सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा। उन्होंने 36 भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड कराए हैं। लता मंगेशकर ने केवल हिंदी भाषा में 1,000 से ज्यादा गीतों को अपनी आवाज दी है। आज लता जी का जन्मदिन है और उनके इस खास दिन के मौके पर आइए चलते हैं गायिका के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बाते जानते हैं।
Lata Mangeshkar: लता मंगेशकर की कुछ ऐसी थी अधूरी प्रेम कहानी, इस वजह से ताउम्र रहीं अविवाहित
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28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर को गायिकी क्षेत्र में अतुल्य योगदान देने के लिए भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड सहित कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है। लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गीतों को अपनी आवाज दी है। लता जी का जीवन तमाम उपलब्धियों से भरा रहा है। हालांकि, बचपन में उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा। जब वो 13 साल की थीं तभी दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता गुजर गए थे। लता के पिता के दोस्त मास्टर विनायक उन्हें गायन और अभिनय की दुनिया में ले आए थे।
इस बात से तो हर कोई वाकिफ है कि लता जी ने कभी शादी नहीं की। लेकिन इसी के साथ यह सवाल भी उठता है कि आखिर उन्होंने शादी क्यों नहीं की। बताया जाता है कि लता जी को एक शख्स से प्यार था। लेकिन इनकी प्रेम कहानी अधूरी रह गई। शायद इसलिए ही उन्होंने कभी शादी नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लता मंगेशकर को डूंगरपुर राजघराने के महाराजा राज सिंह से लता मंगेशकर बेहद प्यार करती थीं। ये महाराजा लता के भाई ह्रदयनाथ मंगेशकर के दोस्त भी थे। कहा जाता है कि राज ने अपने माता-पिता से वादा किया था कि वो किसी भी आम घर की लड़की को उनके घराने की बहू नहीं बनाएंगे। इसी वजह से उन्होंने लता जी से शादी नहीं की।
लता जी ने कभी इस बारे में बात नहीं की। उन्होंने शादी ना करने की वजह घर की जिम्मेदारी को बताया। उधर, राज ने भी कभी शादी ने की। राज ने लता जी का प्यार का नाम मिट्ठू रखा हुआ था। वह हमेशा अपने साथ एक टेप रिकॉर्डर लेकर चलते थे। जिसमें लता जी के कुछ गाने होते थे। राज लता जी से छह साल बड़े थे। उन्होंने क्रिकेट का काफी शौक था। 12 सितंबर साल 2009 को राजसिंह का निधन हो गया था। राज के अलावा लता जी ने कभी किसी से प्यार नहीं किया।
लता जी आपने पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी थीं, वह सभी से प्यार करती थीं। उनके प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने भाई-बहनों को पढ़ाने के लिए खुद पढ़ाई नहीं की। लता जी ने अपने पिता के साथ मराठी संगीत नाटक में काम किया। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने बड़े कार्यक्रमों और नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। लता जी की आवाज का हर कोई दीवाना है। आज भी उनकी आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है।