70 के दशक में परवीन बाबी मशहूर अभिनेत्री थीं। उस वक्त हिंदी सिनेमा की अधिकतर फिल्मों में परवीन बाबी रहती थीं। परवीन ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में दीं। फिल्म इंडस्ट्री में उनकी छवि बोल्ड एक्ट्रेस की थी। 1976 से 80 के बीच वो इंडस्ट्री की सबसे महंगी एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार थीं। लेकिन उनकी मौत का रहस्य आज भी बरकरार है। कोई कहता है कि उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी, तो कोई कहता है उन्होंने आत्महत्या कर ली। आज Monday Flashback में आपको बताते हैं महेश भट्ट और परवीन बाबी की लव स्टोरी के खतरनाक द एंड के बारे में...
Flashback: डरावना था महेश भट्ट और परवीन बाबी के रिश्ते का अंत, एक रात घर पहुंचे तो उड़ गए थे होश, सुशांत को लेकर भी कही गई ऐसी ही बात
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सिल्वर स्क्रीन पर उनकी जिंदगी में जितनी चमक दिखती थी असल में वो उतनी ही अकेली थीं। कहा जाता है कि परवीन का अफेयर महेश भट्ट के अलावा डैनी और कबीर बेदी से भी रहा। लेकिन महेश भट्ट के साथ उनकी प्यार भरी कहानी का दर्दनाक अंत हुआ था। 'फिल्मफेयर' को दिए एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने अपने और परवीन के रिश्ते को लेकर कई राज खोले थे। साथ ही उनकी मौत पर दुख जताया था। महेश भट्ट ने परवीन को श्रद्धांजलि देने के लिए फिल्म भी बनाई थी।
जब महेश भट्ट से परवीन को प्यार हुआ था, तब वो अपने करियर के चरम पर थीं। लेकिन महेश पहले से ही शादीशुदा थे। 1977 में दोनों का प्यार परवान चढ़ा तो महेश अपनी पत्नी को छोड़कर परवीन के साथ लिव इन में रहने लगे। विरोध के बावजूद दोनों को अलग करना नामुमकिन हो गया था। महेश के लिए परवीन घर पर एक साधारण लड़की की तरह रहती थीं। देखते-देखते दोनों के रिश्ते को दो साल हो गए।
1979 में महेश भट्ट को अचानक एक ऐसी सच्चाई का पता चला जिससे उनके होश उड़ गए। एक दिन महेश जब घर लौटे तो उन्होंने देखा कि परवीन फिल्म का कॉस्ट्यूम पहने घर के एक कोने में बैठी हैं, उनके हाथ में चाकू था। महेश को देखते हुए परवीन ने उन्हें चुप रहने का इशारा किया। इसके बाद परवीन ने कहा, ‘बात मत करो, कमरे में कोई है। वो मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं।’ परवीन ने पहली बार ऐसा कुछ किया था जिससे महेश बुरी तरह हिल गए थे। डॉक्टरों को दिखाने के कुछ दिन बाद पता चला कि उन्हें सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी है।
महेश भट्ट उनका इलाज अच्छे से अच्छे डॉक्टर्स से करवाने लगे। तमाम इलाज के बावजूद परवीन की ये बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी। परवीन की ऐसी स्थिति देखकर उन्हें कमरे में ही बंद रखा जाने लगा। उन्हें मीडिया और पब्लिक की नजरों से दूर रखना पड़ा। परवीन की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। उन्होंने दवाइयां खाना बंद कर दिया था। अंतिम वक्त में परवीन बाबी इतनी अकेली थीं कि कोई पास तक न भटकता। उम्र 56 हुई तो उठ भी नहीं पाती थीं। 20 जनवरी 2005 को अकेले घर में उन्होंने दम तोड़ दिया। तीन दिनों तक लाश बेड पर सड़ती रही। जब दरवाजे से ब्रेड-दूध नहीं हटा तो किसी ने पुलिस को खबर दी थी। तब लोगों को उनकी मौत की जानकारी मिली।