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सिर्फ 'दाल-चावल' खाने लंदन चले गए थे मोहम्मद रफी, इस लड़की ने की थी ये ख्वाहिश पूरी

Sun, 23 Dec 2018 03:54 PM IST
विजय जैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: विजय जैन Updated Sun, 23 Dec 2018 03:54 PM IST
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mohammad rafi birth anniversary and his life facts
मोहम्मद रफी

हिंदी सिनेमा के जाने-माने फनकार और स्वर सम्राट मोहम्मद रफी की आज 95वीं जयंती है। उनका जन्म 24 दिसंबर 1924 को हुआ था और 31 जुलाई 1980 में इन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था। अपने सिंगिंग करियर में रफी ने ऐसे-ऐसे गाने गाए हैं जिनका महत्व आज भी उतना है जितना उनके समय में हुआ करता था। ऐसे में बात करेंगे रफी के उस किस्से के बारे में जिसमें वह सिर्फ दाल-चावल खाने के लिए लंदन चले गए थे...


 

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Mohammed Rafi

बता दें कि रफी को पतंग उड़ाने का बहुत शौक था और ऐसे में उनके पड़ोसी और सिंगर मन्ना डे अकसर उनकी पतंग काट दिया करते थे। गौरतलब है कि रफी बहुत ही मेहमाननवाज थे और घर पर ही अपने कई खास दोस्तों को दावतों पर बुलाते थे। ऐसे में रफी की मेहमाननवाजी का एक किस्सा खय्याम जी ने शेयर किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि रफी ने कई बार उन्हें और उनकी पत्नी जगजीत कौर को खाने पर इनवाइट किया था। खय्याम ने यह भी बताया था कि रफी के यहां खाना बहुत ही लजीज बना करता था।

 

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Mohammed Rafi

ऐसे में यास्मीन खालिद ने बताया कि एक बार ब्रिटेन के कॉव्रेंट्री में शो था। ऐसे में जब यास्मीन पति खालिद के साथ रफी से मिलने पहुंचीं तो वह बहुत निराशाजनक स्थिति में थे क्योंकि उनकी परेशानी की वजह थी वहां मिलने वाला खाना जो उन्हें कतई पसंद नहीं था। ऐसे में रफी ने पूछा का यहां से लंदन जाने में कितना समय लगेगा तो उन्होंंने तीन घंटे का रास्ता बताया। फिर रफी ने यास्मीन से पूछा कि क्या तुम एक घंटे में दाल-चावल और चटनी बना सकती हो। यास्मीन के हां कहते ही रफी बिना किसी को बताए लंदन चल पड़े और शो शुरू होने से पहले वापस भी आ गए। 

 

 

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मोहम्मद रफी

लंदन पहुंचते ही यास्मीन तुरंत दाल-चावल और चटनी बना प्याज-टमाटर की सलाद के साथ रफी को परोसा। खाना खाने के बाद रफी ने यास्मीन को बहुत शुक्रियादा किया लेकिन सबसे बड़ी बात रफी ने शो में बताया था भी कि वह सिर्फ दाल-चावल खाने लंदन गए थे। यह सुन वहां मौजूद सभी दर्शक चौंक गए। 
कहा जाता है कि रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कंसर्ट में गाने की अनुमति दी थी। 

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मोहम्मद रफी
साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था। मुहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया है। मुहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते है। उस वक्त करीब 10 हजार लोग यात्रा में शरीक हुए थे।
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