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जगजीत सिंह के आसपास रहना पसंद नहीं करते थे स्टूडेंट्स, जानिए क्यों गजल के बीच में सुनाते थे चुटकुले

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Avinash Pal Updated Sat, 09 May 2020 09:00 PM IST
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Jagjit Singh Throwback life and intresting moments
चित्रा सिंह के साथ जगजीत सिंह - फोटो : चित्रा सिंह

देश में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते लॉकडाउन जारी है। ऐसे में आम लोगों से सितारों तक पर इसका असर देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन की वजह से सिनेमा भी ठप पड़ा है और सभी शूटिंग्स कैंसिल हैं। कोरोना काल में हम आपको मनोरंजन जगत से जुड़े पुराने किस्सों से रूबरू करवा रहे हैं। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज बात करते हैं जगजीत सिंह की।

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जगजीत सिंह

दरअसल जालंधर का डीएवी कॉलेज उन दिनों जालंधर टाउनशिप के बाहर हुआ करता था और उसका नया हॉस्टल कॉलेज के सामने की सड़क के उस पार था। जगजीत सिंह इसी हॉस्टल में रहते थे। लड़के उनके आसपास के कमरों में रहना पसंद नहीं करते थे क्योंकि जगजीत सिंह सुबह पांच बजे उठ कर दो घंटे रियाज करते थे। वह न खुद सोते थे, न बगल में रहने वाले लड़कों को सोने देते थे। बहुत कम लोगों को पता है कि उन्हीं दिनों ऑल इंडिया रेडियो के जालंधर स्टेशन ने उन्हें उप-शास्त्रीय गायन की शैली में फेल कर दिया था।

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जगजीत सिंह

जगजीत सिंह से जुड़ा एक किस्सा आपको बताते हैं जब एक बार सुभाष घई (मशहूर फिल्म निर्देशक) और जगजीत सिंह अपने अपने विश्वविद्यालयों की तरफ से एक अंतर राज्य महाविद्यालय युवा उत्सव में भाग लेने बेंगलुरु गए थे। जगजीत पर किताब लिखने वाली सत्या सरन ने बताया था कि, 'सुभाष घई ने मुझे बताया था। रात 11 बजे जगजीत का नंबर आया। माइक पर जब उद्घोषक ने घोषणा की कि पंजाब यूनिवर्सिटी का विद्यार्थी शास्त्रीय संगीत गाएगा तो वहाँ मौजूद लोग जोर से हंस पड़े, क्योंकि उनकी नजर में पंजाब तो भंगड़ा के लिए जाना जाता था।'

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जगजीत सिंह

सत्या सरन को सुभाष ने बताया था, 'जैसे ही वे (जगजीत) स्टेज पर आए लोग सीटी बजाने लगे। मैं सोच रहा था कि वो बुरी तरह से फ़्लॉप होने वाले हैं। उन्होंने बहरा कर देने वाले शोर के बीच आंख बंद कर आलाप लेना शुरू किया। तीस सेकेंड के बाद वो गाने लगे, धीरे-धीरे जैसे जादू हुआ। वहां मौजूद श्रोता शास्त्रीय संगीत को अच्छी तरह से समझते थे। जल्द ही वो तालियां बजाने लगे। पहले थम-थम कर और बाद में हर पांच मिनट पर पूरे जोश के साथ।जब उन्होंने गाना खत्म किया तो इतनी जोर से तालियाँ बजीं कि मेरी आंखों में आंसू आ गए।'

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जगजीत सिंह

बता दें कि जिस रिकॉर्ड ने जगजीत की पहचान पूरे देश में बनाई वो था 'द अनफॉरगेटेबल।' इस बारे में जगजीत सिंह के छोटे भाई करतार सिंह ने बताया था, 'इसकी सफलता का कारण था मधुर संगीत और उनका नज्म का चुनाव। उनके आने से पहले गजल का अंदाज अलग तरीके का था। वो शास्त्रीय था, उसमें साज के रूप में तबले का ही इस्तेमाल होता था और साथ में हारमोनियम और सारंगी का। लेकिन जगजीत ने संगीत में पश्चिमी वाद्य यंत्रों के साथ स्टीरियोफोनिक रिकॉर्डिंग के जरिए गजल को समय के अनुकूल बना दिया।' 

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