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Pankaj Tripathi: जहां की प्राइमरी की पढ़ाई, वहां पहुंचे पंकज, पिताजी के नाम बने ट्रस्ट से बदला स्कूल का नक्शा
ओटीटी के आने के बाद से देश दुनिया में खूब मशहूर हो चुके अभिनेता पंकज त्रिपाठी का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा है। अपनी पत्नी के साथ मुंबई में बिताए शुरुआती दिनों का तो जिक्र वह अपनी संघर्ष यात्रा में अक्सर करते ही हैं, वह यह भी कहते हैं कि उनके शुरुआती संस्कार ऐसे रहे हैं जिन्होंने उन्हें कभी मुश्किलों से मुंह नहीं मोड़ने दिया। पंकज अब अपनी शोहरत और अपनी कमाई का उपयोग अपने जैसे ही उन गांव के बच्चों का भविष्य बनाने में कर रहे हैं जिन्हें पढ़ाई की बुनियादी सुविधाएं भी मुश्किल से मिल पाती हैं। पंकज ने अपने गांव के सरकारी स्कूल की शक्ल बदल दी है और अब वह वहां एक पुस्तकालय खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं।
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पंकज त्रिपाठी बताते हैं "हमारे गोपालगंज जिला प्रशासन ने गोपालगंज गौरव ऐप नाम से एक ऐप बनाया है। इसके लिए एक बैठक आयोजित की गई जिसमें हिस्सा लेने के लिए प्रशासन ने उन सभी लोगों न्यौता भेजा जो गोपालगंज के हैं, कहीं दूसरे शहर में रहते हैं और अपने गांव या जिले के लिए समाज सेवा की गतिविधियां करना चाहते हैं। मुझे इसका पा चला तो मैं भी बैठक में मौजूद रहा। मुझे लगा कि यह एक अच्छी पहल है।”
बैठक के दो महीने बाद पंकज त्रिपाठी को उस स्कूल के प्रधानाचार्य ने मिलने के लिए बुलाया जहां से उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। प्रधानाचार्य ने कहा कि उन्हें स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए एक चारदीवारी और गेट बनाने के लिए धन की आवश्यकता है क्योंकि स्कूल के ठीक बाहर एक सड़क है और बच्चे सड़क पर दौड़ते रहते हैं। अपने स्कूल की मदद के लिए पंकज त्रिपाठी इसके बाद तुरंत तैयार हो गए और उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ इसकी पूरी योजना बनाई और पैसों का इंतजाम किया।
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पंकज त्रिपाठी बताते हैं, "इसके बाद जब मैंने गांव का दौरा किया तो मैं स्कूल भी गया। मैंने देखा कि स्कूल के कुछ हिस्सों का प्लास्टर गिर रहा था, रंग फीके पड़ गए थे, रोशनी और पंखे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। मुझे लगा कि यह भी किया जाना चाहिए। तब मैंने अपने पिता पंडित बनारस तिवारी के नाम से बने ट्रस्ट के जरिये स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने और उसको उन्नत करने की पहल की। मैंने भी इसी स्कूल में पढ़ाई की थी। उम्मीद यही है कि शिक्षा का बुनियादी ढांचा ठीक होने से आसपास के बेटे बेटियां भी पढ़ाई में रुचि दिखाएंगे।"
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प्राथमिक विद्यालय (पहले और बाद में)
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पंकज त्रिपाठी ने इस पूरे काम में उस पेंट कंपनी का भी सहयोग लिया जिसके वह वह ब्रांड एंबेसडर हैं। इस कंपनी ने स्कूल का रंग रोगन कराने के अलावा जरूरी बिजली के उपकरण भी यहां लगवाए। पंकज ने स्कूल को बिजली आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वहां सौर पैनल भी स्थापित कराए हैं। इसके बाद पंकज की मंशा यहां एक पुस्तकालय बनाने की है।
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