बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री ललिता पवार का जन्मदिन 18 अप्रैल को होता है। उनका असली नाम अंबा था। उन्होंने छोटे और बड़े पर्दे पर अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों की जीता है। ललिता पवार ने मां और सास के किरदार में फिल्मी पर्दे पर अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी, मराठी और गुजराती भाषा में 700 से ज्यादा फिल्में कीं। ललिता पवार का जन्म मुंबई के नासिक के एक धनी परिवार में हुए था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर बाल कलाकार की थी। ललिता पवार ने पहली बार एक मूक फिल्म में काम किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें 18 रुपये कमाए थे।
एक थप्पड़ की वजह से बदल गई थी इस अभिनेत्री की जिंदगी, घर का दरवाजा तोड़ने पर मिला था उनका तीन दिन पुराना शव
इसके बाद उन्होंने हर फिल्म में अपने अभिनय का लोहा मनवाया, लेकिन साल 1942 में ललिता पवार के साथ फिल्म 'जंग-ए-आजादी' की शूटिंग के दौरान ऐसा हादसा हो गया कि उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई। दरअसल फिल्म 'जंग-ए-आजादी' में ललिता पवार को अभिनेता भगवान दादा के साथ एक थप्पड़ का सीन शूट करना था। इस सीन को करने के दौरान भगवान दादा ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा देते हैं कि वह गिर जाती है और उनके कान से खून बहने लगता है। कहते हैं कि कान के इलाज के बीच डॉक्टर ने ललिता पवार को गलत दवा दे दी जिसके बाद ललिता पवार के शरीर के दाहिने हिस्से को लकवा मार गया।
लकवे के कारण ललिता पवार लंबे समय तक मनोरंजन की दुनिया से दूर हो गईं। उनकी दाहिनी आंख पूरी तरह सिकुड़ गई और चेहरा खराब हो गया था। ऐसे में उन्हें फिल्मों में काम मिलना बंद हो गया, लेकिन उन्होंने हिम्मद नहीं हारी। उन्होंने अपने हौसले को कभी मरने नहीं दिया और अपनी सेहत में सुधार करने के बाद ललिता पवार ने एक बार फिर से साल 1948 में पर्दे पर वापसी की।
उन्होंने निर्देशक एसएम यूसुफ की फिल्म 'गृहस्थी' से एक बार फिर वापसी की। फिल्म में उन्होंने खतरनाक सास का किरदार निभाया। दर्शकों ने सास के किरदार में भी ललिता पवार के अभिनय को पसंद किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म 'अनाड़ी' (1959) में दयावान मिसेज डीसा,'श्री 420' (1955) में 'केले वाली बाई' और 'मेम दीदी' (1961) की मिसेज राय का किरदार निभाया। ललिता पवार की निजी जिंदगी पर नजर डाले तो उन्होंने गणपत राव से शादी की थी, लेकिन गणपत के साथ उनका रिश्ता लंबा नहीं चल पाया।
इसके बाद गणपत को छोड़ ललिता ने निर्माता-निर्देशक राजप्रकाश गुप्ता से शादी की। अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में ललिता पवार घर में अकेली थीं। उनके पति राजप्रकाश अस्पताल में भर्ती थे और बेटा अपने परिवार के साथ मुंबई में था। ललिता पवार की मौत के बारे में परिवारवालों को तीन दिन बाद पता चला जब बेटे ने उनके पास फोन किया और किसी ने नहीं उठाया। घर का दरवाजा तोड़ने पर पुलिस को ललिता पवार की तीन दिन पुरानी लाश मिली थी। फिल्मों में मां और सास के रोल निभाकर फेमस हुईं ललिता ने 24 फरवरी 1998 को पुणे में अंतिम सांस ली थी।
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