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तलवार से भी ज्यादा तेज चलती है कंगना रनौत की जुबान, जानिए कब-कब दिखाए बगावती तेवर
बीबीसी हिंदी
Published by: anand anand
Updated Tue, 22 Jan 2019 01:25 PM IST
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कंगना रनौत
साल 2009- ''फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली लड़कियां खुद को सिर्फ सेक्स ऑब्जेक्ट के तौर पर पेश करती हैं, उन्हें एक्टिंग से ज़्यादा अपने लुक्स की चिंता रहती है।''
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कंगना रनौत
इन तमाम तालियों और सीटियों के शोर के बाद भी कंगना का जबानी शोर कम नहीं होता। वो बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद पर खुलकर बोलती हैं तो वहीं रिश्तों में आई तकरार पर भी सामने वाले को जमकर कोसती हैं। करियर के जिस दौर में अभिनेत्रियां अपने लिए गॉडफ़ादर की तलाश कर रही होती हैं ठीक उसी वक्त कंगना बॉलीवुड में किसी बागी के तौर पर खुद को पेश करती हैं। वे फिल्मी दुनिया की रंगीन लेकिन तंग गलियों में लिखी जाने वाली स्क्रिप्ट में अपनी दखल चाहती हैं, अपने डायलॉग चुनती हैं और निर्देशन में भी हाथ आजमाती हैं लेकिन फिल्मी दुनिया की इन रंगीन जिंदगी से पहले आइए सैर करते हैं पहाड़ों की वादियों की। हिमाचल के मंडी जिले में 23 मार्च 1987 को अमरदीप रनौत और आशा रनौत के घर एक लड़की का जन्म हुआ, लेकिन घर में खुशियों की जगह मातम ने ले ली। इसकी वजह थी कि इस घर में पहले से एक लड़की थी। परिवार चाहता था कि अब घर में लड़के का जन्म हो।
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कंगना रनौत
घरों में लड़के और लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव पर कंगना ने कई मौकों पर अपने ही घर का उदाहरण दिया। उन्होंने खुलकर बताया कि जन्म के बाद उनके घर में मातम जैसा माहौल था। उन्होंने बताया कि जब कभी घर में कोई मेहमान आता तो उनका परिवार हमेशा यह कहानी बताता कि कैसे कंगना एक 'अनवॉन्टेड बच्ची' है। 'अनवॉन्टेड बच्ची' यानी परिवार जिसका जन्म नहीं चाहता था, फिर भी वह परिवार में आ गई। शायद यही वजह थी कि यह अनवॉन्टेड कंगना धीरे-धीरे विरोधी स्वभाव की होने लगी। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कंगना ने अपने बचपन के बारे में बताया, ''मैं बचपन से ही ज़िद्दी और विरोधी स्वभाव की रही हूं। अगर मेरे पापा मेरे लिए गुड़िया लाते और भाई के लिए प्लास्टिक की बंदूक़ तो मैं गुड़िया लेने से इंकार कर देती थी। मुझे भेदभाव पसंद नहीं था।''
कंगना रनौत
कंगना हिमाचल से निकलकर पहले चंडीगढ़ पहुंची और फिर 16 साल की उम्र में दिल्ली आ गईं, कुछ वक्त बाद उन्हें मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे और कंगना धीरे-धीरे पहाड़ों से उतरकर मैदानी रंग में रंगने लगीं। उन्होंने कुछ महीनों के लिए अस्मिता थिएटर ग्रुप में काम भी सीखा। जब कंगना ने फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का फैसला किया तो उनके परिवार को यह नागवार गुजरा। कंगना इस बारे में बताती हैं, ''जब मुझे पहली फिल्म का ऑफर मिला तो मैंने खुश होकर घर में बताया। मेरी मां को जब पता लगा इस फिल्म को वही डायरेक्टर बना रहे हैं जिन्होंने मर्डर फिल्म बनाई है तो उन्हें चिंता होने लगी। उन्हें लगा कि कोई मेरी ब्लू फिल्म बना देगा। कंगना की पहली फिल्म थी 'गैंगस्टर'। घुंघराले बालों वाली दुबली-पतली सी एक लड़की जो साफ हिंदी भी नहीं बोल पा रही थी, उसे देख लोगों को अंदाजा नहीं था कि यह एक दिन फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े महारथियों के खिलाफ मोर्चा खोल देगी।
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कंगना रनौत
साल 2006 में गैंगस्टर के साथ 'रंग दे बसंती', 'लगे रहो मुन्नाभाई' और 'फना' जैसी बड़ी फिल्में आईं लेकिन कंगना ने अपनी पहली ही फिल्म में फिल्मफेयर का बेस्ट फीमेल डेब्यू अवॉर्ड जीत लिया। पहली फिल्म के साथ शुरू हुआ अवॉर्ड्स का सिलसिला लगातार जारी रहा। 'फैशन' फिल्म में उन्होंने बिगड़ैल और शराब के नशे में डूबी एक आत्ममुग्ध मॉडल का रोल इतनी खूबसूरती से निभाया कि उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया। इसके बाद कंगना ने क्वीन और तनु वेड्स मनु फिल्म के लिए साल 2015 और 2016 का राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया। हालांकि इस बीच साल 2014 में कंगना ने अलग-अलग प्राइवेट संस्थानों की ओर से मिलने वाले तमाम अवॉर्ड शो का बायकॉट किया। उन्होंने इन तमाम अवॉर्ड शो को बेबुनियाद करार दिया।

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