हिंदी सिनेमा में किशोर कुमार, लता मंगेशकर जैसे कई महान गायक हुए हैं। जिनकी गायकी के दीवाने आज भी हैं। लोग बड़े ही चाव से इनके गीत सुनते हैं। "मेरे पिया गये रंगून" और "कजरा मोहब्बत वाला" भी ऐसी ही एक महान गायिका ने गाया और हमेशा के लिए इस गाने को अमर कर दिया। इन गीतों को अपनी आवाज देने वाली गायिका शमशाद बेगम की आज जयंती है। उनके सुरीले सुर आज भी लोगों के कानों में गूजते हैं। शमशाद बेगम के जन्मदिन पर आइए बताते हैं उनके जीवन के कुछ रोचक किस्सों के बारे में।
14 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में जन्मीं शमशाद बेगम ने शुरुआती दिनों में पेशावर रेडियो में काम किया था। शमशाद को बहुत छोटी उम्र से ही गाने का शौक था। लेकिन फिल्मों में गाना उनके लिए सपने जैसा था। लेकिन ये सपना सच हुआ शमशाद के चाचा की वजह से। उनके एक चाचा लाहौर की एक बड़ी म्यूजिक कंपनी में ऑडीशन दिलाने ले गए। जहां गुलाम हैदर ने उनका टेस्ट लिया और उन्हें एक ही बार में 15 गानों का कॉन्ट्रेक्ट मिल गया।
शमशाद बेगम कट्टवादी मुस्लिम परिवार से थीं लेकिन उनका दिल आया एक हिंदू वकील (गणपत लाल) पर। परिवार के विरोध के बावजूद शमशाद बेगम ने मात्र 15 साल की उम्र में शादी कर ली। गणपत ने लाहौर से मुंबई तक शमशाद का हर कदम पर ख्याल रखा। शमशाद ने भी पति के साथ उम्र भर का रिश्ता निभाया।
शमशाद बेगम ने अपने करियर में कई भाषाओं में 6,000 से ज्यादा गाने गाए। शमशाद बेगम अपने जमाने की सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाली और कमाने वाली प्लेबैक सिंगर भी। शमशाद बेगम को पहली बार एक गाने के लिए 15 रुपये मिले थे। उन्होंने नौशाद, एसडी बर्मन और ओ पी नैयर जैसे महान संगीतकारों के साथ काम किया था। शमशाद बेगम ने कभी किसी नए संगीतकार के साथ गाने से मना नहीं किया।
40 और 50 के दशक में शमशाद बेगम के गाए गाने रेडियो पर छाए रहते थे। जैसे 'सी.आई.डी' फिल्म का 'लेके पहला पहला प्यार' और 'कहीं पे निगाहें'। इसके अलावा 'पतंगा' का 'मेरे पिया रंगून' तो आज भी कई मोबाइल फोन की प्लेलिस्ट में मिल जाएगा। शमशाद बेगम द्वारा गाए चर्चित गीतों में ‘कभी आर कभी पार’, ‘कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना’, ‘सइयां दिल में आना रे’, ‘बूझ मेरा क्या नाम रे’ और ‘छोड़ बाबुल का घर’ शामिल है। संगीत में उनके योगदान को देखते हुए 2009 में शमशाद बेगम को पद्म भूषण से नवाजा गया था।
सुनिए शमशाद बेगम का यह सदाबहार गाना