अभिनेता मनोज बाजपेयी अपने घर में क्वारंटीन हैं। एक और नेशनल अवार्ड मिलने की खुशी वह लोगों के साथ फोन पर ही बांट रहे हैं। मनोज बाजपेयी का जीवन ऐसी तमाम आकस्मिक घटनाओं से भरा रहा है। उन्होंने तमाम अपमान सहा, तमाम जगहों पर दुत्कारे गए लेकिन वह अपने पथ से डिगे नहीं। आज उनकी गिनती हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकारों की पहली पंक्ति में होती है। एनएसडी में उन्होंने थिएटर भी पढ़ाया है, ये और बात है कि इसी एनएसडी में एडमीशन के लिए उन्होंने ठोकरे भी खूब खाईं। अपने अभिनय के लिए अब तक तीन नेशनल और चार फिल्मफेयर अवार्ड्स जीत चुके मनोज को ढेर सारी बधाई और चलिए अब जानते हैं उनकी अभिनय यात्रा के उन मील के पत्थरों के बारे में जिन्होंने बिहार के इस लाला को मुंबई का किंग और देश का सच्चा लाल बना दिया।
National Films Awards 2021: बिहार का लाला मनोज ऐसे बना देश का लाल, इन 10 किरदारों में है क्रोनोलॉजी
किरदार: पुष्कर
फिल्म: दौड़ (1997)
मनोज बाजपेयी अब तक द्रोहकाल, बैंडिट क्वीन, दस्तक, तमन्ना जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार ही करते आए थे। जब रामगोपाल वर्मा को पता चला कि मनोज ने 'बैंडिट क्वीन' में डकैत मानसिंह का किरदार निभाया है तो वह हैरान रह गए। उन्होंने इस फिल्म में मनोज को काम देने मना कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि एक शानदार कलाकार एक मामूली सा किरदार करे। परंतु मनोज को उन दिनों पैसे की जरूरत थी सो उन्होने रामगोपाल वर्मा से ये काम मांगा और रामू ने भी तब मना नहीं किया। साथ ही रामू ने उन्हें फिल्म 'सत्या' की मुख्य भूमिका के लिए भी साइन कर लिया। इस फ्लॉप फिल्म में संजय दत्त और उर्मिला मातोंडकर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
किरदार : भीकू म्हात्रे
फिल्म : सत्या (1998)
रामगोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी इस शानदार फिल्म में मनोज बाजपेयी गैंगस्टर भीकू म्हात्रे के किरदार में नजर आए। शुरुआत में रामगोपाल ने मनोज को हीरो का किरदार करने के लिए फिल्म में साइन किया। लेकिन, कहानी पूरी होने के बाद रामगोपाल को एहसास हुआ कि इस फिल्म में विलेन पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। इसलिए, उन्होंने बाद में मनोज को भीकू म्हात्रे का किरदार करने के लिए कहा। इस किरदार को निभाने के लिए हिंदी पर अच्छी पकड़ होनी भी जरूरी थी। इस फिल्म में जेडी चक्रवर्ती, उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी, सौरभ शुक्ला, शेफाली शाह और परेश रावल ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। मनोज का एक्टिंग का पहला नेशनल फिल्म अवार्ड इसी फिल्म के लिए मिला।
किरदार: इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह
फिल्म: शूल (1999)
सत्या के सुपरहिट होने के बाद मनोज बाजपेयी ने इस फिल्म में दूसरी बार मुख्य भूमिका निभाई। ईश्वर श्रीनिवास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोज इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह के किरदार में नजर आए। यह फिल्म राजनीतिज्ञों और अपराधियों के बीच की मिलीभगत, बिहार में राजनीति के बढ़ते अपराधों और इसी बीच एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर के जीवन में बढ़ती परेशानियों पर प्रकाश डालती है। शानदार अभिनय के लिए मनोज को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड से नवाजा गया। साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित भी किया गया। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ सयाजी शिंदे और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।
किरदार : राघवन घाटगे
फिल्म : अक्स (2001)
मनोज बाजपेयी की अमिताभ बच्चन और रवीना टंडन के साथ यह अलौकिक शक्तियों से प्रेरित एक थ्रिलर फिल्म है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म को मनोज अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'इस फिल्म में मैंने ऐसी पटकथा पर काम किया जो हिंदी सिनेमा के लिए एकदम नई है। और मुझे खुशी है कि मैं इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ काम कर पाया। फिल्म में मनोज ने एक हत्यारे की भूमिका निभाई है जो दूसरे के शरीर पर हावी होकर अपराध करवाता है। शानदार अभिनय के लिए मनोज को बेस्ट विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।