हिंदी सिनेमा में फुटपाथ से उठकर सुपरस्टार बन जाने वाले एक मात्र अभिनेता रहे हैं मिथुन चक्रवर्ती। अब उनके सबसे छोटे बेटे नमोशी बड़े परदे पर अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं फिल्म ‘बैडबॉय’ से। हीरो बनने से पहले बतौर अभिनेता नमोशी ने सिनेमा को कितना और कैसे समझा? बता रहे हैं ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस एक्सक्लूसिव मुलाकात में। नमोशी से ये बातचीत उनके मड आइलैंड स्थित घर पर हुई। इस दौरान नमोशी कई बार भावुक हुए और हर बार खुद को संभालते हुए उन्होंने हर सवाल का बहुत ही साफ हिंदी में उत्तर दिया। नमोशी की पहली फिल्म ‘बैड बॉय’ का निर्देशन दिग्गज निर्देशक राजकुमार संतोषी ने किया।
Namoshi Chakraborty Interview: मिथुन को मार पड़ी तो चीखकर रो पड़े नमोशी, बेटे ने सुनाई पिता की संघर्ष कहानी
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नमोशी, मिथुन चक्रवर्ती को चाहने वाले इस देश में करोड़ों हैं, उनको प्यार करने वालों की दुआएं आपके साथ हैं, लेकिन, अभिनय तो आपको खुद करना है, कैसे तैयार किया अपने आपको इस बड़े कदम के लिए?
मैं बस इतना कह सकता हूं कि बतौर हीरो भले मैं अब बड़े परदे आ रहा हूं लेकिन अभिनय मैं 20 साल से कर रहा हूं। सात साल का था मैं, जब हमारे घर हैंडीकैम आया। हम तीनों भाई तभी से फिल्में बनाने लगे। फिर स्कूल पहुंचा तो वहां नाटकों में दिलचस्पी हो गई। पढ़ाई खत्म करने के बाद नौ साल तक वेब पोर्टल आईएमडीबी (इंटरनेट मूवी डाटा बेस) में बतौर लेखक काम किया। और, उस दौरान मैंने मकरंद देशपांडे से लेकर आलोक उल्फत और किशोर नमित कपूर तक सबकी कार्यशालाएं की हैं। एक कॉमेडी ग्रुप के साथ भी जुड़ा। 2018 तक मैंने मंच पर सजीव अभिनय किया है बिना किसी पटकथा के। बड़े भाई उष्मय ने मुझे लेकर एक शॉर्ट फिल्म ‘लाइफ समव्हेयर’ बनाई जिसे 2011 में कनाडा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुस्कार मिल चुका है।
आप इतने बड़े सुपरस्टार के बेटे हैं, इसका एहसास होना कब शुरू हुआ?
मैं पैदा मुंबई में हुआ लेकिन फिर हम 1994 के आखिर में ऊटी चले गए। होश संभाला तो खुद को मोनार्क होटल में पाया। हमारे इस होटल में मैं देखता था कि डैडी रोज नई वेशभूषा में नजर आते थे। मैं मम्मी से कहता कि इनसे अपनी नौकरी ठीक से नहीं हो रही। रोज नया काम करने लगते हैं। तब उन्होंने समझाया कि यही इनका काम है। ये अभिनेता हैं। फिर हम बाहर निकलने लगे और जहां भी हम जाते तो भीड़ लग जाती। यहां से मुझे एहसास होना शुरू हुआ कि मेरे डैडी एक महत्वपूर्ण इंसान हैं। तीन तीन शिफ्ट में काम करके वह घर आते तो काफी थके हुए लगते थे। मैं समझने लगा था कि ये बहुत ही मेहनती आदमी हैं और लगातार काम करने वाले इंसान हैं।
और, इस स्टारडम का असर भी दिखता होगा?
हां, लोगों को जैसे ही पता चलता कि मैं मिथुन चक्रवर्ती का बेटा हूं तो लोगों का व्यवहार ही बदल जाता है। फिल्म ‘बैड बॉय’ का जो गाना अभी रिलीज हुआ है, उसकी शूटिंग सेंट पीटर्सबर्ग, रूस में हुई है। हम एक आम हिंदी फिल्म के कलाकारों की तरह वहां पहुंचे। तकनीशियन वगैरह भी साथ थे। एक दिन डैडी को आना था। मैंने ही बुलाया कि मुझे थोड़ा उनकी मौजूदगी की जरूरत है और जैसे ही वहां पता चला कि ‘जिमी’ आ रहे हैं (रूस और चीन में मिथुन चक्रवर्ती को लोग फिल्म ‘डिस्को डांसर’ के उनके किरदार जिमी के नाम से ही बुलाते हैं), पूरा माहौल ही बदल गया। हमारी सारी सुविधाएं लग्जरी क्लास की हो गईं। होटल के बाहर सिर्फ प्रौढ़वय के लोग ही नहीं बल्कि युवक युवतियां भी उन्हें देखने को इकट्ठा हो गए। 70 साल के एक इंसान का ऐसा स्टारडम!
पहली फिल्म डैडी की कौन सी देखी आपने?
उन दिनों हम ऊटी में ही थे। हम उनकी फिल्मों के ट्रायल शो (रिलीज से पहले परिचितों के लिए होने वाले शो) देखा करते थे। एक फिल्म बनी थी ‘मुकद्दर’, उसमें आयशा जुल्का हीरोइन थी। बहुत मारधाड़ वाली पिक्चर थी। फिल्म में एक दृश्य आया जिसमें खलनायक डैडी पर हमला कर देता है। मुझे लगा ये असली है। मैं इतना रोया थियेटर में कि सबको ट्रायल छोड़कर होटल वापस आना पड़ा। डैडी को तो बहुत गुस्सा आया, उन्होंने मुझे एक झापड़ भी मारा। कहने लगे, प्रोड्यूसर क्या सोचेगा कि जब हीरो का परिवार ही उठकर चला गया तो पिक्चर का क्या ही कुछ होगा?