ना लंबी छरहरी हिंदी सिनेमा की आम हीरोइन जैसा लुक, ना ही कानों में मिस्री घोल देने वाली सुरीली आवाज और ना ही कोई ऐसा निर्देशक जो बार बार लगातार उनको प्रशिक्षित करता रहे, लेकिन रानी मुखर्जी ने अपनी पहली ही हिंदी फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ में ये जता दिया था कि वह किसी खांचे में फिट होने वाली अदाकारा नहीं है। यही बात उन्होंने तब भी साबित की जब वह अपने करियर की बुलंदी पर थीं और नजर आई थीं निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ में।
फिल्म ‘ब्लैक’ की 16वीं सालगिरह पर रानी का खुलासा, दिलीप साहब की चिट्ठी मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम रही
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फिल्म ‘ब्लैक’ सिर्फ रानी मुखर्जी का ही उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ अभिनय नहीं है बल्कि हिंदी सिनेमा की अभिनेत्रियों के सर्वश्रेष्ठ अभिनय वाली फिल्मों में भी शुमार होती है। अपने अध्यापत के साथ एक खूबसूरत और आत्मीय रिश्ता कायम करने वाली दिव्यांग लड़की मिशेल मैकनैली की भूमिका में रानी का अभिनय सिनेमा की एक यादगार है। फिल्म की 16वीं सालगिरह बताती हैं कि इस फिल्म के लिए उन्होंने पहली ही बार में हां नहीं कर दी थी।
रानी बताती हैं, “संजय लीला भंसाली ने जह मुझे यह रोल ऑफर किया तो मेरे मन में फिल्म या किरदार को लेकर कोई शंका तो नहीं थी लेकिन, एक कलाकार के तौर पर मुझे इस बात का बहुत ज्यादा भरोसा नहीं था कि मैं इस किरदार को निभा पाऊंगी। मैंने इस बारे में उनसे चर्चा की और सीधा सवाल पूछा था कि क्या आप यकीनी तौर पर मुझसे ही यह रोल करने के लिए कह रहे हैं। मैं अब भी मानता हूं कि यह बड़ी ही मुश्किल भूमिका थी और ऐसे किसी किरदार के बारे में मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।”
फिर बात बनी कैसे? इस सवाल के बारे में रानी ने जो खुलासा किया, वह एक कलाकार और एक निर्देशक के रिश्ते की आपसी समझ को भी सलाम है। रानी बताती हैं, “संजय ने मुझसे वादा किया था कि इस किरदार को निभाने के लिए जो कुछ भी मदद मुझे लगेगी, वह करने में पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने अपना वादा निभाया और मुझे छह महीने तक वाकई कड़ी ट्रेनिंग करवाई और इशारों से बात करने वाली भाषा भी सिखवाई। इस पूरे प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग लोगों के साथ मेरा संवाद संकेत भाषा में ही चलता रहा। इन कसौटियों से गुजरकर ही मैं मिशेल के किरदार में खुद को ढाल पाई।”
फिल्म ‘ब्लैक’ रिलीज हुई तो इसे लेकर दर्शकों के समूह खेमों में बंटे दिखने लगे थे। सिनेमा की समझ रखने वालों ने फिल्म की और रानी की तारीफों के पुल बांधे लेकिन, ये पूछे जाने पर कि क्या ऐसी कोई तारीफ भी मिली जो उनके दिल को छू गई हो? रानी बताती हैं, “यह फिल्म देखने के बाद दिलीप (कुमार) साहब ने मेरे काम की और मेरी तारीफ करते हुए एक पत्र लिखा था। ये फिल्म में मेरे काम के लिए मिला सबसे बड़ा इनाम रहा। दिलीप कुमार जैसे प्रतिष्ठित महान अभिनेता से अभिनय की सराहना मिलना मेरे लिए अद्भुत बात थी। उनकी शाबाशी और आशीर्वाद मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं है। मेरे पिता जी ने उनके साथ लंबा काम किया था और मैं तो उनके काम और उनके पेशेवराना अंदाज के किस्से सुन-सुन कर ही बड़ी हुई हूं।