रोमांस, तकरार, बिछड़ना और फिर मिलना...फिल्म की कहानी में जब तक ये चीजें न हों तब तक मजा नहीं आता। कहते हैं कि प्यार में धर्म-जाति का भेद नहीं होता है। फिल्मों में हमेशा यह दिखाया जाता है कि प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है। इस प्यारे रिश्ते में रंगभेद, जात-पात, बड़ा-छोटा कद मायने नहीं रखता। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सब बातें सिर्फ बड़े पर्दे पर ही दिखाई जाती हैं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री ऐसी तमाम जोड़ियां हैं। एक ऐसी ही जोड़ी है भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी और बॉलीवुड अदाकारा शर्मिला टैगोर की। तो चलिए विस्तार से जानते हैं शर्मिला टैगोर और मंसूर अली खान पटौदी की प्रेम कहानी... जिन्होंने असल जिंदगी में जाति और धर्म से अलग हटकर अपना लाइफ पार्टनर चुना।
Love Story: शर्मिला से हां कराने के लिए चार साल तक भेजे फूल, नवाब मंसूर को इश्क में खूब बेलने पड़े पापड़
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पहली नजर में ही दिल हार बैठे मंसूर
बात साल 1965 की है, जब पहली बार नवाब मंसूर अली खान पटौदी ने जब पहली बार बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर को देखा था और इसके बाद ही तय कर लिया था कि शर्मिला के साथ ही वो जिंदगी बिताएंगे। लेकिन उन्हें इस बात का भी अंदाजा था कि उनके इश्क की राह आसान नहीं होगी और हुआ भी यही। उन्हें शर्मिला से हां करवाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े थे।
प्रपोज करने में लगे चार साल
मंसूर अली खान और शर्मिला टैगोर की मुलाकात एक कॉमन दोस्त के जरिए हुई थी। जब दोनों मिले थे तब शर्मिला टॉप एक्ट्रेस थीं और मंसूर दमदार क्रिकेटर। दोनों ही अपने क्षेत्र में शानदार काम कर रहे थे। इसी वजह से शर्मिला टैगोर मंसूर की बहुत बड़ी फैन थीं। नवाब पटौदी को पहली नजर में ही शर्मिला से प्यार हो गया था। उन्हें इस एक मुलाकात में महसूस हो गया था कि शर्मिला ही वह लड़की हैं, जो उनके लिए बनी है लेकिन फिर भी उन्होंने अभिनेत्री को प्रपोज करने में चार साल लगा दिए थे।
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शर्मिला से हां कराने के चार साल तक भेजे फूल
दरअसल पटौदी साहब तो शर्मिला टैगोर को चाहने लगे थे, लेकिन शर्मिला थीं कि मोहब्बत कबूल करने को तैयार नहीं थीं। एक इंटरव्यू के दौरान सोहा अली खान ने बताया था कि शर्मिला को मनाने के लिए पहले तो नवाब पटौदी ने सात रेफ्रिजरेटर भेजे। लेकिन जब इससे बात नहीं बनी तो करीब चार साल तक उन्होंने शर्मिला को गुलाब के फूल भेजे, तब जाकर बात बनी और वह शर्मिला के दिल में अपनी जगह बना पाए।
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शादी के लिए शर्मिला ने किया धर्म परिवर्तन
मंसूर अली खान और शर्मिला टैगोर के रिश्ते में धर्म सबसे बड़ी दीवार थी, जिसे शर्मिला टैगोर ने तोड़ दिया था। लेकिन दोनों की शादी इतनी आसान भी नहीं थी। शर्मिला टैगोर के सामने नवाब पटौदी की मां ने शर्त रख दी थी, जिसे पूरा करने के बाद ही शर्मिला की मंसूर से शादी हो सकती थी। नवाब पटौदी की मां चाहती थीं कि शर्मिला इस्लाम अपनाएं, जिसके लिए वह राजी भी हो गईं। नवाब से शादी करने के लिए शर्मिला आयशा सुल्तान बन गईं। इसके बाद दोनों ने 27 दिसंबर 1968 को अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की।
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