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मनोज बाजपेयी का खुलासा- 'हिंदी बोलने पर पिछड़ा समझती है बेटी'
Wed, 18 Sep 2019 12:04 AM IST
anand anand
बीबीसी हिंदी, नई दिल्ली
बीबीसी हिंदी, नई दिल्ली
Published by: anand anand
Updated Wed, 18 Sep 2019 12:04 AM IST
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manoj bajpayee
- फोटो : file photo
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अभिनेता मनोज बाजपेयी की गिनती हिंदी फिल्म जगत के उन अभिनेताओं में होती है जिनकी हिंदी भाषा पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। मनोज बाजपेयी ने सत्या, शूल, अलीगढ़ और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों के जरिए अभिनय की दुनिया में अपनी धाक जमाई है। वो हिंदी को अपनी ताकत मानते हैं। मनोज बाजपेयी ने बीबीसी से बातचीत में हिंदी भाषा और फिल्म इंडस्ट्री को लेकर कहा," अगर मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहा हूं और अगर मैं हिंदी जानता हूं तो ये मेरी कमज़ोरी नहीं है। ये मेरी ताकत है। जिसको हिंदी नहीं आती है, वो अपना सोचे।"
Manoj Bajpayee
- फोटो : file photo
ये माना जाता है कि हिंदी फिल्मों में काम कर रहे अधिकतर अभिनेताओं को हिंदी भाषा नहीं आती। इसलिए उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट भी रोमन में लिखकर दी जाती है लेकिन मनोज बाजपेयी फिल्म की पटकथा देवनागरी भाषा में ही लेते हैं। वो कहते हैं कि किसी की ये हिम्मत नहीं होती कि उन्हें रोमन में स्क्रिप्ट दे। ऐसा हुआ तो वो स्क्रिप्ट फेंक देंगे। मनोज बाजपेयी ने ये माना कि हिंदी 'उनकी मातृभाषा नहीं है और हिंदी में निपुणता हासिल करने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की है।' वो कहते हैं, "मेरी मातृभाषा भोजपुरी है। मैंने हिंदी सीखी है। कई हिंदी विद्वानों को पढ़ा है। मैं रंगमंच करता था जिसके लिए आपकी हिंदी और उर्दू में पकड़ अच्छी होनी चाहिए"
द फैमिली मैन
- फोटो : सोशल मीडिया
हालांकि, मनोज बाजपेयी को अपनी नौ साल की बेटी को हिंदी सिखाने में बहुत दिक्कत आ रही है। वो कहते हैं कि उनकी बेटी को हिंदी नहीं आती। मनोज बाजपेयी बताते हैं,"मुंबई जैसे शहर में मेरी बेटी को हिंदी सिखाना एक चुनौती है। मेरी बेटी हिंदी नहीं बोल पाती है। उसके स्कूल में अध्यापक, छात्र, उसके मित्र और घर के पास के मित्र और उनके मां-बाप सभी अंग्रेजी में बात करते हैं। सिर्फ मैं यानी उनका पिता ही उनसे हिंदी में बात करता हूं जिसे वो पिछड़ा हुआ समझती है। लेकिन मैं उनसे अंग्रेजी में बात नहीं करता क्योंकि कोई तो हो जो उससे हिंदी में बात करे।"
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Manoj Bajpayee
- फोटो : instagram
मनोज बाजपेयी फिल्म उद्योग में करीब 25 साल हो गए हैं। अभिनय की दुनिया में उन्होंने अपना लोहा मनवाया है। अपने सफ़र को लेकर वो कहते हैं कि उनकी 'जिद और भैंस जैसी चमड़ी ने उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री जैसी मुश्किल जगह पर टिका कर रखा' और इस मुक़ाम पर पहुंचाया। मनोज बाजपेयी एक तरफ गली गुलियां, रुख और मिसिंग जैसी कंटेंट फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, वही दूसरी तरफ वो सत्यमेव जयते, भागी 2 जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी दिखे।
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manoj bajpayee
- फोटो : file photo
मनोज बाजपेयी का मानना है कि 'बागी 2' और 'सत्यमेव जयते' जैसी फिल्मों में काम करना जरूरी हो जाता है क्योंकि ये फिल्में उन्हें व्यवसायिक विश्वसनीयता प्रदान करती है जिससे वो दूसरी फिल्मों का हिस्सा बन सकें। कई अभिनेता अपने फिल्मी सफर को किताब में तब्दील कर रहे हैं लेकिन मनोज बाजपेयी का कहना है कि वो अपनी ऑटो-बायोग्राफी तभी लिखेंगे जब उनमें इतनी ताकत आ जाए कि वो अपने सफर को महान ना बताकर सच बताने की हिम्मत दिखा सकें। ऐसा होने पर ही वो किताब लिखेंगे। मनोज बाजपेयी जल्द ही अमेजन प्राइम की सिरीज "द फैमिली मैन" में नजर आएंगे। राज एंड डीके निर्देशित इस सीरीज में प्रियामणि, शारिब हाशमी और गुल पनाग ने अहम भूमिका निभाई हैं।
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