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फिल्मों में आने से पहले रेलवे में नौकरी करता था ये लिरिक्स राइटर, 'कविराज' कहकर बुलाते थे राज कपूर

Thu, 30 Aug 2018 09:38 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 30 Aug 2018 09:38 AM IST
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shailendra birthday special here life facts
राज कपूर, शैलेंद्र

करीब 2 दशकों तक हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक गाने देने वाले शैलेंद्र का 95वां जन्मदिन है। उनके गाने आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं। शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त 1923 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में हुआ था। शैलेंद्र का असली नाम शंकरदास केसरीलाल था। राज कपूर उन्हें 'कविराज' कहकर बुलाते थे। सिनेमा की दुनिया में आना शैलेंद्र के लिए महज एक संयोग था। आइए उनके जन्मदिन जानते हैं उनसे जुड़ा किस्सा...

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शैलेंद्र के पिता फौज में थे जब उनकी नौकरी छूटी तो वहां से वो मथुरा आ गए। कॉलेज के दिनों से ही शैलेंद्र को लिखने का शौक था। इस दौरान आजादी की अलख जगाने वाली उन्होंने कई कविताएं लिखीं और वो कवि सम्मेलनों में इसे सुनाने लगे। उनकी कविताएं 'हंस' और 'धर्मयुग' जैसी पत्रिकाओं में छपने लगी थीं। 1947 में वो भारत छोड़ो आंदोलन के वक्त अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ जेल भी गए।

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लिखना भले ही शैलेंद्र का शौक रहा हो लेकिन घर की बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए उन पर पैसे कमाने का भी दबाव बढ़ने लगा। जेल से छूटने के बाद उनके पिता ने उनसे काम धंधा करने के लिए कहा। जिसके बाद वो लिखना छोड़कर रेलवे की नौकरी करने लगे। पहले उनकी पोस्टिंग झांसी में हुई बाद में वो मुंबई पहुंचे। शैलेंद्र रेलवे में नौकरी भले ही कर रहे थे लेकिन उनका मन नहीं लग रहा था। उन्हें जैसे ही काम से खाली वक्त मिलता वो पेड़ के नीचे बैठकर कविताएं लिखने लगते थे। उनके दोस्त उनसे कहते थे 'काम करो काम, लिखने से घर नहीं चलेगा।'

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उन्हीं दिनों शैलेंद्र की एक कविता 'जलता है पंजाब' की चारों ओर चर्चा होने लगी। एक कवि सम्मेलन के दौरान शैलेंद्र की मुलाकात राज कपूर से हुई। शैलेंद्र को सुनते ही राज कपूर को उनमें एक उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया। राज कपूर ने तुरंत शैलेंद्र को अपनी फिल्मों के लिए गाने लिखने का ऑफर दिया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। शैलेंद्र ने कहा था कि वो पैसे के लिए नहीं लिखते। अगले ही साल शैलेंद्र की शादी हुई और मुंबई में गृहस्थी बसाने की जिम्मेदारियां भी बढ़ने लगी।

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जब शैलेंद्र की पत्नी गर्भवती थीं तो उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी। उन्हें राज कपूर की याद आई और वो उनसे मिलने पहुंचे। राज कपूर उस वक्त फिल्म 'बरसात' बना रहे थे हालांकि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन अभी भी दो गाने बन सकते थे। तब राज कपूर के कहने पर शैलेंद्र ने 'बरसात' में 'हमसे मिले तुम सजन, तुमसे मिले हम' और 'पतली कमर है तिरछी नजर है' लिखी। इसके बाद दोनों की जोड़ी जो जमी वो आखिर तक चलती रही। 'बरसात' से लेकर 'मेरा नाम जोकर' तक राज कपूर की सभी फिल्मों के गाने शैलेंद्र ने ही लिखे।

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