'इशारों इशारों में दिल लेने वाले...', 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी...', 'लेके पहला पहला प्यार...' इन गानों की पंक्तियां पढ़ने के बाद पूरा गाना सुनने का मन कर रहा है न? हो भी क्यों न? ये गाने दशकों से हमारे दिल और दिमाग पर छाए हुए हैं। इन्हें हम कहीं भी सुन लें तो बिना गुनगुनाए नहीं रह सकते। कानों में मिश्री का मीठा रस घोल देने वाले ऐसे कई गाने हमें महान गायक और संगीतकार ओपी नैय्यर ने दिए हैं। हिंदी सिनेमा और संगीत में ओपी नैय्यर बहुत बड़ा नाम है। उनका जन्म पाकिस्तान के लाहौर में 16 जनवरी साल 1926 को हुआ था। वैसे तो ओपी नैय्यर से जुड़ी कई कहानियां हैं, लेकिन आज उनके जन्मदिवस पर चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद खास किस्सा...
OP Nayyer: ओपी नैय्यर ने क्यों खाई थी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं करने की कसम? चौंका देगा पूरा मामला
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ओपी नैय्यर को संगीत की दुनिया का बादशाह कहा जाए तो कोई हर्ज नहीं होगा। उनके संगीत और ताल ने बॉलीवुड की फिल्मों में ऐसी छाप छोड़ी है कि संगीत प्रेमी उनके आज भी मुरीद हैं। ओपी नैय्यर अपने जमाने के सबसे महंगे संगीतकार थे। वहीं, स्वर कोकिला दिवंगत लता मंगेशकर के सुरों का जादू भी हर तरफ बिखरा हुआ था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि संगीत का अपार ज्ञान रखने वाले दो महान गायकों के सुर-ताल कभी एक नहीं हुए। लता मंगेशकर को सुर साम्राज्ञी कहा जाता था। बड़े से बड़े संगीतकार लता मंगेशकर के साथ काम करने के लिए बरसो इंतजार करते थे, लेकिन ओपी नैय्यर ने कसम खा रखी थी कि वह लता मंगेशकर के साथ कभी गाना नहीं गाएंगे और न ही उनसे कभी अपना गाना गाने के लिए कहेंगे। लेकिन ऐसा क्या हुआ था ओपी नैय्यर और लता मंगेशकर के बीच कि दोनों ने कभी एक साथ काम नहीं किया?
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दरअसल, ओपी नैय्यर 50 और 70 के दशक में अपने संगीत के दम पर कई फिल्मों को सुपरहिट करवाने और अपनी ही शर्तों पर काम करने के लिए मशहूर थे। उन्हें जिद्दी किस्म का इंसान भी कहा जाता था। अपने काम को लेकर वह बहुत अडिग रहते थे और बहुत जल्दी ही गुस्सा हो जाते थे। बस यही वजह बन गई लता मंगेशकर से उनकी लड़ाई की। दरअसल, यह मामला है फिल्म 'आसमान' के समय का। उस वक्त लता मंगेशकर की आवाज का जादू हर किसी के सिर चढ़ा हुआ था। 'आसमान' में सहनायिका के किरदार के लिए ओपी नैय्यर ने एक गाना लिखा और चाहते थे कि लता मंगेशकर इस गाने को अपनी आवाज दें। जब यह बात लता मंगेशकर के कानों तक पहुंची तो उन्हें यह अच्छा नहीं लगा। उन्हें यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया, क्योंकि उस समय कि वह एक बड़ी गायिका थीं और यह नहीं चाहती थीं कि वह मुख्य नायिका की जगह किसी सहनायिका के लिए गाना गाए।
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लता मंगेशकर ने वह गाना गाने से इनकार कर दिया। बस यही बात ओपी नैय्यर को चुभ गई। उन्होंने उसी वक्त एलान कर दिया कि वह लता मंगेशकर के साथ कोई गाना नहीं बनाएंगे और इस तरह एक महान गायक और संगीतकार की जोड़ी बनते बनते रह गई। हालांकि, मीडिया के सामने कभी उन दोनों ने अपने लड़ाई की बात को नहीं माना, लेकिन उनके बीच के मतभेद के किस्से बहुत मशहूर हुए। 1990 में जब ओपी नैय्यर को 'लता मंगेशकर अवॉर्ड' के लिए चुना गया तो उन्होंने इस अवॉर्ड को भी लेने से मना कर दिया था।
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