जन्मदिन विशेषः खुद को चमचा विलेन मानते थे मैक मोहन, 'सांभा' के रोल से मिली थी असली पहचान
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मोहन माकीजनी यानी मैक मोहन का जन्म 24 अप्रैल 1938 में ब्रिटिश भारत के कराची में हुआ था। उनके पिता भारत में ब्रिटिश आर्मी कर्नल थे। वो मशहूर अदाकारा रवीना टंडन के मामा भी थे। 1940 में मैक के पिता का ट्रांसफर हुआ और वो लखनऊ आ गए। मैक ने लखनऊ में पढ़ाई और वहां उनकी दोस्ती सुनील दत्त से हो गई। कॉलेज से ही मैक ने थिएटर शुरु किया और पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से एक्टिंग भी सीखी।
मैक ने बॉलीवुड में करीब 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। सन 1964 में उन्होंने 'हकीकत' फिल्म से अपने अभिनय की शुरुआत की और इसके बाद उनके पास एक से बढ़कर एक फिल्मों के ऑफर आए। 'जंजीर', 'सलाखें', 'शागिर्द', 'सत्ते पे सत्ता', 'डॉन', 'दोस्ताना', 'काला पत्थर'। हालांकि जिस फिल्म के लिए मैक को सबसे ज्यादा याद रखा गया वो फिल्म थी 'शोले'।
फिल्म 'शोले' में मुख्य खलनायक गब्बर यानी अमजद खान थे। हालांकि इसमें मैक 'सांभा' के किरदार में दिखे थे।दिलचस्प है कि फिल्म में उनके बहुत से सीन काट दिए गए थे और सिर्फ एक सीन रखा गया। इसमें वो गब्बर के सवाल 'कितना इनाम रखी है सरकार हम पर' का जवाब देते हैं 'पूरे पचास हजार'। सिर्फ इस तीन शब्द से इस फिल्म में उनका किरदार हर किसी को याद रहा।
मैक ने बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों में खलनायक का ही किरदार निभाया था। हालांकि वो खुद को चमचा विलेन मानते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था वो पीटते कम हैं और पिटते ज्यादा हैं क्योंकि उन्हें सोफिस्टिकेटेड लड़ाई ज्यादा पसंद थी। उन्हें शायरी का भी काफी शौक था।