आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से पाश्चात्य संगीत और भारतीय आधुनिक संगीत के प्रति वशीभूत होती दिख रही है, उससे कहीं न कहीं शास्त्रीय संगीत की महत्ता कम होती जा रही है। आज की युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत के प्रति जागरूक करने के लिए मुंबई में मकर संक्रांति के अवसर पर मुंबई संस्कृति महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है जिसमें भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
Sanskriti Festival: मकर संक्रांति पर मुंबई में लगेगा संगीत का मेला, इन दिग्गज कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियां
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मकर संक्रांति के अवसर पर इंडियन हेरिटेज सोसायटी द्वारा आयोजित मुम्बई संस्कृति महोत्सव के दौरान भारतीय शास्त्रीय संगीत की दिग्गज हस्तियां मुंबई के फोर्ट स्थित हेरिटेज टाउन हॉल में परफॉर्म करेंगी। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य भारतीय समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में लोगों में जागरुकाता लाना और उनके संरक्षण, संवर्धन और पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबद्ध करना है ताकि भविष्य में नई पीढ़ी को इसकी अहमियत का पता चल सके।
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मकर संक्रांति के अवसर पर मुम्बई संस्कृति महोत्सव का आयोजन 13 और 14 जनवरी को होगा। इस अवसर पर राकेश चौरसिया, विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे और पंडित संजीव अभ्यंकर जैसे भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज अपनी प्रस्तुतियां देंगे। बांसुरी वादक राकेश चौरसिया जाने-माने बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया के भांजे हैं। अश्विनी भिड़े देशपांडे जयपुर-अत्रोली घराने से ताल्लुक रखने वाली हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका हैं और पंडित संजीव अभ्यंकर मेवाती घराने से ताल्लुक रखने वाले शास्त्रीय गायक हैं।
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इस कार्यक्रम के दौरान बांसुरी वादक राकेश चौरसिया शास्त्रीय संगीत संग अपनी जुगलबंदी के माध्यम से अपनी मनमोहक प्रस्तुति देंगे, जिसके माध्यम से श्रोता फ्यूजन और लोक संगीत के अद्भुत संगम का लुत्फ उठा सकेंगे। वह कहते हैं, 'यह एक ऐसा महोत्सव है जो हमारी विरासत का एक अहम हिस्सा रहे शास्त्रीय संगीत को एक अनोखा मंच प्रदान करेगा। यह एक ऐसी अनूठी पहल है, जिसका न सिर्फ विविध प्रकार के श्रोता आनंद उठा सकेंगे, बल्कि इससे भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा और भी समृद्ध होगी।'
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विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे और पंडित संजीव अभ्यंकर की प्रस्तुतियों पर भी श्रोताओं की नजरें टिकी हैं। अश्विनी भिड़े देशपांडे कहती हैं, 'विरासत महज ठहरी हुई वास्तुकला के जरिए खुद को बयां नहीं करती हैं, बल्कि वह शास्त्रीय संगीत के जरिए भी जीवंत हो उठती है। पंडित संजीव अभ्यंकर कहते हैं, 'भक्ति भी एक तरह से धरोहर का ही हिस्सा है। मुंबई संस्कृति महोत्सव का मूल उद्देश्य है वैश्विक शांति का संदेश फैलाना। इस आयोजन के दौरान बांसुरी, तबला, मृदंग, सितार, हारमोनियम, पखवाज, गिटार जैसे विविध तरह के वाद्यों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे महोत्सव में एक अलग तरह की सांस्कृतिक छटा देखने को मिलेगी।'
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