आप आज भी रूस चले जाइए, किसी सड़क के किनारे आपको कोई व्यक्ति राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ का गीत गुनगुनाता हुआ मिल जाएगा। साथ ही अगर आप राज कपूर पर उनसे बात करेंगे तो वह घंटाें उनकी फिल्मों पर चर्चा कर लेंगे। ऐसा इसलिए हैं कि रूसी लोग आज भी राज कपूर के अभिनय और उनकी फिल्मों के दीवाने हैं। यह दीवानगी कैसे शुरू हुई? इसके पीछे क्या कारण रहे? इसी बारे में विस्तार से जानिए।
Raj Kapoor 100th Anniversary: फिल्म ‘आवारा’ से रूसी दर्शकों को हुआ प्यार, राज कपूर बन गए सबसे चर्चित सितारे
14 दिसंबर को हिंदी सिनेमा के शो मैन कहे जाने वाले अभिनेता राज कपूर की 100वीं जयंती है। इस मौके पर एक फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कपूर परिवार द्वारा किया गया है, जिसमें फिल्म ‘आवारा’ भी दिखाई जाएगी। यह वही फिल्म है, जिसके कायल रूसी दर्शक आज तक हैं।
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शीत युद्ध का समय-‘आवारा’ की दस्तक
साल 1945 में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ, इस युद्ध में कई बड़े देश शामिल थे, जिनमें से रूस भी एक था। इस युद्ध के कारण रूसी लोगों ने काफी कुछ खोया, साथ ही युद्ध का मनोवैज्ञानिक असर भी उनके जीवन पर हुआ। इसी के साथ रूस और अमेरिका के बीच कोल्ड वॉर यानी शीत युद्ध भी छिड़ गया, यह एक तरह का वॉर है लेकिन सीधा ना लड़कर, राजनीतिक तरीकों से लड़ा जाता है। ऐसे में रूसी लोगों के जीवन में एक तरह की निराशा मौजूद रहने लगी। साथ ही देश कई तरह की समस्याओं का भी सामना कर रहा था, जिसमें गरीबी,असमानता जैसी बातें शामिल थी। ऐसे में फिल्म ‘आवारा (1951)’ साल 1954 में रूस में रिलीज हुई। फिल्म देखकर रूसी दर्शक इसके दीवाने हो गए। यह फिल्म उनके जीवन में एक आशा की किरण बनकर आई, जिसने पल भर के लिए सही उनके मन को खुशी से भर दिया। रूसी दर्शक फिल्म ‘आवारा’ के गीत ही गुनगुनाते हुए नजर आने लगे। इसे इस तरह से भी देख सकते हैं कि मुश्किल समय में एक फिल्म ने उन्हें खुश होने का मौका दिया, अपनी परेशानियों को भूला देने का मौका दिया। यही बातें फिल्म ‘आवारा’ की सफलता का कारण बनीं।
क्लास सिस्टम पर बात करती है फिल्म
एक बात और फिल्म ‘आवारा’ को खास बनाती है। इसमें वर्ग भेद यानी क्लास सिस्टम पर भी बात की गई है। यह बात हमारे देश में जितनी सटीक बैठती है, उतनी ही रूस की उस समय की मौजूदा परिस्थतियों से भी मेल खाती थी। वहां भी कहीं ना कहीं वर्ग भेद की समस्या मौजूद थी, अमीर और गरीब के बीच का अंतर बहुत अधिक था। साथ ही राज कपूर की फिल्मों में जो आशावाद होता था, वह भी रूसी दशकों को पसंद आता है। राज कपूर की फिल्म का हीरो कई तरह की मुश्किलों का सामना करता है, लेकिन आखिर में जीत उसकी ही होती है।
रोमांस के भी हुए कायल रूसी
फिल्म ‘आवारा’ का विषय तो रूसी दर्शकों को पसंद आया ही था। इसके अलावा नरगिस और राज कपूर के बीच का रोमांस भी रूसी लोगों को भा गया। वह नरगिस और राज कपूर के अभिनय, उनके रोमांटिक स्टाइल के कायल हो गए। रूस में तो नरगिस और राज कपूर को लव सिंबल मान लिया गया।
राज कपूर की फिल्में बनी भारत की सॉफ्ट पावर
राज कपूर की फिल्मों को रूसी दर्शक आज भी उतना प्यार देते हैं, जितना उनके समय में देते थे। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने भी फिल्मों की सॉफ्ट पावर, दुनिया भर में उसके असर पर बात की। साथ ही यह भी बताया कि कैसे राज कपूर की फिल्मों ने इस काम में सबसे अधिक योगदान दिया है। राज कपूर की फिल्में दुनिया में, रूस में भारत की सॉफ्ट पावर बनीं। इनके जरिए दुनिया में भारत की सकारात्मक छवि को गढ़ने में मदद मिली।
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