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प्रेमी जोड़ों को गलत मैसेज देती है धड़क, क्यों देखें और क्यों न देखें, पांच कारण

Fri, 20 Jul 2018 11:26 AM IST
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला Updated Fri, 20 Jul 2018 11:26 AM IST
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is dhadak gives wrong message to lovers why should you watch the film here are the reasons
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ब्लॉकबस्टर अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी की डेब्यू फिल्म 'धड़क' ने आज सिनेमाघरों पर दस्तक दे ही दी। श्रीदेवी के फैंस उनकी बेटी में उनकी झलक देखने थियेटर तक जरूर जाएंगे। हम आपको बताते हैं कि कौन से कारण आपको 'धड़क' देखने को मजबूर कर सकते हैं और कौन से नहीं। एक मैसेज स्पष्ट है प्यार करने वालों को ये फिल्म गलत मैसेज देती है, इसलिए जो भी युवा धड़क के प्रेमी जोड़े को आइकन समझे वो इसे केवल मनोरंजन के लिए देखें।

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क्यों देखें-

जाह्नवी पर बेस्ड फिल्म


जैसा सोचा था, वहीं हुआ बहुप्रतिक्षित फिल्म 'धड़क' ने साबित कर दिया कि ये पूरी तरह जाह्नवी पर बेस्ड फिल्म है। ऑनर किलिंग जैसे संवेदनशील मुद्दे को केवल एक सीन तक दिखा देने पर इतिश्री हो गई। मराठी ब्लॉकबस्टर 'सैराट' के अंत को भी जाह्नवी के हिसाब से बदल दिया गया। 'बियॉन्ड इ क्लाउड' में एक्टिंग का लोहा मनवा चुके ईशान खट्टर इस फिल्म में दिखे जरूर लेकिन जाह्नवी के स्टारडम के सामने वो टिक नहीं पाए।

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निर्देशन का कमाल

राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में निर्देशक शशांक खेतान ने कमाल का काम किया है। शशांक खेतान इनकी पिछली दोनों फिल्में 'हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया' और 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' बॉक्स आफिस पर हिट रही थी। यही वजह है कि धड़क से दर्शकों और ट्रेड को कुछ ज्यादा ही उम्मीदें हैं। जिस तरह से शशांक खेतान ने उदयपुर और कोलकाता को कैमरे में कैद किया है वो बेहतरीन है। कई ऐसी जगह है जहां आपको श्रीदेवी की याद आएगी। मराठी फिल्म 'सैराट' से तुलना करेंगे तो शायद यह फिल्म आशाओं पर खरी न उतरे, शशांक खेतान ने स्क्रीनप्ले में समय-समय पर बदलाव किए हैं।

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स्टारकास्ट से मिलिए

जाह्नवी हर मामले में ईशान से आगे रहीं। ठाकुर रतन सिंह के रोल में आशुतोष राणा के लिए ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं था। मधुकर के दोस्त बने अंकित बिष्ठ और श्रीधरन ने अपने रोल से इंसाफ किया। फिल्म के डायरेक्टर शशांक ने शुरुआत में फिल्म को ज्यादा खींचा, बाद में अचानक से सबकुछ समेट दिया। फिल्म का म्यूजिक रिलीज से पहले ही युवाओं की जुबां पर है। फिल्म के दो गाने 'धड़क है न' और 'पहली बार' का फिल्मांकन देखते ही बनता है।

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क्यों न देखें-

युवाओं को गलत मैसेज


बेटी का पिता के खिलाफ होना तो समझ आता है, लेकिन पिस्तोल की नोक पर प्रेमी को भगा ले जाना और शादी कर लेना, युवाओं को गलत मैसेज देता है। अपने फेवरेट हीरो-हीरोइन को आइकन समझने वाला युवा वर्ग फिल्म से मिले मैसेज का गलत मतलब निकाल सकता है। घर से भागने के फैसले को किसी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि मसाला फिल्मों की तरह 'धड़क' का आगाज तो सही है, लेकिन अंजाम भी बहुत गलत दिखाया गया है।

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