अभिनेता ओम पुरी हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकारों में से एक थे। उन्होंने अपने अभिनय से फिल्मी पर्दे पर अमिट छाप छोड़ी। ओम पुरी का जन्मदिन 18 अक्तूबर को होता है। ओम पुरी जितने शानदार अभिनेता थे उनते ही शानदार उनकी फिल्मों के डायलॉग्स हुआ करते थे। उनके डायलॉग्स बोलने की कला के दर्शक भी मुरीद थे। जन्मदिन पर हम आपको ओम पुरी के कुछ शानदार डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता थे ओम पुरी, पढ़ें उनकी फिल्मों के ये 10 शानदार डायलॉग्स
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डायलॉग- खून जब बोलता है तो मौत का तांड़व होता है।
फिल्म- मरते दम तक (1987)
डायलॉग- मेरा फरमान आज भी इस शहर का कानून है, मैं जब भी करता हूं, इंसाफ ही करता हूं।
फिल्म- नरसिम्हा (1991)
फिल्म- प्यार तो होना ही था (1998)
डायलॉग- जंग कोई भी हो, नतीजा कुछ भी हो, एक सिपाही अपना कुछ न कुछ खो ही देता है।
फिल्म- चाइना गेट (1998)
फिल्म- मरते दम तक (1987)
डायलॉग- परंपराओं की लकीरें जब धुंधली पड़ जाती हैं, तो नई लकीरें खींचने से परहेज नहीं करना चाहिए।
फिल्म- बाबुल (2006)
फिल्म- कुर्बान (2009)
डायलॉग- मजहब इंसानों के लिए बनता है, मजहब के लिए इंसान नहीं बनते।
फिल्म- ओह माय गॉड (2012)