अमर उजाला का वैचारिक संगम संवाद कार्यक्रम 17 और 18 अप्रैल को लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने जा रहा है। इसमें कई दिग्गज हस्तियों के साथ बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और लेखक विनीत कुमार सिंह भी शामिल होंगे। इस दौरान वह आज के सिनेमा के बदलते दौर के साथ-साथ फिल्मों और स्क्रिप्ट राइटिंग की बारीकियों पर भी बात करेंगे। अमर उजाला संवाद में विनीत के साथ खास बातचीत करने से पहले चलिए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें...
Amar Ujala Samwad: अमर उजाला संवाद में शामिल होंगे विनीत कुमार सिंह, अभिनय और लेखन की बारीकियों पर होगी बात
Amar Ujala Samwad 2025-Vineet Kumar Singh: अमर उजाला का वैचारिक संगम संवाद कार्यक्रम 17 और 18 अप्रैल को लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने जा रहा है, जिसमें बॉलीवुड की मशहूर अभिनेता और लेखक विनीत कुमार सिंह भी शामिल होंगे।
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सिनेमा में विनीत की चमक
विनीत कुमार सिंह आज सिनेमा के चमकते सितारों में से एक हैं। एक डॉक्टर से अभिनेता और लेखक तक का उनका सफर किसी प्रेरणादायक फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं रहा। वाराणसी की गलियों से निकलकर बॉलीवुड की चकाचौंध तक पहुंचने वाली विनीत अपने किरदारों में जान डालते हैं और अपनी कहानियों से दिल भी जीत लेते हैं। 'मुक्काबाज' के श्रवण सिंह से लेकर 'छावा' के कवि कलश तक, विनीत ने साबित किया कि वह हर किरदार में फिट बैठते हैं।
कैसे चुनी अभिनय की राह
24 अगस्त 1981 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मे विनीत का बचपन गंगा के घाटों और बनारस की जीवंत संस्कृति के बीच बीता। उनके पिता एक गणितज्ञ थे, जिनके अनुशासन ने विनीत को मेहनत की आदत दी तो मां ने कला और संगीत के प्रति उनका रुझान जगाया। विनीत को खेलों का भी शौक था। वह राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके थे। स्कूल के नाटकों में हिस्सा लेना उन्हें पसंद था, लेकिन परिवार की ख्वाहिश उन्हें मेडिकल की पढ़ाई की ओर ले गईं। फिर भी सिनेमा का जादू उन्हें बार-बार पुकारता रहा। आखिरकार, उन्होंने अपने जुनून को चुना और मुंबई का रुख किया।
विनीत की पहली फिल्म
मुंबई में विनीत का सफर आसान नहीं था। 2002 में उनकी पहली फिल्म पिताह रिलीज हुई, जिसमें वह संजय दत्त के साथ नजर आए। यह मौका उन्हें एक टैलेंट हंट शो सुपरस्टार जीतने के बाद मिला था, जहां निर्देशक महेश मांजरेकर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। 2003 में उन्होंने 'हथियार' और 'चैन खुली की मैन खुली' जैसी फिल्मों में काम किया।
उन्होंने मराठी, तमिल, और भोजपुरी फिल्मों में भी काम किया। विनीत ने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। फिर 2010 में मराठी-हिंदी फिल्म सिटी ऑफ गोल्ड ने उन्हें नई उम्मीद दी। यहीं उनकी मुलाकात अनुराग कश्यप से हुई, जिन्होंने उन्हें 2012 में आई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में दानिश खान की यादगार भूमिका दी। इस फिल्म ने विनीत को इंडस्ट्री में एक नई पहचान दी। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के बाद विनीत ने बॉम्बे टॉकीज (2013), गोरी तेरे प्यार में (2013), अगली (2014), और बॉलीवुड डायरीज (2016) जैसी फिल्मों में सहायक किरदार निभाए।
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इन फिल्मों से बनाई खास पहचान
'मुक्काबाज' विनीत के करियर का मील का पत्थर थी। इसमें उन्होंने श्रवण सिंह नामक एक महत्वाकांक्षी बॉक्सर का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्होंने दो साल तक कठिन बॉक्सिंग ट्रेनिंग ली। फिर विनीत ने दास देव (2018), गोल्ड (2018), सांड की आंख (2019), आधार (2021), और गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (2020) में काम किया। 2025 में रिलीज हुई छावा में उन्होंने कवि कलश की भूमिका निभाई, जो छत्रपति संभाजी महाराज के विश्वासपात्र थे। हाल ही में वह 'जाट' में नजर आए हैं, जिसमें उन्होंने सनी देओल के साथ काम किया है।
विनीत ने ओटीटी की दुनिया में भी अपनी जगह बनाई। बार्ड ऑफ ब्लड (2019), बेताल (2020), और रंगबाज: डर की राजनीति (2022), घुसपैठिया (2024) में उनके किरदारों ने दर्शकों का दिल जीता। खास तौर पर रंगबाज ने उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बड़ा सितारा बना दिया।
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