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बॉलीवुड का ऐसा नाम, हीरो बनकर फेल, विलेन बना तो सुपरहिट अब रोमांस किंग
टीम डिजिटल / अमर उजाला
Updated Thu, 02 Nov 2017 08:27 AM IST
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दिल्ली की गलियों में अपना बचपन गुजारने वाले शाहरुख खान हमेशा रंगीन मिजाज वाले रहे हैं। कॉलेज की बदमाशियों से लेकर मुंबई के जुहू बीच पर सरेआम अपने प्यार, गौरी का हाथ मांगने की कहानी लाजवाब रही हैं।
shahrukh khan
बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने शाहरुख खान नाम के 25 साल के दुबले पतले लड़के की आखों में कुछ और ही देखा था। 1990 में उन्होंने अपनी फिल्म 'दिल आशना है' में शाहरुख को पहला ऑफर दिया लेकिन 25 जून 1992 को 'दीवाना' फिल्म से शाहरुख खान को बॉलीवुड में सही रूप में इंट्रोडक्शन मिला।
दिव्या भारती की खूबसूरती और ऋषि कपूर के स्टारडम के बावजूद 'दीवाना' में शाहरुख की दीवानगी ने सबका दिल जीत लिया। हलांकि इसके बाद शाहरुख को 'राजू बन गया जैंटिलमैंन' और 'माया मेमसाहब' जैसी फिल्में भी मिली लेकिन उनकी असली कहानी 'बाजीगर' से शुरू हुई।
ये ऐसा समय था जब हीरो के सपने सजा कर करियर की शुरुआत करने वाला कोई भी, विलेन बनने से डरता था लेकिन शाहरुख ने इस चुनौती को ना सिर्फ कबूल किया बल्कि इसके लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी जीता।
ये ऐसा समय था जब हीरो के सपने सजा कर करियर की शुरुआत करने वाला कोई भी, विलेन बनने से डरता था लेकिन शाहरुख ने इस चुनौती को ना सिर्फ कबूल किया बल्कि इसके लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी जीता।
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टैलेंट, लुक्स और सही रणनीति नहीं होती तो शाहरुख खान का बॉलीवुड में कोई अस्तित्व ही नहीं होता। इसका सबूत 90 के दशक में आईं 'डर', 'अंजाम', 'करन अर्जुन', 'यस बॉस' और 'परदेस' जैसी फिल्मों से मिलता है।
लेकिन परदे पर खून खराबा करने या हंसाने-रुलाने के लिए तो शाहरुख बने ही नहीं हुए थे। रोमांस उनके नस नस में बसा था और उस दौर में बॉलीवुड को भी एक फ्रेश 'दिलवाला' चाहिए था।
लेकिन परदे पर खून खराबा करने या हंसाने-रुलाने के लिए तो शाहरुख बने ही नहीं हुए थे। रोमांस उनके नस नस में बसा था और उस दौर में बॉलीवुड को भी एक फ्रेश 'दिलवाला' चाहिए था।
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1995 में यशराज की फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' आई और इस फिल्म के साथ ही किंग खान का बॉलीवुड में पुनर्जन्म हुआ। केवल 4 करोड़ की इस फिल्म पर शाहरुख का प्यार भरा अंदाज ऐसा हावी हुआ कि बॉक्स ऑफिस पर करीब 125 करोड़ रुपये की बरसात हो गई।
कहा जाता है कि 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' के बाद तो पूरे देश में रोमांस की एक नई लहर दौड़ गई थी। जिसे कभी प्यार नहीं हुआ था, वो भी आशिक बन बैठा था।
कहा जाता है कि 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' के बाद तो पूरे देश में रोमांस की एक नई लहर दौड़ गई थी। जिसे कभी प्यार नहीं हुआ था, वो भी आशिक बन बैठा था।