नई पीढ़ी के ज्यादातर निर्देशकों का हाथ उर्दू और हिंदी में तंग रहता है। ऐसे में फिल्म की शूटिंग के वक्त अब मौजूद रहते हैं ऐसे खास हुनरमंद जिसका काम सिर्फ सितारों के उच्चारण और उनकी संवाद अदायगी पर रहता है। सिनेमा की भाषा में इन्हें डायलॉग कोच कहते हैं। अमर उजाला ने की एक खास मुलाकात हिंदी सिनेमा के ऐसे ही एक मशहूर कोच विकास कुमार से।
सलमान ही नहीं शाहरुख की फिल्म के लिए भी कटरीना ने ऐसे ली ट्रेनिंग, बन गईं टॉप एक्ट्रेस
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आप कब से ये काम कर रहे हैं?
मैं पिछले 10 साल से डायलॉग कोच का काम कर रहा हूं। केवल बॉलीवुड ही नहीं स्पोर्ट्स स्टार्स को भी मैं कमेंट्री के टिप्स देता हूं। हरभजन सिंह, वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंद्र सहवाग को भी मैंने कमेंट्री करना सिखाया है। कटरीना को टाइगर जिंदा है और जीरो के लिए डायलॉग डिलीवरी की ट्रेनिंग दी। इन दिनों मैं डॉली- किट्टी और वो चमकते सितारे फिल्म के लिए भूमि पेडनेकर और कोंकणा सेन को ट्रेनिंग दे रहा हूं। इमरान हाशमी को भी मैं उर्दू में डायलॉग डिलीवरी की ट्रेनिंग दे चुका हूं। वैसे तो नसीरुद्दीन शाह और विद्या बालन के भी काम किया, लेकिन कटरीना को हिंदी सिखाना सबसे दिलचस्प रहा।
काफी दिलचस्प काम है आपका, तो शुरू से ही डायलॉग कोच ही बनना चाहते थे?
जी नहीं, सच बताऊं तो मैं 13 साल पहले एक्टर बनने के लिए आया था लेकिन, साथ ही नई-नई कलाएं भी सीखता रहा। बिहार से निकलने के बाद मैंने हर वो काम किया जो मुझे मिलता रहा। हॉलीवुड फिल्मों वन नाइट विद द किंग के अलावा हिंदी फिल्मों गुलाल, रेडियो, इश्किया, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, सात खून माफ, औरंगजेब, फितूर आदि फिल्मों में भी कोच रहा। परमाणु, हामिद और अज्जी जैसी फिल्मों में एक्टिंग भी कर चुका है। फिल्मों के अलावा मैंने वेब सीरीज और टीवी सीरीज में भी काम किया है।
अब आप टीवी होस्ट बन गए हैं सीरियल कोर्टरूम से? क्या तैयारी की इसके लिए?
कोर्टरूम सीरियल में एंकरिंग के लिए मैंने काफी मेहनत की है। कोर्ट के अंदर के टेक्निकल प्वॉइंट को समझने के लिए किताबें पढ़ीं और डॉक्यूमेंट्रीज देखीं। न्याय प्रणाली से संबंधित सभी कामों को बारीकी से समझा भी है। ऐसा इसलिए करना पड़ा ताकि दर्शकों तक सही जानकारियां पहुंचाई जा सकें। इस शो में हम देश के चंद चर्चित मामलों की अदालती कार्यवाही दर्शकों तक पहुंचाने वाले हैं।
कोर्टरूम बाकी सीरियल से कितना अलग है?
हर एक केस पर काफी रिसर्च करके सीरियल के एपिसोड तैयार किए गए हैं। सच्ची घटनाओं का नाटकीय रूपांतरण कर कोर्टरूम के अंदर छिड़ी बहस को भी सीरियल के माध्यम पेश किया गया है। कोर्ट रूम समाज में बदलाव की दिशा में अच्छी पहल साबित होगा।