ये सबको पता है कि हिंदी सिनेमा में तमाम सुपरहिट फिल्में लिखने वाले लेखकों सलीम-जावेद की जोड़ी जब टूटी तो जावेद अख्तर ने क्या किया? उन्होंने तमाम फिल्मों में गाने लिखे, ढेरों इनाम जीते, लोगों का मजाक उड़ाया, खुद अपनी खिल्ली भी उड़वाई। सब, सबको पता है। लेकिन, सलीम खान, उन्होंने क्या किया? क्या जावेद अख्तर के इस फैसले के बाद कि वह अब अलग काम करेंगे, सलीम खान ने लिखना ही छोड़ दिया? या फिर वह बस अपने बेटे सुपरस्टार सलमान खान की फिल्मों के अघोषित सलाहकार ही बने रहे? दरअसल, जावेद अख्तर ने जिस दिन सलीम खान को इस जोड़ी को तोड़ने का अपना फैसला सुनाया, उसी दिन सलीम खान को एक झटका और लगा। उसी रात उनकी दूसरी पत्नी हेलेन की मां का निधन हो गया। जावेद अख्तर ने अपने अकेले काम करने का इश्तेहार भी एक ट्रेड मैगजीन में अगले शुक्रवार को छपवाया और अपने काम में मसरूफ हो गए। दोनों ने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन की फिल्म शक्ति के लिए आखिरी बार साथ साथ बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवार्ड जीता। इसके बाद दिलीप कुमार की फिल्म दुनिया और अनिल कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया दोनों की साथ साथ काम की हुई आखिरी फिल्में रहीं। हालांकि, मिस्टर इंडिया रिलीज होने से पहले ही सलीम खान की अकेले लिखी फिल्म नाम रिलीज हो चुकी थी। सलीम खान की सोलो राइटर के रूप में लिखी तीसरी फिल्म थी, कब्जा। संजय दत्त, अमृता सिंह, परेश रावल, आलोक नाथ और डिंपल कपाड़िया स्टारर फिल्म कब्जा ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है।
बाइस्कोप: इस फिल्म की रीमेक के तौर पर बनी आमिर खान की फिल्म गुलाम, ओरिजनल की कहानी भी ओरिजनल नहीं
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जावेद अख्तर के साथ जोड़ी टूटने के बाद सलीम खान ने जो पहली फिल्म लिखी थी, वह थी नाम। संजय दत्त और कुमार गौरव की सुपरहिट फिल्म। नाम की हीरोइन भी अमृता सिंह ही थी और ये पहली हिंदी फिल्म थी जिसकी शूटिंग दुबई में हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल का बिजनेस किया। फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट्स में लिखकर आता है, स्टोरी, स्क्रीनप्ले एंड डॉयलॉग बाय सलीम खान। सलीम खान बताते हैं, 'जब फिल्म बनकर तैयार हो गई और इसका बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया जा रहा था तो जैसे ही परदे पर लिखकर आया स्टोरी, स्क्रीनप्ले एंड डॉयलॉग बाय सलीम खान, सारे म्यूजीशियन्स ने बजाना रोक दिया और सब खड़े होकर तालियां बजाने लगे। मुझे भी स्क्रीन पर अपना नाम अकेले देखकर अजीब लग रहा था। मेरी आंखों में आंसू भर आए। लेकिन जैसे हर पैकेट पर एक एक्सपायरी डेट लिखी होती है, वैसे ही शायद हर रिश्ते की एक एक्सपायरी डेट होती है।' सलीम खान ने ये फिल्म महेश भट्ट और राजेंद्र कुमार की बहुत मनुहार पर लिखी थी। राजेंद्र कुमार के बेटे कुमार गौरव की ये बड़े परदे पर दूसरी लॉन्चिंग थी। और, नाम के बाद अगली फिल्म भी राजेंद्र कुमार अपने बेटे कुमार गौरव के लिए ही सलीम खान के साथ बनाना चाहते थे।
राजेंद्र कुमार, सलीम खान और महेश भट्ट तीनों नाम की कामयाबी के बाद फिर मिले। साथ बैठे और तय हुआ कि एक और फिल्म सलीम खान लिखें जिसमें हीरो कुमार गौरव होंगे और जिसे निर्देशित महेश भट्ट करेंगे। फिल्म का नाम था, नाराज। फिल्म के लिए कुमार गौरव के अलावा राखी, माधुरी दीक्षित, नसीरुद्दीन शाह और अमरीश पुरी को साइन भी किया। अमरीश पुरी के साथ काम करने का ये महेश भट्ट का पहला मौका होता लेकिन ये फिल्म साइनिंग के बाद आगे नहीं बढ़ सकी। सलीम खान तब तक एक फिल्म और लिख चुके थे, फलक। निर्देशक शशिलाल नायर की इस फिल्म में जैकी श्रॉफ हीरो थे। ये वही फिल्म है जिसमें सलीम खान की सिफारिश पर मशहूर विलेन जीवन के बेटे किरण कुमार को काम मिला और जिसने उन्हें एक दमदार विलेन के तौर पर फिल्म जगत में स्थापित भी किया। फलक के बाद सलीम खान ने फिल्म कब्जा लिखी। फिल्म में आलोक नाथ का जो किरदार सलीम खान ने लिखा है, उसने उन्हें भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाने में मदद की। सलीम खान के साथ उनके करियर का हादसा ये हुआ कि फिल्म नाम की जिस साल जबरदस्त तारीफ हुई, उस साल फिल्मफेयर पुरस्कार ही नहीं हुए।
महेश भट्ट और मुकेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट की बतौर प्रोड्यूसर आखिरी फिल्म कब्जा की कहानी दो भाइयों की वैसी ही कहानी है जैसी आपने अमिताभ बच्चन व शशि कपूर की फिल्म दीवार, आमिर खान और रजित कपूर की फिल्म गुलाम या फिर जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर की फिल्म परिंदा में देख रखी है। दरअसल ये सारी फिल्में एक ही अंग्रेजी फिल्म ऑन द वाटर फ्रंट से प्रेरित हैं। 1954 में रिलीज हुई इस फिल्म में मर्लन ब्रांडो ने लीड रोल किया था। ऐसा कम ही हुआ जब एक ही प्रोडक्शन हाउस ने एक ही कहानी पर दो फिल्में बनाई। भट्ट भाइयों की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी विशेष फिल्म्स का नाम कब्जा की ओपनिंग क्रेडिट्स में दिखता है और इसी कंपनी ने बाद में इसी कहानी पर 10 साल बाद गुलाम भी बनाई। फिल्म कब्जा संजय दत्त के बेहतरीन अभिनय वाली उनके करियर की गिनी चुनी फिल्मों में शामिल है। फिल्म की शुरूआत का सीन सलीम जावेद की ही लिखी फिल्म दीवार के क्लाइमेक्स सीन से काफी मिलता जुलता है। वहां विजय गोली लगने के बाद पुरानी बंबई की गलियों में तड़प रहा होता है और यहां रवि।
फिल्म कब्जा की कहानी कुछ यूं है कि रवि और रंजीत दो भाई हैं। रंजीत पेशे से वकील है और भूमाफिया वेलजी भाई के लिए काम करता है। रवि की भी वेलजीभाई से जान पहचान हो जाती है तो वह उसे एक जमीन का टुकड़ा खाली कराने को भेज देता है। इस जमीन पर उस्ताद अली मोहम्मद बच्चों का पार्क बनाना चाहते हैं। इसी जमीन पर कब्जे को लेकर काफी ड्रामा होता है और उस्ताद अली मोहम्मद मरने से पहले पूरी जमीन की वसीयत रवि के नाम कर जाते हैं। अब रवि सीधे वेलजीभाई का मुकाबला करता है। उसकी माशूका रीता की जान भी खतरे में आती है लेकिन वह बदला लेकर ही मानता है। जंजीर लिखने वाले सलीम खान की ये एक कमजोर कहानी मानी जा सकती है। फिल्म में महेश भट्ट ने काफी मेहनत की है। एक एक सीन बहुत जमा कर शूट किया है। अपने सिनेमैटोग्राफर दानिश खान से भी उन्हें काफी मदद मिली। फिल्म में अमृता सिंह एक म्यूजिक शॉप में काम करती हैं और इस बहाने फिल्म में सुपर कैसेट इंडस्ट्रीज और टी सीरीज का काफी प्रचार किया गया था। राजेश रोशन की धुनों पर लिखे गए आनंद बक्षी के गाने काफी हिट हुए थे। यहां इस गाने में किशोर कुमार का साथ दिया है गायिका अनुराधा देशपांडे ने जिन्हें इस फिल्म से चार साल पहले बेस्ट सिंगर फीमेल का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था फिल्म सोहनी महिवाल के एक गाने के लिए।