कल्कि केकलां, जी हां, कल्कि कोएचलिन नहीं जैसा कि आमतौर पर उनका नाम हिंदी में लिखा जाता है। कल्कि बताती भी हैं, ‘मेरे सरनेम का उच्चारण अब भी तमाम लोग गलत ही करते हैं। लिखते तो गलत हैं ही।’ कल्कि की चार साल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी फिल्म 'गोल्डफिश' के जरिए होने जा रही है। हिंदी सिनेमा के आम दर्शकों के बीच कल्कि केकलां की पहचान फिल्म 'जिंदगी मिलेगी ना दोबारा' और ‘ये जवानी है दीवानी' जैसी कमर्शियल फिल्मों के जरिए बनीं। लेकिन उनकी अदाकारी की तासीर देखनी हो तो चलिए आपको बताते हैं उनकी चुनिंदा पांच फिल्मों के बारे में...
Kalki Koechlin: कल्कि के करिश्माई अभिनय का गवाह बनीं ये पांच फिल्में, ‘गोल्डफिश’ की रिलीज का काउंटडाउन शुरू
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देव डी (6 फरवरी 2009 )
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के बंगाली उपन्यास 'देवदास' पर निर्देशक अनुराग कश्यप ने आधुनिक शैली में पंजाब और दिल्ली की समकालीन पृष्ठभूमि पर फिल्म 'देव डी' बनाई। इस फिल्म में कल्कि केकलां ने चंद्रमुखी की भूमिका निभाई थी। फिल्म को समीक्षको द्वारा सकरात्मक प्रतिक्रिया खूब मिली। इस फिल्म में न सिर्फ कल्कि के परफॉर्मेंस की खूब तारीफ हुई, बल्कि इस फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
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मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ (17 अप्रैल 2015)
फिल्म 'मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ' में कल्कि ने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित एक युवा महिला लैला कपूर का किरदार निभाया। लैला कपूर पढाई के लिए अमेरिका चली जाती है। जहां पर उसकी मुलाकात एक खानम से होती है और उसके साथ वह समलैंगिक रिश्ता बना लेती है। इस फिल्म में बीमारी के साथ-साथ लैला कपूर की कामुकता को स्वीकार करने की यात्रा को दिखया गया था। यह फिल्म कामुकता, समावेशन, आत्मप्रेम और आत्म स्वीकृति की चौनौतीपूर्ण अवधारणाओं के बारे में है। शोनाली बोस के निर्देशन में बनी इस फिल्म को न सिर्फ कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में सम्मानित किया गया, बल्कि इस फिल्म के लिए कल्कि केकलां को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
वेटिंग (27 मई 2016)
फिल्म 'वेटिंग' की कहानी मुख्य रूप से दो किरदार के इर्द -गिर्द घूमती है, जो एक अस्पताल में अपने-अपने बेहोश जीवनसाथी की देखभाल करते हुए एक दूसरे से दोस्ती कर लेते हैं। इस फिल्म में कल्कि ने तारा देशपांडे और नसीरुद्दीन शाह ने प्रोफेसर शिव कुमार नटराज की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में कल्कि और नसीर के अभिनय की खूब तारीफ हुई थी। अनु मेनन के निर्देशन में बनी इस फिल्म को साल 2015 लंदन एशियन फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में प्रदर्शित किया गया था, जहां अनु मेनन ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी जीता।
ए डेथ इन द गंज (2 जून 2017)
अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा की बतौर निर्देशक पहली फिल्म 'ए डेथ इन द गंज' में कल्कि के अलावा विक्रांत मैसी, तिलोत्तमा शोम, ओम पुरी, तनुजा, गुलशन देवैया, जिम सर्भ और रणवीर शौरी जैसे कई कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थी। इस फिल्म में कल्कि केकलां ने मिमी की भूमिका निभाई। फिल्म को आधा दर्जन से अधिक फिल्मफेयर नामांकन प्राप्त हुए और सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के लिए कोंकणा सेन ने पुरस्कार भी जीता।