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जेनिफर को याद कर सन्नाटे में जार-जार रोए थे शशि कपूर, मरते दम तक नहीं भूले पहली नजर का प्यार
बीबीसी हिंदी
Published by: अपूर्वा राय
Updated Sat, 07 Sep 2019 04:44 PM IST
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Jennifer Kendal and shashi kapoor
शशि कपूर और जेनिफर कैंडल की प्रेम कहानी भले आज से यही कोई 52 साल पहले शुरू हुई थी लेकिन इसे आज भी बॉलीवुड की सबसे बेमिसाल लव स्टोरी मानने में शायद ही किसी को कोई मुश्किल होगी। ये लव स्टोरी शुरू हुई थी, 1956 में और उसके बाद शशि कपूर अपने पूरे जीवन भर इस मोहब्बत से बाहर नहीं निकल पाए थे। वैसे इसकी शुरुआत बेहद दिलचस्प अंदाज में हुई थी। त्रिशूल फिल्म का एक गाना है, 'मोहब्बत बड़े काम की चीज है, काम की चीज है', जिसमें शशि कपूर अपने शोख और चुलबुले अंदाज में माशूका हेमामालिनी के साथ बार बार ये दोहरा रहे हैं कि मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है। ये शशि कपूर के लिए केवल एक फिल्म के गाने के बोल भर नहीं थे क्योंकि उनका पूरा जीवन ही प्रेम से सजा संवरा था।
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jennifer kendal shashi kapoor
जेनिफर की छोटी बहन और ब्रिटिश रंगमंच की जानी मानी अदाकारा फैलिसिटी कैंडल ने अपनी पुस्तक 'व्हाइट कार्गो' में लिखा है, "जेनिफर अपने दोस्त वैंडी के साथ नाटक 'दीवार' देखने रॉयल ओपेरा हाउस गई थी। नाटक शुरू होने से पहले उन्होंने दर्शकों का अंदाजा लगाने के लिए पर्दे से झांका और उनकी नजर चौथी कतार में बैठी एक लड़की पर गई। काली लिबास और सफेद पोल्का डॉट्स पहने वो लड़की खूबसूरत थी और अपनी सहेली के साथ हंस रह थी। शशि के मुताबिक वे उसे देखते ही दिलो-जान से उस पर फिदा हो गए थे। लेकिन तब पृथ्वी थिएटर में काम करने वाले शशि कपूर की कोई बड़ी पहचान नहीं थी, उनकी उम्र महज 18 साल थी। दूसरी तरफ जेनिफ़र अपने पिता जेफ़्री कैंडल के थिएटर समूह की लीड अभिनेत्री थीं।
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jennifer kendal shashi kapoor
थिएटर के चलते दोनों के पिता भी आपस में एक दूसरे को पहचानते थे। लेकिन इन सबके बाद भी शशि कपूर को जेनिफर से दोस्ती के लिए इंतजार करना पड़ा। शशि कपूर ने अपनी पुस्तक पृथ्वीवालाज में लिखा है, "मैंने जेनिफर के कई नाटक भी देखे, लेकिन उन्होंने कोई नोटिस नहीं लिया। कुछ दिनों के बाद एक दिन रॉयल ओपेरा हाउस में उन्होंने कहा कि मैं बंबई में रहती हूं और हम लोग मिल सकते हैं। इसके बाद शशि कपूर रोजाना ही जेनिफर से मिलने लगे। उन्होंने अपने इन मुलाकातों के बारे में लिखा है, "रॉयल ओपेरा हाउस के पास एक ढाबा हुआ करता था, मथुरा डेयरी फर्म। हम लोग तब पूरी भाजी की प्लेट खाते थे। तब एक प्लेट चार आने का मिलता था। साथ ही खाते थे।"
jennifer kendal shashi kapoor
वैसे दिलचस्प ये ही तब शशि कपूर बेहद शर्मीले हुआ करते थे, इतने शर्मीले कि जेनिफर उन्हें गे समझने लगी थीं। इस बारे में शशि कपूर ने पृथ्वीवालाज में लिखा है, "जेनिफर ने मुझे बाद में बताया कि वो मुझे गे समझने लगी थी।" हालांकि इसकी वजह भी बेहद दिलचस्प थी। शशि कपूर भारतीय मानसिकताओं के मुताबिक जब जेनिफर के साथ होते थे, तब उनका हाथ पकड़ बैठे रहते थे। जेनिफर जिस संस्कृति से आई थीं, वहां हाथ में हाथ लेकर बैठने को असहज माना जाता था। लेकिन दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ता गया, इस प्यार के चलते ही शशि कपूर अपने होने वाले ससुर की थिएटर कंपनी से भी जुड़ गए थे लेकिन जेफ्री कैंडल अपनी बेटी को लेकर काफी पजेसिव थे और नहीं चाहते थे कि शशि कपूर की उनसे शादी हो।
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Jennifer Kendal and shashi kapoor
इसके बारे में फेलिसिटी कैंडल ने व्हाइट कार्गो में लिखा है, "वे काफी हंसमुख और आकर्षक थे। मैं इतने ज्यादा इश्कबाज इंसान से कभी नहीं मिली। वो प्यार से तारीफें करने और साथ ही हड़काने का काम बखूबी अंजाम देते, वो भी मोहक अंदाज में कि कोई उन्हें रोक नहीं सकता। वो बेहद दुबले थे, लेकिन आंखें खूब बड़ी-बड़ी, लंबी घनी पलकों का किनारा लगता कि और बहका रही हों। उनके चमकदार सफेद दांत और गालों पर पड़ते शरारती डिंपल के साथ वह महिलाओं और पुरुषों में किसी के भी दिल में अपना रास्ता बना लेते।" हालांकि शशि कपूर और जेनिफर की शादी आनन फानन में तब हुई, जब वे जेफ्री कैंडल के थिएटर समूह शेक्सपीयराना के साथ सिंगापुर में थिएटर कर रहे थे, वहां एक दिन जेनिफर ने उनके साथ अपने पिता का घर छोड़ दिया। गुस्से में जेफ्री कैंडल ने शशि के काम के पैसे भी नहीं दिए।
