कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का सबसे बड़ा प्रयोग हिंदी सिनेमा में अगर आपको हालिया रिलीज फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ में अमिताभ बच्चन की जवानी के दिनों की तस्वीर दिखाने में ही महसूस हो रहा है तो तैयार हो जाइए तकनीक के नए आविष्कार ‘ब्रह्मा’ का असली खेल देखने के लिए। बहुराष्ट्रीय कंपनी डीएनईजी (पूर्व में डबल निगेटिव) की तकनीकी शाखा ‘ब्रह्मा’ ने ‘जीवा’ नामक एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो किसी भी इंसान के चेहरे की फोटो हासिल करने के बाद उसके नए अंग प्रत्यंग सहित स्पेशल इफेक्ट्स से उसका पूरा नया शरीर परदे पर विकसित कर सकता है।
Ramayan: ‘रामायण’ बना रही कंपनी में अरब देश से मोटा निवेश, जानिए किस तकनीक से बन रही रणबीर की फिल्म
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निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ इसी जीवा तकनीक से बन रही है और इस तकनीक को और विकसित करने के लिए अबू धाबी के एक बड़े समूह ने 200 मिलियन डॉलर यानी करीब 1670 करोड़ रुपये का निवेश करने का फैसला किया है। लंदन स्थित कंपनी डीएनईजी का दुनिया भर में अपने स्पेशल इफेक्ट्स को लेकर सिनेमा में काफी दबदबा रहा है। भारतीय कंपनी प्राइम फोकस ने इसका अधिग्रहण किया था और अब एक तरह से इसका स्वामित्व भारतीय अधिकारी नमित मल्होत्रा के पास ही है। नमित मल्होत्रा ही फिल्म ‘रामायण’ के निर्माता है।
डीएनईजी को ये 1670 करोड़ रुपये अबू धाबी के बड़े निवेशकर्ता यूनाइटेड अल साकेर समूह (यूएएसजी) ने दिए हैं। और, इस निवेश के बाद डीएनईजी की नेट वैल्यू बढ़कर दो अरब डॉलर यानी कि करीब 167 अरब रुपये हो चुकी है। डीएनईजी ने कृत्रिम मेधा पर काम करने वाली अपनी कंपनी ब्रह्मा को लेकर हाल ही में कुछ विशेष परिणाम हासिल किए हैं। इस कंपनी के अलावा डीएनईजी समूह अपनी कंपनी डीएनईजी के जरिये विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन का बड़ा काम करता रहा है। जिन हालिया रिलीज फिल्मों में इस कंपनी ने अपने काम की गुणवत्ता से सबको प्रभावित किया है, उनमें ‘ड्यून’, ‘ओपनहाइमर’, ‘इंटरस्टेलर’, ‘टेनेट’ और ‘ब्लेड रनर 2049’ जैसी फिल्में शामिल हैं। फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ की सहनिर्माता भी डीएनईजी है।
डीएनईजी समूह ने नई बौद्धिक संपदा विकसित करने और इसमें निवेश करने का काम प्राइम फोकस स्टूडियोज के पास रखा है। ये कंपनी भी ‘द गारफील्ड मूवी’ की निर्माता कंपनियों में शामिल है। और, इन दिनों ‘एनीमल फ्रेंड्स’, ‘रामायण’ और ‘एंग्री बर्ड्स मूवी 3’ पर काम कर रही है। डीएनईजी और यूएएसजी के बीच जिस तकनीक को विकसित करने के करार पर हस्ताक्षर के बाद इतनी मोटी रकम की डील हुई है, उससे सबसे बड़ा और सीधा फायदा नितेश तिवारी की ‘रामायण’ को ही मिलने वाला है। जानकारी के मुताबिक ये एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी कलाकार के पूरे शरीर की स्कैनिंग हो जाने के बाद मर्जी के मुताबिक उनको लेकर नए दृश्य रचे जा सकते हैं। कंपनी ने खुद अपने बयान में भी कहा कि ये नया निवेश प्राइम फोकस स्टूडियोज को अपने नई उच्च स्तरीय सामग्री को विकसित करने में मुख्य रूप से मदद करेगा।
डीएनईजी चेयरमैन और सीईओ नमित मल्होत्रा ने इस नए रिश्ते को सिनेमा में तकनीक के विकास की एक नई बुनियाद बताया है। जल्द ही कंपनी अपना एक अबू धाबी दफ्तर भी खोलने की तैयारी में हैं। जहां इस नए करार के तहत बनने वाली मनोरंजन सामग्री के निर्माण, भंडारण और वितरण की व्यवस्था की जाएगी। इस नए अनुबंध के बाद भी मल्होत्रा अपने पद पर काम करते रहेंगे। उनके साथ अब डीएनईजी के बोर्ड में यूएएसजी के नबील कोबेइस्सी और एडोयूआर्ड जार्ड भी बतौर निदेशक शामिल होंगे। नामा कैपिटल के प्रभु नरसिम्हन भी अब डीएनईजी के बोर्ड मेंबर होंगे और समूह की कंपनी ब्रह्मा के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे।
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