देश के सबसे बड़े रंगस्थल नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) में बीते दो दिन बहुत ही भक्तिपूर्ण रहे। कभी बी आर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में दुर्योधन बनकर चर्चित हुए अभिनेता पुनीत इस्सर ने अब खुद रामायण पर एक ब्रॉडवे शो बनाया है। और, इस शो में सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री समीक्षा भटनागर के फोन की घंटियां सोमवार सुबह से बंद होने का नाम नहीं ले रही हैं। वह कहती हैं, ‘इतनी तारीफ पाकर मैं खुद भी आश्चर्यचकित हूं। मुझे लगता है कि सीता के चरित्र की सादगी और इसकी सौम्यता की कसौटी पर दर्शकों ने मुझे खरा पाया और तभी वे मुझे इतना प्यार दे रहे हैं।’
Samikssha Batnagar: सीता के किरदार में समीक्षा ने सबको चौंकाया, दर्शकों की बदलती पसंद ने दी प्रयोग की हिम्मत
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बीता साल समीक्षा भटनागर के लिए यादगार साल रहा है। वह कहती हैं, ‘कोरोना संक्रमण काल ने बहुत सारी चीजें बदल दी हैं। लोग अब कहानियों की तलाश में हैं। सितारे अब उनको वही भा रहे हैं जो अच्छी कहानियां ला रहे हैं। मैंने भी इसी तरफ अपना ध्यान लगाया और दर्शकों की बदलती अभिरुचियों का अध्ययन करते हुए अपने किरदारों के साथ प्रयोग करने की शुरुआत की। दर्शकों की इस नई पसंद ने मुझे भी प्रयोग करने की हिम्मत और हौसला दिया है।’
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अभिनय में नए नए प्रयोगों को मिल रहे अच्छे प्रतिसाद की वजह वह बीते दो तीन साल में लोगों के भीतर आए बदलाव के साथ साथ अपने लचीलेपन को भी मानती हैं। समीक्षा कहती हैं, ‘पूरी दुनिया अब एक नए तरीके से व्यहार कर रही है। किसी खास बात पर अड़े रहने का समय नहीं है। अपने हुनर को लगातार तराशते रहने के साथ साथ मैंने खुद को इस लिहाज से भी बदला है कि चुनौतियों के अनुसार व्यक्तित्व में लचक आनी जरूरी है। इसका फायदा भी मुझे मिला। ‘धूप छांव’ और ‘अंत द एंड’ जैसी कथा प्रधान फिल्मों में लोगों ने मुझे देखा और सराहा। और, इसी की अगली कड़ी है ये नाटक, ‘जय श्री राम रामायण’ जिसमें मैं सीता का किरदार निभा रही हूं।’
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सीता का किरदार निभाना और वह भी हजारों दर्शकों के समक्ष सजीव, बहुत चुनौती भरा रहा होगा? ये पूछने पर समीक्षा के चेहरे का तेज और बढ़ जाता है। वह मुस्कुराते हुए कहती हैं, ‘रंगमंच पर कोई भी चरित्र निभाना चुनौती भरा ही होता है। यहां आपको रीटेक का मौका नहीं मिलता। हफ्तों, महीनों की तैयारी के बाद कलाकार किसी नाटक को करने के लिए तैयार हो पाते हैं और, अगर कहानी मर्यादा पुरुषोत्तम राम की हो तो फिर तो आप समझ सकते हैं कि इसमें कितनी तैयारी और कितनी सावधानी की जरूरत है।’
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‘जय श्री राम रामायण’ में सीता का किरदार निभाने के लिए समीक्षा को अपने बचपन की सीखों और घर परिवार के माहौल का भी बहुत फायदा मिला। वह बताती हैं, ‘नाटक ‘जय श्री राम रामायण’ के बारे में ऐसे कुछ बता पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि ये लार्जर दैन लाइफ तरीके से रंगमंच पर प्रस्तुत किया जाता है। सेट पर विशाल स्क्रीन्स लगाए जाते हैं जिन पर कथा वस्तु के अनुसार वातावरण बिल्कुल सजीव दिखता है। मैं उत्तराखंड से हूं तो प्रकृति के बीच में आते ही मेरा उत्साह दोगुना हो जाता है। मेरा बचपन मेरे अभिनय की सबसे बड़ी पाठशाला रही है। बचपन में सुनी धार्मिक और पाराणिक कहानियां अब मुझे ये नाटक करने में मददगार हो रही हैं।’
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