और उसको बरकरार रखना चाहिए। जैसे कि विंबलडन है आज भी पिछले सौ साल से घास पर खेला जाता है। वही तरीका है। कुछ चीजें आप न बदलें तो बेहतर है। आप टी 20 बदलो, आप वनडे क्रिकेट बदलो लेकिन आप टेस्ट मैच बदलोगे तो हमें थोड़ी परेशानी होगी। हां आप उसे कैसे मनोरंजक बना सकते सकते हैं उसके ऊपर चर्चा होनी चाहिए।
जो मर्जी है करो। ये जो क्रिकेट के बैठे हुए लोग हैं उनसे मैं यही कहना चाहूंगा। अनुरोध करना चाहूंगा कि ज्यादा बदलाव मत करो, जो परंपरा है उसे हमें भूलना नहीं चाहिए और उसको बरकरार रखना चाहिए। जैसे कि विंबलडन है आज भी पिछले सौ साल से घास पर खेला जाता है। वही तरीका है। कुछ चीजें आप न बदलें तो बेहतर है। आप टी 20 बदलो, आप वनडे क्रिकेट बदलो लेकिन आप टेस्ट मैच बदलोगे तो हमें थोड़ी परेशानी होगी। हां आप उसे कैसे मनोरंजक बना सकते सकते हैं उसके ऊपर चर्चा होनी चाहिए।
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