साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आगाज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुआ था। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के पहले दिन मशहूर फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा और निर्देशक विशाल फुरिया के साथ शिरकत की थी। अभिनेत्री 'छोरी 2' को लेकर चर्चा में बनी हैं और उन्होंने संवाद कार्यक्रम में अपनी फिल्म के साथ-साथ गंभीरता से किरदार निभाने के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने बताया कि वह सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग से कैसे निपटती हैं।
Nushrratt Bharuccha: नुसरत बोलीं- सोशल मीडिया प्रेशर पर बनेगी फिल्म, डिप्रेशन के चलते थैरेपी ले रहे सितारे
Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला संवाद में बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरुचा ने भी शिरकत की थी। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग के बारे में बात की। साथ ही बताया कि इसके क्या नुकसान हो रहे हैं।
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'छोरी 2' के दौरान आईं ये चुनौतियां
दरअसल, 'छोरी 2' में अपने किरदार को निभाने के लिए नुसरत को कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। उन्होंने उन चुनौतियों के बारे में भी बात की। किरदार को निभाने की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए नुसरत ने कहा कि 'छोरी' और 'छोरी 2' में जो सबसे मुश्किल काम था, वो था एक मां का किरदार निभाना, क्योंकि मैंने रियल लाइफ में जो अनुभव किए हैं, उसे मैं पर्दे पर आसानी से निभा सकती हूं।
मैं रियल लाइफ में न प्रेग्नेंट हुई हूं और न मैं मां बनी हूं, न वो रिश्ता समझ आता है। पर्दे पर मां बनना बहुत मुश्किल था। मैं जब छोरी 2 देखती हूं तो यह देखती हूं कि क्या मैंने मां के इमोशन को ठीक से किया है। मेरे लिए वह फीलिंग बहुत जरूरी थी, इसलिए दोनों फिल्मों में वह मेहनत मेरे लिए बहुत जरूरी थी। बाकी सारी फिल्में इसके मुकाबले काफी आसान थीं। कॉमेडी करना इसे देखते हुए काफी आसान लगा।
एक्टर्स को थैरेपी लेना बहुत जरूरी
नुसरत ने किरदारों से बाहर निकलने के बारे में बात करते हुए कहा कि छोरी और छोरी 2 के लिए मुझे और विशाल सर को काफी चर्चा करनी पड़ी। मेरी बच्ची मुझसे छिन गई है, उस इमोशन में मुझे लगातार रहना पड़ा। पूरी शूटिंग के दौरान। एक ऐसी फिल्म में घुसना और निकलना वाकई बहुत मुश्किल है। हम एक्टर्स को वाकई एक फिल्म के बाद थैरेपी लेनी चाहिए कि इन इमोशन से कैसे निकलें, ताकि हम और भी किरदारों पर ध्यान दे पाए और दूसरे इमोशन को भी अच्छे से कर पाए। खुद को हील करना बहुत जरूरी है'।
सोशल मीडिया पर बनेगी फिल्म
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के जुड़े मुद्दों के बारे में बात करते हुए नुसरत ने कहा कि मैंने यह मानती हूं कि कुछ वर्षों में हम सोशल मीडिया पर फिल्म बना रहे होंगे और उसमें सोशल मुद्दा ही होगा सोशल मीडिया की ट्रोलिंग, क्योंकि हम तब तक इस बारे में अच्छे से समझ चुके होंगे, क्योंकि सोशल मीडिया पर बहुत सी ऐसी चीजें हम देख रहे हैं कि इसकी वजह से बहुत से लोग तनाव में जा रहे हैं और जान भी ले रहे हैं। ये बहुत डरावनी चीज है।
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सोशल मीडिया है एक डरावनी जगह
सोशल मीडिया का जो प्रेशर है, जो भयानक है। हम ऐसे नहीं जी सकते हैं। हम कुछ वक्त बाद ऐसी फिल्म बना रहे होंगे, जहां लोग सोशल मीडिया का प्रेशर को दिखा रहे होंगे। इस पर फिल्म बनेगी कि क्या हुआ हमारे युवाओं के साथ और खुद हमारे साथ कि हम इस दबाव को कैसे झेल पाए। यह बहुत बड़ा मॉन्स्टर है।
अब तो यह आदत हो गई है कि हम लोगों को उनके नाम नहीं, उनके सोशल मीडिया हैंडल के नाम से जानते हैं। यह जगह बहुत डरावनी हो चुकी है। युथ तो परेशान हैं ही, लेकिन मैं बच्चों के लिए बहुत डरी हुई हूं, लेकिन इससे पीछा भी नहीं छुड़ा सकते। पहले बाजार जाना, सब्जी खरीदना रोज का काम था। अब हम ऑनलाइन बैठकर सब्जियां खरीदते हैं तो मार्केट कौन जाएगा? हमने अपनी जिंदगी ऐसा बना ली है, इसलिए हमें ऐसे ही यही रहना होगा, हम पीछे नहीं जा सकते।