फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कभी पाकिस्तानी सिनेमा में चलता था इस निर्देशक का सिक्का, आज खाना बेचने के लिए मजबूर है बेटी

Sat, 07 Dec 2019 12:27 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: anand anand Updated Sat, 07 Dec 2019 12:27 PM IST
विज्ञापन
Pakistani filmmaker MA Rashid Daughter obligated to offer meals by road
Rafia Rashid, MA Rashid - फोटो : social media

पाकिस्तान के मशहूर फिल्मकार एमए राशिद की बेटी राफिया खराब आर्थिक हालातों से जूझ रही हैं। 55 साल की राफिया राशिद इस्लामाबाद के करीब एक गांव में किराए के मकान में रहती हैं और वह रोड के किनारे एक ढाबा चलाने को मजबूर हैं। उन्होंने अपनी आपबीती पाकिस्तान की न्यूज साइट से बात करने के दौरान सुनाई। इस न्यूज स्टोरी में आप भी जानिए राफिया के बारे में...

Pakistani filmmaker MA Rashid Daughter obligated to offer meals by road
Rafia Rashid - फोटो : social media

एक इंटरव्यू के दौरान राफिया ने कहा, 'इसे मेरी नियति कहें या एक दौर, लेकिन जब मैं छोटी थी तो मेरे पिता पाकिस्तानी फिल्मों के राजा थे। एमए राशिद का नाम संघर्ष का गोल्ड टिकट माना जाता था। मुझे याद है जब मैं अपने पिता के साथ शूटिंग के सेट पर जाती थी तो सभी प्रोड्यूसर और निर्देशक मुझे बहुत प्यार करते थे। सभी मुझे अपने कंधे पर घूमाते थे। हम सभी बहुत खुश थे, लेकिन जब मेरे पिता का इंतकाल हो गया है तो मेरी जिंदगी बहुत बुरी हो गई। राफिया ने आगे कहा है कि एक समय वह ब्रिटेन में रहती थीं, लेकिन पिता को पाकिस्तान वापस आने के लिए मजबूर होने पड़ा था। उन्होंने कहा, मैं बहुत अमीर महिलाओं में से एक थी,लेकिन आज का सच ये है कि मैं इस रास्ते पर हूं। मैंने भीख नहीं मांगीं क्योंकि मैं बहुत बड़े शख्स के बेटी हूं। मैं अपनी जिंदगी बिताने के लिए खाना बेचती हूं। भले ही यह कुछ हो, लेकिन आसान है।'

Pakistani filmmaker MA Rashid Daughter obligated to offer meals by road
Rafia Rashid, MA Rashid - फोटो : social media

रफिया कहती हैं कि जिंदगी के इस दौर में उनके पास अपने सिर को ऊंचा रखने और शक्तिशाली बने रहने के अलावा कोई चारा नहीं हैं। उन्होंने अपने बेटे और डिप्रेशन से जूझ रही बेटी की इकलौती सहारा हैं। वह कहती हैं, 'मैंने बेटी के इलाज के लिए अपनी पूरी संपत्ति बेच दी। पूरी जमा पूंजी खर्च कर दी। मुझे किराया और बिल चुकाने के साथ खाने का इंतजाम भी करना होता है। ये भूलना नहीं चाहिए कि पुरुष-प्रधान समाज में महिलाओं का काम करना आसान नहीं है। ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनसे मुझे निपटना होता है। लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी ऐसी ही है।'

विज्ञापन
विज्ञापन
Pakistani filmmaker MA Rashid Daughter obligated to offer meals by road
Rafia Rashid - फोटो : social media

रफिया को पाकिस्तानी सरकारा से भी काफी गिला है। वह कहती हैं कि सरकारी मदद की कमी से बेहद तकलीफ होती है। रफिया के अनुसार,सरकार ने उन्हें और उनके परिवार को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। जबकि उनके पिता ने पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री में इतना बड़ा योगदान दिया। रफिया कहती हैं, 'जब मैं इस बारे में सोचती हूं तो बहुत बुरा लगता है। हमारे देश में कलाकारों और उनके परिवारों को किसी तरह की सहायता नहीं दी गई है।'

विज्ञापन
Pakistani filmmaker MA Rashid Daughter obligated to offer meals by road
Rafia Rashid - फोटो : social media

बता दें कि पाकिस्तानी फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन (पीएफडीए) के चेयरमैन चौधरी एजाज कामरान ने वादा किया है कि वह रफिया और उनके बच्चों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। चौधरी एजाज कामरान ने कहा, 'एमए रशीद हमारी फिल्म इंडस्ट्री के शाइनिंग स्टार थे। हम उनके परिवार की मदद के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।' गौरतलब है कि रफिया के पिता एमए रशीद पाकिस्तानी सिनेमा के दिग्गज लेखक, निर्देशक और निर्माता थे। उन्हें करीब 50 साल तक पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री में काम किया। उन्हें व्यापक रूप से पाकिस्तानी सिनेमा के स्वर्णिम युग के एक अभिन्न खिलाड़ी के रूप में माना जाता है। 


पढ़ें: EXCLUSIVE: अमिताभ बच्चन लेकर आ रहे ये अनूठा हॉरर शो, आपके मोबाइल पर होगा प्रीमियर
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed