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Emmay Entertainment: हिंदी सिनेमा की दिग्गज कंपनियों की बिकने लगी हिस्सेदारी, मैडॉक के बाद अब एम्मे एंटरटेनमेंट का नंबर

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 21 Feb 2022 01:54 PM IST
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Nepean Capital acquires 50% stake in Dinesh Vijan Maddock Films now Emmay Entertainment likely to sell its equity
maddock films, emmay entertainment - फोटो : Social media

हिंदी सिनेमा के निर्माताओं के बीच इनदिनों अजब सा आलम है। जबसे ये तथ्य सामने आया है कि हिंदी सिनेमा का कारोबार बीते दो साल में आधे से भी कम पर आ गया है, फिल्म निर्माताओं के बीच अपनी कंपनी की साझेदारी बेचने की होड़ सी लग गई है। रविवार को फिल्म निर्माता दिनेश विजन के अपनी चर्चित कंपनी मैडॉक फिल्म्स की आधी हिस्सेदारी एक फाइनेंस कंपनी को बेच देने की जानकारी आई और अब हफ्ते के पहले ही दिन एम्मे एंटरटेनमेंट नाम की कंपनी की हिस्सेदारी बेचने को लेकर बातचीत शुरू होने की जानकारी मिली है। मैडॉक फिल्म्स को ‘मिमी’, ‘स्त्री’, ‘बाला’, ‘हिंदी मीडियम’, ‘लुकाछिपी’, ‘बदलापुर’, ‘लव आजकल’ और ‘कॉकेटल’ जैसी फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है, वहीं एम्मे एंटरटेनमेंट ने ‘डी डे’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘सत्यमेव जयते’, ‘बाटला हाउस’ और ‘बाजार’ जैसी फिल्मों के अलावा ‘द एम्पायर’, ‘मुंबई डायरीज’ और ‘रॉकेट ब्वॉयज’ जैसी सीरीज बनाई हैं।

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बोनी कपूर - फोटो : सोशल मीडिया

हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने दो साल पहले जब हिंदी की हिट फिल्म ‘पिंक’ का तमिल रीमेक ‘नेरकोंडा पारवाई’ बनाया तो ज्यादा लोगों का ध्यान ज्यादा इस तरफ गया नहीं। फिर उन्होंने इसी फिल्म का तेलुगू रीमेक बनाया और अब इसी महीने उनकी मेगाबजट तमिल फिल्म ‘वलिमै’ रिलीज होने जा रही है। हिंदी सिनेमा में कलाकारों की निर्माताओं के मुनाफे में लगातार बढ़ती हिस्सेदारी और हिंदी पट्टी में हिंदी फिल्म सितारों की लगातार घटती चमक ने ही बोनी कपूर को दक्षिण का रास्ता दिखाया। बोनी कपूर की गिनती इन दिनों दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिट फिल्म निर्माताओं में होती है। लेकिन पारंपरिक रूप से हिंदी फिल्मे या सीरीज ही बनाती रही फिल्म निर्माण कंपनियों की हालत वैसी नहीं है।

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मैडॉक फिल्म्स - फोटो : Social media

पारंपरिक फिल्म निर्माताओं के फिल्म निर्माण से दूर होने, हिंदी फिल्मों का अधिकतर कामकाज कॉरपोरेट घरानों के पास आ जाने से निर्माताओँ का मुनाफा लगातार घटता जा रहा है। आलम ये है कि मैडॉक फिल्म्स जैसी दिग्गज फिल्म निर्माण कंपनी ने अपनी कंपनी का विस्तार करने के लिए बीते हफ्ते अपना आधा हिस्सा नेपियन कैपिटल नामक कंपनी को बेच दिया। मैडॉक के मालिक दिनेश विजन का कहना है कि ऐसा उन्होंने ओटीटी क्षेत्र में अपना विस्तार करने के लिए किया है। ओटीटी के लिए मनोरंजन सामग्री बनाने वाले अधिकतर निर्माता अभी तक प्रोजेक्ट पर मंजूरी लाकर ओटीटी संचालकों की वित्तीय मदद से ही सीरीज बनाते रहे हैं, लेकिन इस तरह से वेब सीरीज या ओटीटी ओरीजनल बनाने पर न सिर्फ क्रिएटिव दखलंदाजी काफी बढ़ जाती है बल्कि निर्माताओं को मुनाफा भी ज्यादा नहीं मिल रहा।

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नेटफ्लिक्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बाहुबली सीरीज की फिल्मों से पहले की कहानी के तौर पर जोर जोर से शुरू हुई नेटफ्लिक्स की ‘राइज ऑफ शिवगामी’ सीरीज दो बार बनने के बाद रद्द कर दी गई। इसके चलते नेटफ्लिक्स को तो केवल आर्थिक नुकसान हुआ लेकिन इससे जुड़े निर्माताओं और तकनीशियों का नाम काफी खराब हुआ है। अब निर्माता अपनी सीरीज बनाने के बाद ही इसका सौदा ओटीटी से करने की योजना पर काम कर रहे हैं। आदित्य बिड़ला समूह की मनोरंजन कंपनी अप्लॉज एंटरटेनमेंट इसी फॉर्मूले पर काम करती रही है। मुंबई के फिल्म निर्माता आमतौर पर प्रोजेक्ट में अंशधन लगाकर फिल्मी कॉरपोरेट घरानों से निवेश तलाशते रहे हैं लेकिन अब इसका दस्तूर भी बदल रहा है। अब फिल्मों और वेब सीरीज का सौदा इनके पूरा बनने के बाद होने की परिपाटी तेजी पकड़ रही है।

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गहराइयां - फोटो : Instagram

दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘गहराइयां’ बनने के बाद धर्मा प्रोडक्शंस में काफी बड़ी रकम निवेश करने वाली कंपनी वॉयाकॉम 18 इसे सिनेमाघरों में रिलीज करने का जोखिम उठाने से पीछे हट गई। लिहाजा फिल्म को ओटीटी पर ही रिलीज करना पड़ा। ऐसी तमाम फिल्में है जो बनने के बाद सिनेमाघरों तक नही पहुंच पा रही हैं और कई बड़ी फिल्मों में हाथ जला चुके ओटीटी वाले अब इन्हें अपनी शर्तों के हिसाब से ही खरीद रहे हैं। इसी कड़ी में मोनीषा आडवानी, मधु भोजवानी और निखिल आडवाणी की कंपनी एम्मे एंटरटेनमेंट भी अपनी इक्विटी बेचने के लिए संभावित निवेशकों से बातचीत शुरू कर चुकी है। कंपनी का दावा है कि संस्थागत निवेशकों के साथ आने से कंपनी को अपने निर्माण स्तर को बढ़ाने और पोस्ट प्रोडक्शन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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