कंगना रणौत ने मुंबई पहुंचकर बीएमसी की कार्रवाई पर अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो जारी करते हुए अपनी बात कही थी। जहां एक ओर कंगना की इस प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ उनका रुख नर्म होता नहीं दिख रहा है। वहीं, कंगना ने इस वीडियो में सीधे उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है जो कि एक अहम बात है।
कंगना रणौत किसके दम पर उद्धव ठाकरे पर हमला कर रही हैं? जानिए मामले का पूरा विश्लेषण
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कंगना ने अपने बयान ने कश्मीरी पंडितो का भी जिक्र किया था। इसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ये जो कुछ हुआ है, वो महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार हुआ है।
सवाल ये उठता है कि आखिर कंगना ने जिस अंदाज में उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है, उसके पीछे क्या वजह हो सकती है। शिवसेना और महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से देखने वालीं वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन कहती हैं, "मैं 110 फीसदी मानती हूं कि कंगना को बीजेपी का भारी समर्थन हासिल है। अगर ऐसा नहीं होता तो ये संभव ही न होता कि वह उद्धव ठाकरे के बारे में इस तरह से बात कर पातीं। मैं ये भी मानती हूं कि कंगना ये सब करते हुए खुद में आश्वस्त होंगी कि उन्हें राज्य सभा का टिकट मिल जाए। क्योंकि अब उन्होंने जो किया है, उसके बाद भले ही शिवसेना सीधे उन पर हमला न करे लेकिन वह बॉलीवुड और सरकारी अमले के माध्यम से उन्हें घेरने की कोशिश करेंगी। इतिहास गवाह है कि शिवसेना के बॉलीवुड से बहुत ही गहरे संबंध रहे हैं और ये उनका तरीका है कि किसी को खत्म करना है तो उसे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग - थलग करके खत्म करो।"
हालांकि, कंगना रणौत किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से संबंध होने या राजनीति में जाने की योजनाओं का खंडन कर चुकी हैं। कंगना ने बीबीसी की एक खबर पर टिप्पणी करते हुए एक दिन पहले भी अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि "कंगना रणौत न तो एक मोहरा हैं और न ही एक खिलाड़ी। और वो व्यक्ति आज तक पैदा नहीं हुआ है जो कि उन्हें मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर सके।"
कंगना के घर को तोड़े जाने की जहां बीजेपी आलोचना कर ही रही है वहीं इस कदम की आलोचना कांग्रेस नेताओं की ओर से भी होने लगी है।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट करके लिखा है, "कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमॉलिश करने का तरीका? क्योंकि हाई कोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा दी। पूरा एक्शन प्रतिशोध से ओत-प्रोत था। लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है। कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरू हो जाए!"
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंगना रणौत के घर/दफ्तर तोड़े जाने के बाद बीएमसी की कार्रवाई पर स्टे दे दिया है। सोशल मीडिया पर इसे कंगना की जीत के रूप में देखा गया।