हिंदी सिनेमा के शो मैन कहे जाने वाले राज कपूर को कौन नहीं जानता। वह सिर्फ एक्टर-डायरेक्टर, प्रोड्यूसर ही नहीं थे बल्कि सिनेमा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाले उन लोगों में से थे, जिन्होंने उस समय आगे के सिनेमा को भांप लिया था। 24 साल की छोटी सी उम्र से फिल्मों के निर्माण का काम अपने हाथ में लेने वाले राज कपूर के लिए आज भी कहा जाता है कि वह जो भी करते थे उसके पीछे कुछ न कुछ कारण होता था। उनके सिनेमाई प्रयोगों का ही नतीजा था कि उन्होंने उस जमाने में 'बॉबी', 'मेरा नाम जोकर', 'राम तेरी गंगा मैली' जैसी फिल्में बना दी थी। लेकिन इस दिग्गज फिल्मकार ने 2 जून,1998 को हिंदी सिनेमा को अलविदा कह दिया था। भारतीय सिनेमा को एक अलग मुकाम पर पहुंचाने वाले राज कपूर सिर्फ भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी काफी पॉपुलर थे। भारत-पाकिस्तान दो ऐसे देश, जिनके बीच तनाव की बात कोई नई नहीं है। लेकिन बॉलीवुड में ऐसी हस्तियां हैं और थीं जिनका पाकिस्तान की सरजमीं से एक अलग ही रिश्ता है। ऐसे ही सितारों में से एक थे राज कपूर। आज उनकी 35वीं पुण्यतिथि पर हम राज कपूर के पाकिस्तानी कनेक्शन के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।
Raj Kapoor Death Anniversary: क्या है राज कपूर और पाकिस्तान का नाता? पढ़िए इतिहास
पाकिस्तान में था राज कपूर का आशियाना
राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर जब फिल्मों में आए तो वो खुद को पेशावर का 'हिंदू पठान' कहते थे, जिसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण था। वह पाकिस्तान में जन्मे थे और राज कपूर का जन्म भी पेशावर के किस्सा ख्वानी इलाके में हुआ था। उनका बचपन वहां की गलियों में गुजरा था। राज कपूर के पुश्तैनी घर को "कपूर हवेली" के नाम से जाना जाता है। इस तीन मंजिला हवेली का निर्माण राज कपूर के दादा दीवान बशेस्वरनाथ कपूर ने 1918-22 के दौरान कराया था। लेकिन सन 1930 में कपूर परिवार मुंबई आ गया था, जिसके बाद वह कभी-कभी पेशावर जाते थे। लेकिन विभाजन के बाद यह सिलसिला भी बंद हो गया था।
पाकिस्तानी सरकार ने खरीदा बंगला
पाकिस्तान के राज्य खैबर पख्तूनख्वा की सरकार ने पिछले साल कानूनी तरीके से राज कपूर का घर 1.50 करोड़ रुपये में खरीद लिया था। गौरतलब है कि विभाजन के समय से बंद पड़ी उस हवेली की हालत बहुत जर-जर हो चुकी थी, लेकिन काफी समय से इनके संरक्षण मांग की जा रही थी। इतनी मांग करने के बाद जब हवेली सरकार के संरक्षण में आई तो उसने इसे पर्यटन को बढ़ावा देने के की कोशिश में म्यूजियम में बदलने का फैसला किया था।
पाकिस्तानी सैनिकों ने राज कपूर को खिलाई जलेबी
वर्षों पहले पाकिस्तान छोड़ चुके राज कपूर की पॉपुलैरिटी वहां के लोगों के बीच अभी भी कम नहीं हुई थी। गौरतलब है जब राज कपूर अपनी बेहतरीन फिल्मों में से एक 'बॉबी' की शूटिंग के लिए कश्मीर गए थे, तो उस दौरान राज साहब का मन हुआ कि वह भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात सैनिकों से मिलने जाएं। वायरलेस पर जानकारी मिलने की वजह से वहां सैनिकों ने पहले ही चाय-पकौड़ों का इंतजाम कर रखा था। राज कपूर ने चाय की चुस्कियां लेते हुए पकौड़ों का आनंद लिया और जब वह चलने लगे तब पाकिस्तानी सैनिकों से भरी जीप वहां पहुंची। पाकिस्तानी सैनिकों ने राज साहब को वहां की जलेबियां खिलाई, जिन्हें खा वह भावुक हो गए थे। वो कहते हैं न बचपन का लगाव कभी खत्म नहीं होता। राज कपूर जैसी शख्सियत पर जितना हक भारत का था शायद उतना ही पाकिस्तान का भी था।

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