बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रीना रॉय किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। 7 जनवरी 1957 जन्मी अभिनेत्री आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। अपने जमाने में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शुमार रीना रॉय इंडस्ट्री की ऐसी अदाकारा हैं, जिन्होंने लीड रोल से लेकर मां के किरदार को भी स्क्रीन पर बखूबी निभाया है। 1972 से अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाली अभिनेत्री के जन्मदिन के मौके पर चलिए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें...
Reena Roy: जब पहली ही फिल्म में डायलॉग भूलने की रीना रॉय को मिली थी ऐसी सजा, हाथ से निकल गईं कई फिल्में
रीना रॉय को फिल्मी दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। शुरुआती करियर में एक्ट्रेस छोटे-बड़े हर तरह के रोल करने के लिए तैयार थीं। फिर 1972 में अभिनेत्री को 'जरूरत' फिल्म मिली और उनकी किस्मत चमकी। हालांकि पहचान उन्हें 'जैसे को तैसा' से मिली। इससे पहले रीना रॉय को काफी परेशानी का सामना भी करना पड़ा था, क्योंकि ‘जरूरत’ से पहले रीना रॉय को बीआर इशारा की ही फिल्म ‘नई दुनिया नए लोग’ मिली थी। लेकिन शूटिंग के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि एक्ट्रेस के हाथ से कई फिल्में निकल गईं।
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हुआ कुछ यूं था कि ‘नई दुनिया नए लोग’ की शूटिंग आउटडोर चल रही थी। पूरी यूनिट बेंगलुरु से पचास मील दूर एक जंगल में थी। वहीं, पास से एक रेलवे लाइन गुजरती थी, जहां सीन शूट करने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी थी। निर्माता-निर्देशक ने बीआर इशारा ने इस दौरान रीना रॉय और सत्येन को बुलाकर समझाया कि उनके पास पैसे खत्म हो गए हैं और यहां 24 घंटे में सिर्फ एक ट्रेन गुजरती है। ऐसे में दोनों अच्छी तरह डायलॉग याद करके परफेक्ट शॉट दें। ट्रेन के आने पर गड़बड़ हुई तो वह अगले दिन पूरी यूनिट को वापस यहां लाने का खर्च नहीं उठा सकते हैं।
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रीना और सत्येन दोनों ने ही उन्हें भरोसा दिलाया कि वह सब ठीक से करेंगे और कोई गड़बड़ नहीं होगी। ट्रेन की सीटी सुनाई देते ही पूरी यूनिट तैयार हो गई। रीना सत्येन की आंखों में देखकर अपने डायलॉग्स बोलने लगी ही थीं कि बीच में वह लाइन भूल गईं। ट्रेन के जाते ही निर्देशक गुस्से में लाल हो गए और रीना की आंखों से आंसू बहने लगे। जब रीना रॉय की गैरजिम्मेदारी की बात मुंबई पहुंची, तो एक्ट्रेस के हाथ में आई कई फिल्में दूसरी हीरोइनों को मिल गईं और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद एक्ट्रेस ने ठाना कि वह अपनी एक्टिंग पर ध्यान देंगी।
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इसके बाद 1972 में रीना रॉय को बीआर इशारा की ही फिल्म 'जरूरत' मिली। इस बार सीन में ट्रेन की जगह सूरज था। जैसे 24 घंटे में ट्रेन एक बार आती थी, वैसे ही सूरज भी एक बार ही ढलता है। ऐसे में रीना ने निर्देशक से कहा, 'इशारा जी, विजय अरोड़ा को समझा दीजिए, कहीं ये गलती कर बैठें और हां मेरा गलती करने का सवाल नहीं पैदा होगा। मैंने बेंगलुरु में ट्रेन को जाने दिया था, लेकिन इस बार सूरज नहीं ढलने दूंगी।' इसके बाद रीना ने ढलते सूरज को बैकग्राउंड में रखते हुए एक जबरदस्त टेक दिया और ‘जरूरत’ से वह बॉलीवुड में एंट्री कर छा गईं। वहीं, रीना रॉय 'अंधा कानून', 'आशा', 'नसीब', 'नागिन', 'सनम तेरी कसम', 'कालीचरण 'सहित कई बेहतरीन फिल्मों में नजर आई हैं।
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