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लता मंगेशकर को दुश्मन मानते रहे संगीतकार ओपी नैयर, जिंदगी में नहीं गवाया उनसे कोई गाना
Wed, 16 Jan 2019 07:23 AM IST
विजय जैन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 16 Jan 2019 07:23 AM IST
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op nayyar
- फोटो : social media
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हिंदी सिनेमा और संगीत में ओपी नैयर काफी बड़ा नाम है। उनका जन्म पाकिस्तान के लाहौर में 16 जनवरी साल 1926 को हुआ था। ओपी नैयर को संगीत की दुनिया का बदशाह कहा जाए तो कम नहीं होगा। उनके संगीत और ताल ने बॉलीवुड की फिल्मों में ऐसी छाप छोड़ी की संगीत प्रेमी उनके आज भी मुरिद हैं।
OP Nayyar
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ओपी नैयर ने 1952 में फिल्म 'आसमान' से अपना करियर शुरू किया था, लेकिन उनको राष्ट्रीय पहचान मिली थी गुरुदत्त की फिल्मों 'आरपार', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'सी आई डी' और 'तुम सा नहीं देखा' से। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अपने संगीत से दर्शकों के दिलों को जीता और बड़े संगीतकार के रूप में पहचाने जाने लगे।
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बताया जाता है कि ओपी नैयर की जोड़ी हिंदी की मशहूर गायिका शमशाद बेगम के साथ काफी जमी। ओपी नैयर और शमशाद बेगम ने 'कभी आर कभी पार', 'ले के पहला पहला प्यार', 'कजरा मोहब्बत वाला' और 'कहीं पे निगाहें कही पे निशाना' जैसी कई सुपरहिट और सदाबहार गाने गाए। दर्शक आज भी उनके इन गानों के दीवाने हैं।
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हैरान करने वाली बात है कि ओपी नैयर अपने समय के दिग्गज संगीतकार में से एक थे, लेकिन वह लता मंगेशकर से कभी गाना नहीं गवाते थे। गौरतलब है कि नैयर साहब के हिसाब से लता की आवाज उनके संगीत के मुताबिक नहीं थी। ये उस समय की बात है जब हर छोटे से बड़ा संगीतकार लता को अपने संगीत के लिए सफलता की गारंटी मानते थे।
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बताया जाता है कि ओपी नैयर साहब ने अपने संगीत में तांगे की आवाज को बेहद शानदार अंदाज में इस्तेमाल किया था। आगे जाकर यही तांगे की आवाज उनके संगीत का सिग्नेचर मार्क भी बन गया। वह जल्द गुस्सा भी हो जाते थे। ओपी नैयर एक बार मशहूर गायक मोहम्मद रफी के सिर्फ देर से आने की वजह से उन्होंने रफी की जगह गाना गवाने के लिये दूसरे गायक को चुन लिया था।