कोरोना संक्रमण काल खत्म हुए लंबा वक्त हो चुका है। ओटीटी पर सीधे रिलीज का रास्ता तलाशने वाली फिल्मों को भी अब सिनेमाघरों के रास्ते वहां तक पहुंचना पड़ रहा है और इस बदली परिस्थिति का फायदा उठाने के लिए अब फिर लौट रहा है डायरेक्ट टू टीवी का जमाना। पहले वीएचएस कैसेटों के दौर में खूब सारी फिल्में सिर्फ घरों में सीधे पहुंचती थी। फिर टेलीविजन के लिए भी खूब अच्छी अच्छी फिल्में बनीं लेकिन फिर डिजिटल ने सारा खेल बदल दिया। लेकिन, समय चक्र अपनी गति से चलता है और खुद को दोहराता भी है तो टेलीविजन दर्शकों के लिए खुशखबरी ये कि जी अनमोल पर एक नई फिल्म ‘सब मोह माया है’ रिलीज होने जा रही है।
Direct to TV: डायरेक्ट टू ओटीटी के बाद फिर लौटा डायरेक्ट टू टीवी का दौर, इस फिल्म से होने जा रही अच्छी शुरुआत
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फिल्म ‘सब मोह माया है’ का विषय अनुकंपा नियुक्ति है जिसमें किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिजनों में से किसी एक योग्य व्यक्ति को नौकरी मिल जाती है। निर्देशक अभिनव पारीक की इस में अनु कपूर और शरमन जोशी बाप बेटे की भूमिका निभा रहे हैं। सोमवार को फिल्म के मुंबई में हुए ट्रेलर लांच में अनुराग कश्यप भी अपने शागिर्द अभिनव पारीक का हौसला बढ़ाने पहुंचे।
इस मौके पर अनुराग कश्यप ने कहा, 'मैं भी ऐसी फिल्में बनाना चाह रहा था, लेकिन मेरे पास माया (पैसे) लगाना वाला कोई नहीं था। अभिनव जब यह फिल्म बनाकर मेरे पास लाया तो मैं फिल्म देखकर बहुत आश्चर्यचकित था। अभिनव ने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है। किसी भी फिल्म को बनाने समय यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस बजट में बनाई है उससे महंगी लगनी चाहिए। कम सामान और संसाधन में कैसे अच्छी फिल्म बना सकते हैं। यह सब चीजें मुझसे सीखकर अभिनव ने एक अच्छी फिल्म बना दी।'
फिल्म 'सब मोह माया है' के ट्रेलर में दिखाया गया है कि बेटा अपने बाप से कहता है कि जीते जी तो कुछ किए नहीं अब मरकर ही हमारा कुछ भला कर दो। फिल्म के विषय पर चर्चा करते हुए अनुराग कश्यप ने कहा, 'मैं बनारस में पढ़ा हूं। मेरे पिता जी पावर हाउस में काम करते थे। मैंने वहां देखा है कि जब किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो अनुकंपा में उसके परिवार वालों को नौकरी मिल जाती है। जो शहर में पैदा हुए है उनको अनुकंपा नियुक्ति के बारे में तो पता ही नहीं होगा।'
यह फिल्म थियेटर में रिलीज ना होकर जी अनमोल चैनल पर रिलीज हो रही है। अनुराग कश्यप कहते हैं, 'थियेटर में फिल्में रिलीज करने के लिए जितने एक्सपोजर की जरूरत होती है, उतनी ही एक्सपोजर छोटी फिल्मों को भी थियेटर में रिलीज करने के लिए होती है। मैं तो फिल्म मेकर हूं, बिजनेस का गणित मेरे समझ में नहीं आता है। लेकिन फिल्म के निर्माता विनोद भानुशाली का फिल्म को टीवी पर रिलीज करने का फैसला सही है। मेरे हिसाब से फिल्म बनाने का दो मकसद होना चाहिए। एक तो नुकसान नहीं होना चाहिए और दूसरी बात जिन दर्शकों के लिए फिल्म बनाई है उन तक फिल्म पहुंचनी चाहिए।'