अमिताभ बच्चन की फिल्म 'जंजीर' हिट होने से पहले भी 'आनंद' और 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्में कामयाब रही हैं। 'सात हिंदुस्तानी' से लेकर 'जंजीर' तक अमिताभ बच्चन ने ऐसा नहीं कि मेहनत नहीं की। वह अपनी तमाम फिल्मों के किरदारों के लिए दर्शकों की तालियां बटोर चुके थे, लेकिन बस मामला जमा नहीं। जिन रविकांत नगाइच ने फिल्म 'फर्ज' से जीतेंद्र को स्टार बना दिया। फिल्म 'कीमत' से धर्मेंद्र का नाम चर्चा में ला दिया और फिल्म 'सुरक्षा' से मिथुन चक्रवर्ती को पहली कतार के सितारों में खड़ा कर दिया, उन्हीं रविकांत नगाइच की एक फिल्म में अमिताभ बच्चन ने भी काम किया। इस फिल्म के संवाद लिखे मशहूर रेडियो आर्टिस्ट विश्वामित्र आदिल ने।
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विश्वामित्र आदिल का नाम हर वह शख्स जानता पहचानता है जिसने 70 के दशक में विविध भारती पर प्रायोजित कार्यक्रम 'इंस्पेक्टर ईगल' सुना है। ईगल फ्लास्क के लिए बना ये कार्यक्रम इतना हिट हुआ और लोग इतनी बेसब्री से इसका इंतजार करते थे कि बाद में विश्वामित्र आदिल ने इस पर एक फिल्म भी बना डाली। ये वो दौर था जब रेडियो पर प्रायोजित कार्यक्रमों की भरमार हुआ करती थी, जैसे 'मोदी के मतवाले राही', 'बिनाका गीतमाला', 'एस कुमार्स का फिल्मी मुकदमा' आदि। इंडिया टीवी पर प्रसारित होने वाला कार्यक्रम 'आपकी अदालत' दरअसल 'एस कुमार्स का फिल्मी मुकदमा' का ही टीवी रूपातंरण है। विश्वामित्र आदिल ने सिनेमा में भी खूब नाम कमाया और 'हाउस नं. 44', 'शारदा', 'आशिक', 'आरती', 'शागिर्द', 'फर्ज', 'प्यार की कहानी', 'छोटी बहू' और 'कीमत' जैसी फिल्मों के संवाद लिखे। 'आरती' और 'छोटी बहू' की तो पटकथा भी आदिल की ही लिखी हुई है।
अमिताभ बच्चन के दाहिना हाथ की लकीरें अक्सर उनके पुराने चित्रों में दिख जाती हैं। तमाम ज्योतिषियों ने तो खैर उनकी भाग्य रेखा देखकर ये कहा ही था, खुद शो मैन राजकपूर ने ये भविष्यवाणी की थी कि ये लड़का एक दिन बहुत बड़ा सुपरस्टार बनेगा। रविकांत नगाइच की फिल्म में अमिताभ बच्चन की हीरोइन थी काजोल की मां तनुजा और इस फिल्म से पहले ही तनुजा को भी लगा था कि ये हैंडसम हंक एक दिन जरूर बड़ा स्टार बनेगा। तनुजा की अमिताभ से पहली मुलाकात के किस्से से पहले वो किस्सा जो राज कपूर से जुड़ा है। ये तो आपको पता ही है कि अमिताभ बच्चन की फिल्म 'जंजीर' और ऋषि कपूर की फिल्म 'बॉबी' का फिल्मफेयर अवार्ड्स में कड़ा मुकाबला हुआ और बेस्ट एक्टर का पुरस्कार ऋषि कपूर ने उस साल कथित रूप से खरीद लिया था। दोनों फिल्मों की शूटिंग आर के स्टूडियो में ही चला करती थी और अमिताभ अक्सर चुपके चुपके ऋषि कपूर की एक्टर बनने के लिए होने वाली ट्रेनिंग देखा करते थे।
उसी आर के स्टूडियो में एक दिन हुआ यूं कि फिल्म 'जंजीर' की शूटिंग एक फ्लोर पर चल रही थी और दूसरे फ्लोर पर राज कपूर खड़े होकर अपनी फिल्म 'बॉबी' की लाइटिंग करवा रहे थे। दोनों स्टूडियो के बीच के दरवाजे शायद खुले रह गए या कुछ और किसी तरह राज कपूर के कानों में अमिताभ बच्चन की आवाज पड़ गई। उस दिन वह फिल्म 'जंजीर' का वही सीन शूट कर रहे थे जिसमें प्राण के पुलिस स्टेशन आने और कुर्सी खींचकर बैठने की कोशिश करने पर अमिताभ बच्चन कुर्सी को लात मार देते हैं। इस सीन में उनका संवाद था, 'जब तक बैठने को न कहा जाए, शराफत से खड़े रहो। ये पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं।' अमिताभ बच्चन पर साल 2001 में जी न्यूज के लिए मैंने एक एक डॉक्यूमेंट्री बनाई। इस डॉक्यूमेंट्री के लिए प्रकाश मेहरा का भी इंटरव्यू हुआ। इसी इंटरव्यू में प्रकाश मेहरा ने बताया था इस किस्से के बारे में। वह कहते हैं, 'अमित की आवाज सुनने के बाद राज जी ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और पूछा कि ये कौन लड़का है। मैंने बताया कि एक नया हीरो है और बहुत मेहनत कर रहा है। राज जी बोले कि इस लड़के की आवाज में बहुत दम है। ये एक दिन बहुत बड़ा स्टार बनेगा।'
राज कपूर ने अमिताभ बच्चन की आवाज में जो दम देखा उससे कोई तीन साल पहले तनुजा ने अमिताभ बच्चन की आभा देखी और उसमें खो गईं। हुआ यूं कि उन दिनों मुंबई में एक ब्लो अप नाम का डिस्कोथेक हुआ करता था। वहीं अमिताभ को पहली बार तनुजा ने देखा। उनको लगा कि ये लड़का इतना हैंडसम है, इसे तो फिल्मों में होना चाहिए। और, संयोग देखिए हफ्ते दो हफ्ते बाद ही अमिताभ बच्चन एक दिन तनुजा के सामने खड़े थे फिल्म प्यार की कहानी में उनके हीरो बनकर। तनुजा को पहली बार तो यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा सच में हो रहा है लेकिन फिर जब रविकांत नगाइच ने अपने इस नए हीरो से अपनी हीरोइन का परिचय कराया तो समझ आया कि दोनों को एक साथ काम करना है। लेकिन अमिताभ बच्चन और तनुजा का साथ काम करने का ये संयोग भी भाग्य की ही देन रही।