फिल्म पद्मावत से साल 2018 की शुरुआत करने वाले बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह की फिल्म सिम्बा इस हफ्ते (28 दिसंबर) रिलीज हो रही है। साउथ की सुपरहिट फिल्म टेंपर की इस रीमेक में रणवीर सिंह पहली बार निर्देशक रोहित शेट्टी के साथ काम कर रहे हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी इन खास बातों के बारे में...
रणवीर सिंह इंटरव्यू, 'मैं स्टार नहीं एक्टर बनना चाहता हूं', इस खास शख्स को शादी में कर रहे थे मिस
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साल 2018 काफी सरगर्मियों वाला साल रहा आपके लिए। बहुत सारी खुशियां मिलीं क्या किसी लम्हे में दुख भी मिला...?
हां कह सकते हैं। पूरा साल कैसे बीत गया, सच पूछें तो वाकई पता ही नहीं चला। पहले पद्मावत को लेकर इतना हंगामा हुआ। मुझे लग रहा था कि लोग मुझे विलेन के तौर पर स्वीकार करेंगे भी नहीं। लेकिन इसी किरदार को लेकर मुझे इतनी तारीफें मिलीं कि लगा मेहनत सफल रही। फिर गली ब्वॉय की शूटिंग फिर सिम्बा की शूटिंग और बीच में दीपिका से मेरी शादी। हां, इतनी सारी खुशियों के बीच मुझे अपनी नानी की याद बहुत आई। इसी साल उनका निधन हुआ। मैं हमेशा उन्हें मिस करता रहा।
आपकी इमेज एक मस्ती वाले इंसान की बन रही है। एक ऐसा हीरो जो जीवन को जीना जानता है। अब आप सुपरस्टार हैं क्या लगता है सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक हो रहा है..?
सच कहा जाए तो मैंने सुपरस्टार या स्टार की प्लानिंग कतई नहीं की। मैं एक एक्टर के तौर पर पहचाना जाना चाहता हूं। बचपन से ही हीरो बनना चाहता था। खूब सारी फिल्में देखता था। सोचता था एक दिन मैं भी परदे पर वह सब करूं जो ये सारे लोग करते हैं।
तो आपकी नजर में स्टार से ज्यादा जरूरी है अच्छा अभिनेता बनना?
जी सहा कहा आपने। मेरा मानना है कि एक्टर का समय खत्म नहीं होता। अमिताभ बच्चन जी को देखिए वह लगातार काम कर रहे हैं। मैंने उनकी फिल्में तब देखनी शुरू कीं जब उनका संघर्ष का दौर चल रहा था, वह कमाल के अभिनेता हैं, कामयाबी आपको स्टार बनाती है और उससे भी ज्यादा ये बात कि आप किस तरह के रोल परदे पर करते हैं। मैं अमितजी की तरह ऐसा अभिनेता बनना चाहता हूं जो हर तरह के रोल कर सके।
दीपिका आप के साथ दिखतीं हैं तो उनके चेहरे पर अलग ही खुशी दिखती है, कैसे आपने ये रिश्तों का भरोसा हासिल किया?
मैं और दीपिका एक दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। किसी भी रिश्ते की यही बुनियाद होती है। छह साल हम लोग एक दूसरे को समझते रहे। तब जाकर ये केमिस्ट्री बनी। जीवन में कुछ भी तुरंत हासिल नहीं होता। धैर्य और पक्का इरादा कामयाबी की पहली शर्त है।