वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। सब कुछ बंद होने की वजह से देश के मजदूरों और गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में कई प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ हजारों किलोमीटर पैदल ही घर की तरफ रवाना हो चुके हैं। हर दिन ऐसी कई तस्वीरें सामने आ रही हैं जिनमें इनकी दयनीय स्थिति देखकर कलेजा फटने लगता है। मजदूरों के ये हालात देखकर गीतकार जावेद अख्तर का गुस्सा फूट पड़ा है।
प्रवासी मजदूरों पर ट्वीट कर ट्रोल हुए जावेद अख्तर, ट्रोलर बोला- 'सर्कुलर समझ नहीं आता ..'
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जावेद अख्तर ने ट्वीट करते हुए सरकार को घेरा और कई सवाल भी पूछे। उन्होंने लिखा, '30 जून तक ट्रेन नहीं चलाने का क्या मतलब है? प्रवासी मजदूर वापस अपने घर जाना चाहते हैं और वापस जाने का उन्हें पूरा अधिकार भी है, लेकिन विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग सस्ती लेबर को जाने नहीं देना चाहता। गलत तरीके से उनके रास्ते को रोकने की कोशिश करके क्या हम उन्हें बंधुआ मजदूरी में बदलने की कोशिश नहीं कर रहे हैं?'
What is the meaning of “ no trains till 30th of June” The migrant workers want to go back n they have all the right to do so But the privileged class doesn’t want to let go their cheap labour. By unfairly trying to block their way aren’t we trying to turn them into bonded labour
हालांकि जावेद अख्तर के इस ट्वीट पर लोग समर्थन कम उन्हें ट्रोल ज्यादा कर रहे हैं। कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिनसे मजदूर अपने घरों को लौट रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, 'एक सर्कुलर तो समझ नहीं आता और इतिहास के ज्ञाता बनते हैं, मुगलों की अर्थव्यवस्था समझाते हैं। आप नास्तिक नहीं निरक्षर हैं।'
एक सर्कुलर तो समझ नहीं आता और इतिहास के ज्ञाता बनाते हैं, मुगलों की अर्थव्यवस्था समझाते हैं। मुल्लाजी आप नास्तिक नहीं निरक्षर हैं।
In India for almost 50 yrs Azaan on the loud speak was HARAAM Then it became HaLAAL n so halaal that there is no end to it but there should be an end to it Azaan is fine but loud speaker does cause of discomfort for others I hope that atleast this time they will do it themselves
— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) May 9, 2020
श्रमिक और स्पेशल ट्रेनों पर नहीं पड़ेगा असर
बता दें कि भारतीय रेलवे ने 30 जून तक के सभी टिकटों को रद्द कर दिया है, साथ ही इन टिकटों का पैसा भी रिफंड कर दिया गया है। हालांकि, इसका श्रमिक और स्पेशल ट्रेनों पर असर नहीं पड़ेगा और वो जारी रहेंगी। पहले की तरह ही इन ट्रेनों के जरिए लोग लौट पाएंगे। बता दें कि प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष तौर पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ऐसी रोजाना करीब सौ ट्रेनें चल रही हैं। इन ट्रेनों के माध्यम से अबतक पांच लाख से अधिक मजदूरों को वापस पहुंचाया जा चुका है और लगातार ये व्यवस्था जारी है।
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