हिंदी सिनेमा में हीरोइन बनने के हर तयशुदा फॉर्मूले को ध्वस्त करने वाली अभिनेत्री रानी मुखर्जी बड़े परदे पर इस साल अक्टूबर में 25 साल पूरे कर लेंगी। आमतौर पर तो रानी दूसरों को सलाह देने से बचती हैं और अपने काम से ही काम रखती हैं लेकिन छोटे शहरों, कस्बों आदि से आने वाली उन लड़कियों को वह जरूर सतर्क करना चाहती हैं जिन्हें सिर्फ परदे के ग्लैमर के बारे में ही पता होता है। उनकी दो फिल्में इन दिनों रिलीज की कतार में हैं, ‘बंटी और बबली 2’ व ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’।
स्टार बनने का ख्वाब देखने वालों को रानी ने दिया गुरुमंत्र, बोलीं - इसलिए एक्टर बनना है तो स्वागत है
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इस बारे में उनसे बात चलने पर रानी मुखर्जी कहती हैं, “मेरी एकमात्र सलाह यही होगी कि फिल्म इंडस्ट्री में हीरोइन बनना आसान नहीं है। अदाकार बनना तो और भी मुश्किल काम है। यह बड़ा ही मुश्किल पेशा है क्योंकि एक बार जब आप स्टार के तौर पर स्थापित हो जाते हैं तो दर्शक आपसे ढेर सारी अपेक्षाएं करने लगते हैं। इसके अलावा अलग-अलग माहौल और परिस्थितियों में काम करना भी इतना आसान नहीं होता।”
रानी मुखर्जी की बतौर हीरोइन पहली फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ 25 साल पहले 1996 में 18 अक्टूबर को रिलीज हुई थी। तब तमाम लोगों ने यही कहा था कि इस लड़की का कोई भविष्य नहीं है। एक तो इसकी आवाज खरखराती है, दूसरे इसके नैन नक्श और ऊंचाई भी हीरोइन जैसी नहीं है। ‘अमर उजाला’ के फिल्म समीक्षक पंकज शुक्ल ने तब इस फिल्म की समीक्षा में लिखा था कि रानी मुखर्जी की ये अलग आवाज ही उन्हें एक दिन इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाएगी। और, रानी मुखर्जी ने अपनी अगली ही फिल्म ‘गुलाम’ में इसे साबित भी कर दिया।
अपने अब तक के फिल्मी सफर के बारे में रानी बताती हैं कि परदे पर नजर आने वाले तमाम ग्लैमर के पीछे इस हुनर और कला के प्रति वह जुनून छिपा होता है, जिसे एक अभिनेत्री रोजाना समर्पित करती है। वह कहती हैं, “इसमें कोई शक नहीं कि स्क्रीन पर यह सब बहुत ग्लैमरस, बड़ा आसान और बढ़िया नजर आता है। यह बड़ा मनोरम और सुंदर भी दिखाई देता है, खासकर जब हम खूबसूरत लोकेशनों में शूटिंग करते हैं। लेकिन असल बात यह है कि इंडस्ट्री में काम करना बेहद, बेहद मुश्किल है।”
हालांकि, रानी मुखर्जी ये नहीं कहती हैं कि नए लोगों को इसमें आना नहीं चाहिए। लेकिन, एक वरिष्ठ अभिनेत्री के तौर पर वह अपने अनुभव इन नए कलाकारों के साथ जरूर बांटना चाहती हैं। रानी के मुताबिक, “अगर कोई वाकई कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं और अभिनय से उसे सचमुच का प्यार तो उसे फिल्म इंडस्ट्री में जरूर आना चाहिए। लेकिन, अगर कैमरे के सामने आने की वजह कोई और है तो फिर बात बनना मुश्किल है। कामयाबी, ग्लैमर, नाम और शोहरत यहां उसी को मिल सकती है, जिसे दर्शक प्यार करते हैं। और, दर्शक हर कलाकार में देखते हैं उसकी अभिनय के प्रति गंभीरता और ईमानदारी। यहां नकल की किसी को जरूरत नहीं है।”