सिनेमाई पर्दे पर शम्मी कपूर 'याहू' चिल्लाते हुए जब आते थे, तब कोई उन्हें जंगली कहे या कुछ और। शमशेर उर्फ शम्मी कपूर ने इस बात की फिक्र नहीं की। एक्टिंग करते हुए नदियों में छलांग लगाने से लेकर बर्फीली पहाड़ियों पर नाचने तक- शम्मी कपूर अपने दौर के छैल छबीले एक्टर थे। 21 अक्टूबर 1931 को जन्मे शम्मी ने 14 अगस्त 2011 को आखिरी सांस ली। शम्मी कपूर आखिरी बार अपने खानदान के नए स्टार रणबीर के साथ रॉकस्टार फिल्म में नजर आए थे। हम आपको बीबीसी के खजाने से शम्मी कपूर का एक यादगार इंटरव्यू पढ़वाते हैं। ये इंटरव्यू तब संजीव श्रीवास्तव ने लिया था।
वजन बढ़ाने के लिए शम्मी कपूर ने पीनी शुरू कर दी थी बीयर, मधुबाला से मिली थी ऐसी सलाह
मैंने याहू पहली बार 'तुमसा नहीं देखा' फिल्म में इस्तेमाल किया था। लड़के और लड़की के बीच भंगड़ा डांस हो रहा होता है। लड़का फिसलता है, फिर उठता है और लड़की का पीछा कर रहा होता है। फिर जब वो लड़की से मिलता है तो उसके एक्सप्रेशन में याहू निकलता है। मैंने इसे फिल्म दिल देकर देखो में दोहराया। इन दोनों ही फिल्मों को नासिर हुसैन को डायरेक्ट किया था। फिर इसे जंगली में भी इस्तेमाल किया और ये काफी लोकप्रिय हो गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि मेरे परिवार के कुछ लोग ऐसा समझते हैं कि याहू मेरी कंपनी है। एक बार रणधीर कपूर ने भी मुझसे कहा कि अंकल आपने बताया नहीं कि याहू आपकी कंपनी है। जवाब में मैंने कहा कि पागल आदमी, याहू मेरी कंपनी होती तो मैं यहां बैठा होता। मैं तब अमरीका में होता।
मैं यानी पृथ्वीराज कपूर का बेटा, राज कपूर का भाई और गीता बाली का पति भी था। आप इसे फायदा या नुकसान कुछ भी समझ लीजिए। लेकिन हां इंडस्ट्री में मैंने जो शुरुआत के चार-पांच साल गुजारे, इसमें मेरी पहचान यही रही कि मैं राज कपूर का भाई और गीता बाली का खाविंद हूं। मेरी कोई अपनी हैसियत नहीं थी। मैं नहीं समझता हूं कि ये कोई फायदे वाली बात थी। हां लेकिन ये प्रोत्साहन था कि आदमी और कोशिश करे ताकि अपनी पहचान बना सके।
जब मैंने रेल का डिब्बा फिल्म मधुबाला के साथ की, तो वो बोलीं- तुम इतने पतले हो कि मैं तुम्हारी हीरोइन नहीं लगती हूं, कुछ और लगती हूं तुम अपना वजन बढ़ाओ। मैंने फिर वजन बढ़ाने के लिए बीयर पीना शुरू किया। मैंने जब तुमसा नहीं देखा फिल्म साइन की तो मैंने ये सोचा कि मेरी जिंदगी का आखिरी मौका था। अगर इस मौके को चूक गया तो सब गया। इसके लिए मैंने मूंछ, बाल कटवाए और अपना लुक बदला। मुझे इतना याद है कि हम पिताजी के साथ माटुंगा में जहां रहा करते थे, वहां एक डांस सैलून किस्म का हॉल था। वहां एक लड़की 20 रुपये घंटे के हिसाब से नाचना सिखाती थी। वो लड़की खूबसूरत थी। हम भी जवान थे, 19-20 की उम्र रही होगी।
हमने टैंगो सीखने की कोशिश की पर डांस हमें नहीं आया। सच ये है कि डांस मुझे नहीं आता। पर हां, मुझे म्यूज़िक का शौक बचपन से है। जब मैं बचपन में थियेटर में पिताजी के साथ टूर पर जाया करते थे। छतों पर चांद को देखते हुए मैं बजते म्यूजिक को अपने एक्सप्रेशन देता था। चांद को देखते हुए ये करते हुए अगर किसी की याद आने की बात करूं तो तब से लेकर आज तक मैंने मधुबाला जैसी हसीन लड़की नहीं देखी।
