हिन्दी सिनेमा में सालों तक प्रेम कहानियां फिल्म की 'रीढ़ की हड्डी' रही हैं। कहानी के खत्म होते-होते हीरो हीरोइन से मिल ही जाता है। बीच में कोई गुंडा या विलेन होता है या लड़की के पिताजी गले की हड्डी बन जाते हैं। 'मुगल-ए-आजम' में शहंशाह अकबर ने अनारकली और सलीम के प्यार में खूब रोड़े अटकाए, लेकिन इसके बावजूद हीरो हीरोइन मिले, पेड़ के आसपास गाना गाए और देखते-देखते तीन घंटे बीत गए- द एंड। लेकिन अब इस प्यार को लग गया है झटका।
आज की फिल्मों में खत्म हो रही हैं प्रेम कहानियां !, जानें इससे पहले ऐसा और कब हुआ
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2019 में आई फिल्मों पर ध्यान दीजिए। 'उरी' एक वॉर फिल्म है। ऋतिक रोशन की 'वॉर' में फिल्म के नाम से ही पता चल जाता है कि आख़िर मुख्य कहानी क्या है। ऐसा नहीं है कि इन फिल्मों से प्यार पूरी तरह गायब था लेकिन कहानी का प्लॉट कुछ और ही था। यानी लोगों को अगर सिनेमा हॉल तक लाना है तो सिर्फ प्यार से काम नहीं चलेगा। और भी उदाहरण हैं जैसे ऋतिक रोशन की 'सुपर 30', अक्षय कुमार की 'मिशन मंगल', जॉन अब्राहम की 'बाटल हाउस', रानी मुखर्जी की 'मर्दानी' और आयुष्मान खुराना की 'आर्टिकल 15'। इन सब के पोस्टर्स से नायक या नायिका गायब थे।
इसका एक कारण ये भी है कि अब साउथ की फिल्मों को हिन्दी में बनाने का चलन जोरों पर है और वहां बहुत सारा एक्शन होता है । एक और कारण ये भी है कि अब लोगों की जिंदगी की कहानी बड़े पर्दे पर दिखाई जा रही हैं । पिछले कई सालों से बायोपिक बहुत कामयाब हुईं जैसे 'भाग मिल्खा भाग', 'मेरी कॉम', 'डर्टी पिक्चर' और 'संजू'। अब 2020 में आने वाली फिल्मों को ही ले लीजिए । दीपिका की 'छपाक', कंगना की 'पंगा', और आमिर खान की 'लाल सिंह चड्ढा' के पोस्टर्स में प्यार मोहब्बत का नामों निशान है ही नहीं।
ये आम लोगों की कहानियां हैं जो उनका व्यक्तित्व बयान करती हैं। रणवीर सिंह की '83' भारत के साल 1983 में क्रिकेट विश्व कप की जीत पर आधारित है तो वहीं कंगना की 'थलइवा' एक मशहूर नेता की कहानी है। ऐसा नहीं है कि प्यार को झटका पहली बार लगा है। 70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन के अवतार में आया 'एंग्री यंग मैन' और उनकी फिल्म 'कालिया',' जंजीर', 'त्रिशूल' जैसी फिल्मों में प्यार की कहानी थी तो जरूर पर साइड ट्रैक पर चलती रही।
80 के दशक के खत्म होते होते फिर प्यार की कहनियों ने वापसी की और 'मैने प्यार किया' और 'कयामत से कयामत तक' जैसी फिल्मों के साथ इसकी शुरुआत की। इन दोनों दशकों में जहाँ सुनहरे पर्दे पर 'एंग्री यंग मैन' की छवि बनी तो उसके साथ ही आए सिनेमा के सबसे मशहूर विलन 'गब्बर सिंह', 'लॉयन' और 'शाकाल'। हिन्दी सिनेमा का रुझान 90 के दशक में प्यार की तरफ रहा।