अपनी मां श्रीदेवी की तरह ही फूंक फूंक कर फिल्मों का चयन करती दिख रहीं अभिनेत्री जान्हवी कपूर बातचीत में शुरू से सहज रही हैं। इंटरव्यू में वह कभी पहले से सवाल नहीं मांगतीं। ये भी जिद नहीं होती कि सवाल बस किसी खास विषय पर ही हों या कि सिर्फ उनकी आने वाली फिल्मों पर ही हों। नए सितारों में जितना खुलकर वह बात करती हैं, दूसरी अभिनेत्रियों को वहां तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। और, जान्हवी इस बात का श्रेय अपनी मम्मी को देती है।
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मां श्रीदेवी के साथ जान्हवी कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘मदर्स डे’ पर साझा करने को वैसे तो तमाम संस्मरण फिल्मी सितारों के हैं, लेकिन अपनी मां का जिक्र चलने पर जिस तरह से जान्हवी का सिर गर्व से ऊंचा होता है, वह बस देखने से ही महसूस किया जा सकता है। श्रीदेवी की बेटी होने का उन्हें फख्र है और वह बस इसी बात पर अफसोस करके रह जाती हैं कि वह अपने अभिनय से अपनी मां को गर्वित देखने का समय नहीं देख पाईं। जान्हवी कहती हैं, ‘लोग कहते हैं कि मुझमें बहुत कुछ मम्मी जैसा ही है। तो मैं कहती हूं कि होना भी चाहिए। मैं मम्मी की बहुत लाडली रही। बड़ी होने के बावजूद मुझे ही उनका लाड ज्यादा मिला। उनको शायद लगता था कि मेरी छोटी बहन खुशी तो दुनिया जानती है पर मैं उतनी होशियार नहीं हो पाई।’
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जान्हवी कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जान्हवी कपूर अपनी दिवंगत मां श्रीदेवी के बारे में सवाल पूछे जाने पर भावुक तो होती हैं पर अब वह उनकी यादों को अपनी ताकत बनाना सीख गई हैं। वह बताती हैं, ‘शुरू में तो उनके चले जाने का एहसास ही नहीं हुआ। मन मानता ही नहीं था कि वह नहीं है। कई महीने तो इसी में गुजर गए। मुझे याद भी नहीं कि मैं उन दिनों क्या सोचती थी, क्या करती थी। लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपनी मां के साथ साझा किए हर विचार को अमली जामा पहनाना है। मुझे तो अब भी महसूस होता है कि वह मेरे आसपास ही हैं। वह हमेशा मुझे हर बात के लिए रास्ता दिखाती रहती हैं। अब भी मैं परेशान होती हूं तो आंखें मूंद कर यही सोचती हूं कि वह होतीं तो क्या सलाह देतीं और बस परेशानी दूर हो जाती है।’
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जान्हवी कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्मों में आने के जान्हवी के फैसले पर शुरू में उनकी मां श्रीदेवी ने थोड़ा बहुत एतराज भी जताया था लेकिन इसकी वजह जान्हवी ये बताती हैं कि मम्मी उन्हें बहुत भोली मानती रहीं। उनको लगता था कि जान्हवी इस इंडस्ट्री के लिए तैयार नहीं है। अपनी बेटी की पहली फिल्म ‘धड़क’ के रशेज उन्होंने देखे थे। इन्हें देखने के बाद श्रीदेवी ने जो कुछ जान्हवी को बताया उनका वह अक्षरश: पालन करती हैं। जान्हवी बताती हैं, ‘हर मां अपनी बेटी की बेहतरी ही चाहती है। मैं भी उनकी हर बात ध्यान से सुनती थी और अब उनकी हर बात याद करती हूं तो उसका पूरा मतलब और खुलकर समझ आता है। वह मेरी पथप्रदर्शक थीं। उनकी जैसी मां मिलना सौभाग्य की बात है। हम सबको अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। मां के साथ समय बिताने का मौका मिलना बहुत सौभाग्य से होता है।’
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फिल्म गुंजन सक्सेना का एक दृश्य
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जान्हवी कपूर ने हिंदी सिनेमा में अपनी शुरूआत फिल्म निर्माता करण जौहर की फिल्म ‘धड़क’ से की। लेकिन, उनके अभिनय की तारीफ सबसे ज्यादा उन्हें अपनी दूसरी फिल्म ‘गुंजन सक्सेना-द कारगिल गर्ल’ में मिली। इस फिल्म की रिलीज से पहले हुई बातचीत में भी जान्हवी ने बताया था कि कैसे उन्हें किचन में काम करना कभी ठीक से आया नहीं। मां तो उन्हें डॉक्टर बनाना चाहती थीं लेकिन वह बन गईं अभिनेत्री। इस साल रिलीज हुई एक और फिल्म ‘रूही’ में भी जान्हवी कपूर के अभिनय को लोगों ने सराहा।