यशराज फिल्म्स में अपने करियर के 10 साल पूरे कर चुके लेखक निर्देशक गोपी पुत्रन अपनी फिल्म ‘मर्दानी 2’ की पहली सालगिरह पर बेहद खुश हैं। वह बताते हैं कि फिल्म फ्रेंचाइजी ‘मर्दानी’ कैसे अब उनके लिए एक मिशन बन चुकी है। वह कहते हैं कि रानी मुखर्जी स्टारर सुपरहिट ‘मर्दानी 2’ ने भारतीय दर्शकों पर बहुत गहरा असर डाला है।
Mardaani 2: इसलिए दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही ‘मर्दानी’, निर्देशक ने किए दिलचस्प खुलासे
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गोपी कहते हैं, “हमने बिना कोई अपनी बात जोड़े इस कहानी में सिर्फ तथ्यों को पर्दे पर पेश किया। इसके बाद हमें इतने संदेश मिले कि पूछिए मत। हर संदेश में किसी न किसी ने अपने अनुभव की बात लिखी थी। हमें ये मैसेज इसलिए मिले कि फिल्म की ओर से भी अपना मैसेज देने में खास ईमानदारी बरती गई थी। दर्शकों के सामने बिना किसी पूर्वाग्रह के इस मैसेज को एक बांध लेने वाली कहानी के पैकेज में पेश करना, मुझे लगता है कि इन दोनों चीजों का तालमेल दर्शकों को काफी पसंद आया।”
‘मर्दानी 2’ भारत में किशोरवय के अपराधियों द्वारा महिलाओं के खिलाफ किए जा रहे गुनाहों की तरफ और ज्यादा ध्यान खींचने में खूब कामयाब रही। गोपी बताते हैं, “जब लोगों ने मर्दानी 1 और 2 देखी, तो आम तौर पर उनका रिएक्शन यही था कि ये फिल्में कौतुहूल जगाती हैं। मर्दानी सीरीज की बात करें, तो यह एक ऐसी कहानी है जिसमें पूरी फिल्म सिर्फ खालिस उपदेश पर आधारित नहीं है। इसकी कहानी दिलचस्प है और इसके साथ-साथ हम एक मैसेज भी दे रहे हैं। मर्दानी सीरीज महिलाओं और उनकी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करती है। फिल्म में कुछ ऐसे सवाल उठाए गए थे जिनके बारे में पहले बात नहीं की गई थी। मेरा मानना है कि बहुत छोटे स्तर पर ही सही, इन सवालों ने इस मामले की तरफ लोगों का ध्यान खींचा।”
‘मर्दानी 2’ की कहानी को लेकर इसके निर्माता आदित्य चोपड़ा के साथ गोपी ने कई महीनों तक काम किया। वह कहते हैं, “मर्दानी के वक्त हमें बहुत कुछ पता नहीं था। हमारे मन में कुछ चीजें थीं जिन्हें हमने पर्दे पेश कर दिया। हमें जो रिस्पॉन्स मिला, उससे एहसास हुआ कि अब मर्दानी 2 में हमें अपने मैसेज को लेकर ज्यादा स्पष्ट होना पड़ेगा। हमें अपनी स्टोरीलाइन को ज्यादा दिलचस्प बनाने की जरूरत थी, इसलिए हर चीज एक पायदान ऊपर रखनी थी- स्टोरीटेलिंग, मैसेजिंग और परफॉर्मेंस का खरापन, यानी हर चीज। पूरा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले हमारे सामने एक चीज साफ थी कि हम मर्दानी 2 तभी बनाएंगे, जब हमारे पास कोई ऐसा सबजेक्ट होगा, जिसके बारे में हम पूरे जुनून के साथ बात कर सकेंगे। इसी वजह से दोनों फिल्मों में करीब पांच साल का अंतराल भी रहा। जैसे ही ठीक सब्जेक्ट और सही स्टोरीलाइन हमारे हाथ लगी, हमने फिल्म बना दी।“
फिल्म की मुख्य कलाकार रानी मुखर्जी के बारे में जिक्र करने पर गोपी याद करते हैं, “मैं यह मान कर चलता हूं कि फिल्म ने रानी को अपनी क्षमताओं से आगे बढ़कर काम करने पर मजबूर किया। मेरे अंदाज से इसकी वजह यह हो सकती है कि जिस तरह का काम वह कर चुकी थीं, जिस तरह के किरदार वह निभा चुकी थीं, उनके मुकाबले मर्दानी का किरदार थोड़ा ऊंचा था। मेरी समझ में केवल अभिनय ने ही उनके सामने चुनौती पेश नहीं की थी, मुझे लगता है कि कहीं न कहीं उन एक्शन सीक्वेंस ने भी उन्हें उलझन में डाला जो पानी के नीचे फिल्माए गए। रानी को पानी से हमेशा बड़ा डर लगता था, लेकिन उन्होंने इस फोबिया को मात दे दी। पानी के नीचे वाले सीक्वेंस शूट होने से पहले उन्होंने खुद को इसकी ट्रेनिंग में झोंक दिया था और शूटिंग के दौरान भी उन्होंने बड़ी हिम्मत दिखाई।”