‘वक्त कटता भी नहीं, वक्त रुकता भी नहीं, दिल है सजदे में मगर, इश्क झुकता भी नहीं’, शायरी की दुनिया के मशहूर शायर गुलजार साहब की यह शायरी हर उस शख्स के दिल की आवाज है, जो अपने महबूब के लिए धड़कता है। इसी मोहब्बत को वैलेंटाइन डे पर सेलिब्रेट करने की परंपरा बहुत पुरानी है। प्रेमी जोड़ों के लिए वैलेंटाइन डे किसी त्योहार से कम नहीं होता। बॉलीवुड भी इस प्यार के अहसास से अछूता नहीं है। चलिए जानते हैं बॉलीवुड की उन फिल्मों के बारे में, जो प्यार के अहसास से सराबोर हैं। इन फिल्मों को देखकर सच्ची मोहब्बत करना सीखा जा सकता है।
Romantic Films: महबूब से सच्ची मोहब्बत करना सिखाती हैं ये फिल्में, इन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उठा सकते हैं लुत्फ
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मोहब्बतें
साल 2000 में आई फिल्म 'मोहब्बतें' हर प्रेमी जोड़े को प्यार करना सिखाती है। यह फिल्म एक ऐसे शख्स की कहानी है, जो अपने प्यार के गुजर जाने के बाद भी उससे बेइंतहा मोहब्बत करता है। तमाम विरोधों के बावजूद वह उसी गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्रों को प्यार की परिभाषा सिखाता है, जहां उसकी प्रेमिका के रूढ़िवादी पिता प्रधानाचार्य होते हैं। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय, उदय चोपड़ा आदि ने मुख्य भूमिका निभाई थीं।
मुगल-ए-आजम
साल 1960 में रिलीज हुई ‘मुगल-ए-आजम’ प्यार की सारी मिसालें पेश करती फिल्म है। 'मोहब्बत जो डरती है, वह मोहब्बत नहीं, अय्याशी है, गुनाह है'। फिल्म का यह डायलॉग आज भी हर उस आशिक के दिल में है, जो अपनी महबूब से सच्चा प्यार करता है। इस फिल्म में अकबर के शहजादे सलीम और दासी अनारकली की खूबसूरत प्रेम कहानी को दिखाया गया। इस ऐतिहासिक फिल्म को बनने में कुल 16 साल लगे थे।
मसान
साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म 'मसान' की कहानी जातिवाद के जाल में उलझे प्यार की कहानी है। इस फिल्म में ऐसे विषय को उठाया गया, जिनसे हम नजरें नहीं चुरा सकते, लेकिन अपनी भागदौड़ की जिंदगी में अक्सर नजरअंदाज कर जाते हैं। फिल्म में एक डोम लड़के और ऊंची जाति लड़की की सच्ची, लेकिन अधूरी प्रेम कहानी को दिखाया गया। इस फिल्म में रिचा चड्ढा, विकी कौशल, संजय मिश्र, श्वेता त्रिपाठी और विनीत कुमार लीड रोल में हैं।
रॉकस्टार
फिल्म ‘रॉकस्टार’ बेहद खूबसूरत लव स्टोरी है, जिसे इम्तियाज अली ने निर्देशित किया। यह फिल्म जनार्दन नाम के सीधे-सादे लड़के पर आधारित है, जो अपना दिल तुड़वाने के लिए कॉलेज की सबसे पॉपुलर लड़की हीर के पास जाता है। दोनों की प्रेम कहानी अधूरी ही रह जाती है। जनार्दन पॉपुलर सिंगर बन जाता है। बाद में जनार्दन को हीर की बीमारी अप्लास्टिक एनीमिया का पता चलता है तो दोनों कुछ आखिरी पल साथ बिताने लगते हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे।