कभी गौर किया है आपने कि अमिताभ बच्चन किसी फिल्म में किसी मुस्लिम शख्स के किरदार में नजर आते हैं तो लोगों की दिलचस्पी फिल्म में एकदम से बढ़ जाती है। साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘सौदागर’ से गिनना शुरू करें और इस साल रिलीज हुई फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ तक आएं तो अमिताभ बच्चन कम से कम एक दर्जन फिल्मों में ऐसे किरदार कर चुके हैं। वह कभी मोती बने, कभी अहमद रजा, कभी सिकंदर तो कभी जां निसार अख्तर खां। कभी इकबाल खान तो कभी जफर अली रिजवान, कभी बादशाह खान तो कभी बड़े मियां। लोगों ने उनके इन अंदाज से खूब मोहब्बत की। लेकिन, बदलते वक्त के साथ बड़े परदे पर खुदाबख्श आजाद को लोगों ने पसंद नहीं किया और चुन्नन नवाब को मोबाइल के परदे पर। वैसे अमिताभ बच्चन को अपनी पहली फिल्म में ही जो किरदार मिला था, उसका नाम था, अनवर अली। ये फिल्म थी ख्वाजा अहमद अब्बास की बनाई हुई फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’। अमिताभ बच्चन की बतौर अभिनेता बोहनी इसी फिल्म से मानी जाती है। लेकिन, ये फिल्म 7 नवंबर को रिलीज नहीं हुई। इसके बावजूद आज मैं इसी फिल्म का बाइस्कोप लिखने जा रहा हूं तो इसकी वजह है अमिताभ बच्चन का ट्वीट जो दावा करता है कि ये फिल्म 7 नवंबर को रिलीज हुई।
बाइस्कोप: 7 नवंबर 1969 को रिलीज नहीं हुई थी अमिताभ बच्चन की फिल्म सात हिंदुस्तानी, ये है असली तारीख
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अमिताभ बच्चन का ट्वीट नंबर 2704
अमिताभ बच्चन ने अपना ट्वीट नंबर 2704 जो किया है वह है 8 नवंबर 2017 का। दरअसल इस दिन अमिताभ बच्चन के ट्विटर हैंडल से इसी संख्या के चार ट्वीट किए गए। इनमें से एक ट्वीट फिल्म ‘अकेला’ के 26 साल पूरे होने का है। अगला ट्वीट फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के 48 साल पूरे होने का है। इसी ट्वीट में अमिताभ फिल्म को साइन करने की तारीख 15 फरवरी 1969 बताते हैं और फिल्म की रिलीज की तारीख लिखते हैं 7 नवंबर 1969। फिर अगला ट्वीट उनका अपनी फिल्म ‘मर्द’ को लेकर हैं जिसमें वह इस फिल्म के मध्य अरब के देशों और मिस्र में महीनों तक चलते रहने का जिक्र करते हैं और ये भी लिखते हैं कि फिल्म ने रिलीज के 32 साल पूरे कर लिए। और फिर उनका उस दिन का आखिरी ट्वीट उसी क्रम संख्या 2704 का है भारतीय क्रिकेट टीम की टी20 के मैच में न्यूजीलैंड पर जीत हासिल करने का। अमिताभ बच्चन के ट्वीट्स को लेकर विवाद होते रहे हैं और उनके ट्वीट्स में अपुष्ट जानकारी होने की बातें भी इस साल कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के दौरान सामने आई, लेकिन अपनी ही पहली फिल्म के बारे में उनकी ये जानकारी संभवत: ‘गूगल बाबा’ की देन है। विकीपीडिया पर फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ की रिलीज डेट 7 नवंबर 1969 ही लिखी है जो दरअसल फिल्म के पहली बार सेंसर सर्टिफिकेट हासिल करने की तारीख है। यहां तक कि फिल्मों की सबसे बड़ी वेबसाइट होने का दावा करने वाली आईएमडीबी पर भी फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के रिलीज होने की तारीख 7 नवंबर ही दर्ज है।

पहली फिल्म में बिहारी अनवर अली का रोल
फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ में अमिताभ बच्चन बिहार के युवा अनवर अली के रोल में हैं जो अपनी रचनाओं से इंकलाबी है। देश के अलग अलग सूबों के पांच और युवा मिलकर गोवा पहुंचते हैं और वहां साथ देते हैं मारिया का जिसने गोवा से पुर्तगालियों को खदेडने का बीड़ा उठा रखा है। बरसों बाद अमिताभ बच्चन ने गोवा की मुक्ति पर बनी एक और फिल्म ‘पुकार’ में भी काम किया। इस फिल्म में उनके साथ रणधीर कपूर और जीनत अमान थे और फिल्म का निर्देशन किया था रमेश बहल ने। लेकिन, अमिताभ बच्चन की जिस फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ की मैं बात कर रहा हूं, वह पैसे के पैमाने पर भले एक कामयाब फिल्म न रही हो लेकिन हिंदी सिनेमा में ये एक ऐसा मील का पत्थर है जिसे पार किए बिना हिंदी सिनेमा के सफर को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। ख्वाजा अहमद अब्बास की लिखी और निर्देशित फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ में अमिताभ बच्चन के साथ उत्पल दत्त, ए के हंगल, अनवर अली और मधु जैसे कलाकार थे। और, ये फिल्म अमिताभ बच्चन को इस संयोग से मिली थी कि अजिताभ को उनकी एक मित्र नीना ने इस फिल्म के बारे में बताया और फिर फोटो भेजे जाने के बाद अमिताभ को इसका बुलावा आ गया। ख्वाजा अहमद अब्बास ने फिल्म में अमिताभ बच्चन को काम देने से पहले अपने परिचित कवि और अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन से टेलीग्राम भेजकर लिखित अनुमति भी हासिल की थी। पूरी फिल्म में काम के सिर्फ पांच हजार रुपये पाने वाले अमिताभ बच्चन फिल्म की शूटिंग के दौरान कई दिनों तक बिना नहाए भी रहे क्योंकि फिल्म के मेकअप आर्टिस्ट पंढरी जुकर को किसी काम से हफ्ते भर के लिए गोवा से बंबई लौटना पड़ा।
ख्वाजा अहमद अब्बास की नायाब फिल्म
आखिर जिस फिल्म को तमाम जगहों पर 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुआ बताया जाता है, वह फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ रिलीज हुई किस दिन, ये बताने से पहले थोड़ी सी बातें फिल्म के निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास के बारे में। हिंदी सिनेमा में उनका लंबा सफर रहा है। 7 जून 1914 को पानीपत में जन्मे ख्वाजा अहमद अब्बास बहुभाषी पत्रकार रहे। उनका कॉलम ‘लास्ट पेज’ देश के किसी भी पत्रकार का सबसे लंबा चला कॉलम है। ये 1935 में ‘द बॉम्बे क्रॉनिकल’ में छपना शुरू हुआ और ये अखबार बंद हुआ तो फिर ‘ब्लिट्ज’ में छपने लगा। 1987 में उनके निधन तक ये कॉलम लगातार छपता रहा। भारत सरकार ने जिस साल उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया, उसी साल उन्होंने फिल्म बनाई ‘सात हिंदुस्तानी’। ध्यान रहे बनाई, रिलीज नहीं की। 1946 के कान फिल्म फेस्टिवल का सबसे बड़ा पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म ‘नीचा नगर’ उन्होंने ही लिखी। पाल्म डी ओर नामक पुरस्कार के नामांकन तक पहुंचने वाली भारत की दूसरी फिल्म ‘आवारा’ के लेखक भी ख्वाजा अहमद अब्बास ही थे। इस पुरस्कार तक पहुंचने वाली फिल्म ‘परदेसी’ की कहानी भी उन्होंने ही लिखी। फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के लिए ख्वाजा अहमद अब्बास ने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, ये पुरस्कार दो साल बाद 1972 में अब्बास ने फिल्म ‘दो बूंद पानी’ के लिए फिर जीता।
कैफी आजमी ने जीता नेशनल फिल्म अवॉर्ड
फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के ये किस्से भी आपको पहले से ही पता होंगे कि अमिताभ बच्चन को जो रोल फिल्म में मिला, वह दरअसल पहले टीनू आनंद करने वाले थे, लेकिन सत्यजीत रे के साथ निर्देशन में सहायक बनने के लिए वह कोलकाता चले गए तो अमिताभ को ये रोल मिला। ये भी अधिकतर लोगों को पता है कि फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने वाले जलाल आगा की बहन शहनाज से बाद में टीनू आनंद ने शादी की। लेकिन ये कम लोगों को ही पता होगा कि शहनाज ने भी इस फिल्म में काम किया है और जिस मॉडल नीना सिंह के फिल्म छोड़ देने पर ये काम मिला, उन्हीं नीना सिंह के बताने पर अजिताभ ने अमिताभ की फोटो ख्वाजा अहमद अब्बास को भेजी थी। फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ को एक और राष्ट्रीय पुरस्कार इसके गीतकार कैफी आजमी के लिए भी मिला। फिल्म की कथा, पटकथा तो ख्वाजा अहमद अब्बास ने खुद लिखी थी। फिल्म के प्रोड्यूसर भी वह खुद ही थे। अब्बास ने फिल्म की तकनीकी टीम बेजोड़ तलाशी थी। उस समय के दिग्गज सिनेमैटोग्राफर एस रामचंद्र ने फिल्म में कैमरा संभाला था और इस ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म की एडिटिंग की थी मोहन राठौड़ ने। फिल्म के जे पी कौशिक के संगीतबद्ध किए गाने काफी चर्चित रहे थे और महेंद्र कपूर का गाया ये गाना तो लोगों ने खूब पसंद किया।