हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय से पर्दे पर अमिट छाप छोड़ने वाली खूबसूरत और दिग्गज अदाकारा माला सिन्हा किसी पहचान की मौहताज नहीं हैं। उनका नाम लेते ही उनके जीवन और फिल्मों में उनकी अदाकारी की झलकियां आखों के सामने आने लगती हैं। तीन दशकों तक सिनेमाघरों में अपना जादू चलाने वाली माला सिन्हा आज यानी 11 नवंबर को अपना जन्मदिन मना रही हैं। इस खास मौके पर हम आपको अपने समय की टॉप अभिनेत्रियों में से एक माला सिन्हा के जीवन के बारे बताने जा रहे हैं। चलिए जानते हैं कैसे माला सिन्हा ने चकाचौंध भरी दुनिया में यह मुकाम हासिल किया।
Mala Sinha: चार दशक तक बॉलीवुड पर राज करने वाली माला सिन्हा 'नाक' के कारण हुई थीं रिजेक्ट, फिर यूं पलटी किस्मत
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किसी जमाने में खूबसूरती मिसाल मानी जाने वाली अदाकारा माला सिन्हा का जन्म 11 नवंबर, 1936 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता बंगाली और मां नेपाली थीं। माला सिन्हा का असली नाम आल्डा सिन्हा है, जो बहुत ही कम लोगों को पता होगा। माला सिन्हा जब स्कूल जाती थीं तो उनके दोस्त उन्हें डालडा कहकर पुकारते थे। वहीं माला के माता-पिता उन्हें बेबी कहते थे इसलिए कई दोस्त उन्हें डालडा सिन्हा तो कई बेबी सिन्हा कहने लगे। फिल्मों में अपनी एंट्री से पहले माला सिन्हा ने बतौर सिंगर रेडियो में काम किया था। माला सिन्हा देखने में बहुत सुंदर थीं, जिसकी वजह से उन्हें किसी ने फिल्मों में काम करने की सलाह दी थी।
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किसी के द्वारा दी गई सलाह के बाद माला सिन्हा फिल्मों में काम करने का सपना लेकर वह मुंबई पहुंची थीं, लेकिन अभिनेत्री को यहां बहुत संघर्ष करना पड़ा था। उस जमाने में माला सिन्हा को एक निर्देशक ने काफी कुछ सुनाकर फिल्मों में हिरोइन बनने का सपना छोड़ने की सलाह दी थी। माला के पिता अल्बर्ट सिन्हा बंगाल से थे। इसी कारण लोग उन्हें नेपाली-भारतीय बाला कहते थे। उनकी मां नेपाल की रहने वाली थीं। एक बार एक निर्माता के पास जब वे गई तो निर्माता ने उनसे कहा कि पहले शीशे में जाकर अपना चेहरा तो देखो, ऐसी भद्दी नाक को लेकर हीरोइन बनने का सपना देखती हो।
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लेकिन माला ने ऐसी बात सुनकर भी हार नहीं मानी थी। वह बॉलीवुड के बजाय बंगाली सिनेमा में अपना हाथ अजमाने पहुंचीं, जहां उन्हें भरपूर कामयाबी मिली। इतना ही नहीं उन्होंने नेपाली फिल्मों में भी काम किया था। काफी समय बाद माला सिन्हा एक बंगाली फिल्म के सिलसिले में मुंबई पहुंची थीं। यहां उनकी मुलाकात अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री गीता बाली से हुई। गीता बाली ने ही माला सिन्हा को निर्देशक केदार शर्मा से मिलवाया था, जिन्होंने अभिनेत्री के करियर को आगे बढ़ाने में बहुत मदद की थी। बॉलीवुड में पहली बार केदार शर्मा ने ही माला सिन्हा को अपनी फिल्म 'रंगीन रातें' में बतौर अभिनेत्री काम दिया था। लेकिन उनको पहचान साल 1957 में आई फिल्म 'प्यासा' से मिली थी। गुरुदत्त की यह फिल्म मधुबाला के लिए लिखी गई थी, लेकिन वह यह फिल्म नहीं कर पाईं थी, तो माला सिन्हा ने इसमें बतौर अभिनेत्री काम किया था। इसी फिल्म ने माला सिन्हा के लिए फिल्मों के रास्ते खोल दिए।
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'प्यासा' के बाद उन्होंने 'धूल का फूल', 'फिर सुबह होगी', 'हरियाली और रास्ता', 'अनपढ़', 'दिल तेरा दीवाना', 'गुमराह बहूरानी', 'जहांआरा', 'हिमालय की गोद में', 'आंखें', 'दो कलियां और मर्यादा' सहित अनेक फिल्में कीं। बता दें, माला सिन्हा 50, 60 और 70 के दशक की शानदार अभिनेत्रियों में से एक थीं, जिन्होंने करीब चार दशकों तक फिल्मों में काम किया। उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया और खूब नाम कमाया था। माला सिन्हा ने हिन्दी के अलावा बंगला और नेपाली फिल्मों में भी काम किया है। वह अपनी प्रतिभा और खूबसूरती दोनों के लिए जानी जाती रही हैं। उनकी आखिरी फिल्म साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म 'जिद' थी। उनकी बेटी प्रतिभा सिन्हा ने भी बॉलीवुड में एंट्री ली थी, लेकिन वह अपनी मां की तरह सफल नहीं हो पाई थीं।
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